समझौता

समझौता
गंगेश मिश्र, कपिलवस्तु
२२,फरवरी
Kp-oli-And-Modi-7समझौते होते रहे हैं,
होते रहेंगे।
जिन्हें बोने हैं काँटे
बोते रहेंगे।
फिर वही होगा,
जो होता रहा है।
विस्तारवाद मुर्दाबाद,
अभी है
अवसरवाद ज़िन्दाबाद।
प्रकृति है,
हम सभी को पता है
पानी ऊपर से,
नीचे की ओर बहता है।
फिर बखेड़ा,
किस बात का है
हर घड़ी,
गण्डकी, कोशी, कर्णाली।
जिससे,
आधा बिहार डूबा रहता है।
फिलहाल,
नौ समझौतों पर हस्ताक्षर हुए हैं,
नौ ग्रहों के शान्ति के लिए।
शायद,
सम्बन्ध सुमधुर होंगे।
उम्मीद करते हैं,
विकास के पथ पर
फिर से हम अग्रसर होंगे।

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