समायोजन पर सेना का बदलता रुखङप

राजकुमार यादव

आखिरकार नेपाली सेना ने माओवादी लडाकुओं के समायोजन पर सकारात्मक कदम उठाते हुए एक नयाँ प्रस्ताव सरकार व सेना समायोजन विशेष समिति के पास भेजा है । समायोजन पर सेना द्वारा भेजा गया यह प्रस्ताव अब तक के सारे प्रस्तावों में र्सवाधिक उपयुक्त और वैज्ञानिक आधार का माना गया है । लेकिन साथ ही सेना ने अपनी कुछ शतर्ें भी लगाई है । सेना के इस नए प्रस्ताव पर माओवादी सहित अन्य कुछ दलों का र्समर्थन भी मिल सकता है ।
संविधान जारी करने का दिन जैसे जैसे करीब आते जा रहे है, वैसे-वैसे माओवादी लडाकुओं के समायोजन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच खींचातानी बढÞती जा रही है । समायोजन पर माओवादी अब तक खुलकर अपने पक्ष रखने से घबरा रही है । वहीं अन्य दल भी इस अति संवेदनशील विषय पर विरोधाभास बयानें दे रहे हैं ।
लडाकू समायोजन पर जहाँ दलों का अपनी डफली अपना राग का अलाप कर रहे हैं, वहीं नेपाली सेना ने इस मामले में अपने तरफ से सुझाव सहित स्पष्ट बाँटमलाइन तैयार कर ली है । सरकार को सौंपे समायोजन के विषय पर अपने प्रस्ताव में माआवादी ने कुछ चीजों को विलकुल भी मानने से इंकार कर दिया है । जिनमें समूहगत प्रवेश का मुद्दा भी शामिल है । नेपाली सेना ने स्पष्ट रुप से कह दिया है कि माओवादी के जनमुक्ति सेना का नेपाल की राष्ट्रीय सेना में समूहगत प्रवेश को वो किसी भी हालत में नहीं मानेंगे । इसके अलावा ऐसे लडाकुओं का भी समायोजन नहीं हो सकता है जो कभी नेपाल के किसी भी सुरक्षा अंगों से जुडÞे थे और भागकर माओवादी लडाकु में शामिल हुए हैं । एक अन्य महत्वपर्ूण्ा विन्दु जिसे नेपाली सेना ने मानने से इंकार कर दिया है । वह यह कि पार्टर्ीीे नेतृत्व  में या फिर केन्द्रीय स्तर पर पद संभालने वाले किसी भी लडÞाकू या कमाण्डर को सेना में प्रवेश नहीं दिया जाएगा । मतलब साफ है कि जनमुक्ति सेना के प्रमुख कमाण्डर, डिप्टी कमाण्डरों, डिवीजन कमाण्डरों में से किसी को भी सेना में स्थान नहीं दिया जाएगा ।
जाहिर है सेना ने जो यह कडÞा प्रस्ताव सरकार के समक्ष रखा है । उस पर एक बार फिर बवाल हो सकता है । माओवादी अपने कमांडर को लेफ्टिनेण्ट जेनरल, डिप्टी कमाण्डरों को ब्रिगेडियर जेनरल और डिवीजन कमाण्डरों को मेजर जेनरल के पद पर बहाली की मांग पर अडÞे हुए हैं । लेकिन नेपाली सेना ने इनके लिए यह कहते हुए रास्ता ही बन्द कर दिया है कि ये सभी माओवादी स्थाई समिति, पोलिट ब्यूरो और केन्द्रीय कमिटी के सदस्य हैं । और इनके प्रवेश से सेना में एक खास राजनीतिक विचारधारा हावी हो सकती है ।
ऐसा नहीं है कि सेना समायोजन के लिए सिर्फकडÞा नियम की लागू किया है । नेपाली सेना अच्छी तरह जानती है कि माओवादी लडाकुओं के सुरक्षायंत्रों में समायोजन को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बन रही सहमति के ठीक खिलाफ जाना नेपाली सेना के लिए भी बदले हालात में बहुत मुश्किल है । इसलिए समायोजन के प्रस्ताव में सेना ने निचले स्तर के लडाकुओं के लिए कुछ सहुलियतें भी दी है । इसके अनुसार लडाकुओं की शैक्षिक योग्यता पर कुछ नरमी बरती जा सकती है । साथ ही वैवाहिक स्थिति, उम्र सीमा व अन्य कुछ शारीरिक कमजोरी को भी नजरअंदाज किए जाने का प्रस्ताव भी सेना ने रखा है ।
नेपाली सेना के प्रधानसेनापति छत्रमान सिंह गुरुंग सेना पर राजनीतिक विचार हावी ना होने देने के अलावा समायोजन के पक्ष में ही दिखते हैं । गुरुंग के ही निर्देश पर सैन्य मुख्यालय ने समायोजन का जो नयाँ प्रस्ताव दिया है, उसके अनुसार नेपाली सेना, नेपाल प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी तथा माओवादी जनमुक्ति को मिलाकर करीब १० से १२ हजार जनशक्ति का एक नयाँ सुरक्षा तथा राष्ट्रीय विकास निर्माण महानिदर्ेर्ेेालय बनाने का प्रस्ताव दिया है । इस नए सुरक्षा बल को सीमा सुरक्षा, वन सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा, राहत उद्धार कार्य व राष्ट्रीय विकास कार्य में लगाने का प्रस्ताव किया गया है ।
सेना द्वारा भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार विभाग का नेतृत्व नेपाली सेना के लेफ्टिनेण्ट जेनरल को दिया जाए । इसके अलावा दो/तीन मेजर जेनरल, कर्नल, लेफ्टिनेट कर्नल, मेजर, कैप्टन, लेफ्टिनेंट और सकेण्ड लेफ्टिनेंट को मिलाकर दो सौ अधिकारियों को शामिल किया जाना चाहिए । हर दो सौ जवान का नेतृत्व मेजर को सौंपने का प्रस्ताव है । सेना के प्रस्ताव में इन सभी सुरक्षा बलों को मिलाकर एक नयाँ फोर्स बनाने पर समायोजन का सही अर्थ सिद्ध होगा । सेना ने सिर्फमाओवादी के ही अलग फोर्स ना बनाने का सुझाव भी सरकार को दिया है ।

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