समावेशी–समानुपातिक आरक्षण सम्बन्धी व्यवस्था, एकबार मिलेगा आरक्षण सुविधा

काठमांडू, २५ दिसिम्बर |
वि.सं. २०६२/०६३ साल के जनआन्दोलन के बाद राज्य संयन्त्र को समावेशी बनाने के लिए नेपाल सरकार ने निजामती लगायत सेवा में समावेशी–समानुपातिक आरक्षण सम्बन्धी व्यवस्था किया था । उक्त व्यवस्था के मुताबिक महिला, मधेशी, आदिवासी–जनजाति और पीछडे हुए क्षेत्र में बसोबास करनेवालें लोग विशेष सुविधा के साथ निजामती सेवा में प्रवेश पाते थे । साथ में उन लोगों की स्नान्तरण और पदोन्नति भी उसी के अनुसार किया जाता था । लेकिन अब समावेशी–समानुपातिक सुविधा उपभोग करनेवाले लागों के लिए निरासाजनक खबर है । क्योंकि ऐसा सुविधा जीवन में सिर्फ एक ही बार मिलनेवाला है । उच्चस्तरीय प्रशासन सुधार सुझाव समिति के सिफारिस अनुसार सरकार इस तरह की तैयारी कर रहा है ।
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इस मुद्दा में सरोकार रखनेवाले सरकारी अधिकारियों को मानना है कि समावेशी–समानुपातिक आरक्षण सुविधा को दुरुपयोग करते हुए एक ही लोग बारबार आरक्षण सुविधा को उपभोग करते हैं । इसीलिए ऐसी दुरुपयोग रोकने के लिए नया व्यवस्था किया जा रहा है । हाल महिला, दलित, जनजाति, पीछाड़ा वर्ग, मधेसी, अपांगता हुए व्यक्ति और दुर्गम में बसोबास करनेवाले लोगों को सरकारी सेवा में आरक्षण का व्यवस्था है ।
उच्चस्तरीय प्रशासन सुधार सुझाव समिति के अध्यक्ष काशीराज दाहाल का मानना है कि लक्षित समुदाय के सीमित व्यक्ति बारबार ऐसा सुविधा लेता है तो सामाजिक न्याय का सिद्धान्त विपरीत हो जाता है । इसलिए एक व्यक्ति अपनी करियर में सिर्फ एक ही बार ऐसा सुविधा उपभोग कर सकता है । दाहाल के अनुसार इस सम्बन्ध में थप अध्ययन करने के लिए सामान्य प्रशासन मन्त्रालय को सुझाव दिया है । नेपाल सरकार के मुख्य सचिव सोमलाल सुविधा का भी मानना है कि आरक्षण व्यवस्थित और विश्वसनीय करने के लिए भी इस सम्बन्धी कानून में संशोधन होना जरुरी है ।
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