सम्पदाओं के पुनर्निर्माण का कौन सा काम किस देश को मिला है ?

मालिनी मिश्र, काठमाण्डू, १ अगस्त ।
नेपाल में पुरातत्व विभाग ने २३ सम्पदाओं के पÞुनर्निर्माण का काम भारत को दिया है । जिसमें से ११ राजधानी काठमाण्डू के व बांकी उपत्यका के बाहर का काम है । इससे पहले यह काम जर्मनी, श्रीलंका, अमेरिका,चीन को भी करने की अनुमति दी गयी है ।
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विभान नें २ ललितपुर व २ काठमाण्डू के डिजाइन के स्टिमेट के काम को समपन्न किया है तथा पाटन के भीमसेन का मंदिर, पुराना अदालत, काठमाण्डू  के सफेद मछिन्द्रनाथ का मंदिर, टेकू का पचली भैरव व वमविकटेश्वर मंदिर हैं । डिजाइन व स्टिमेट डिजाइन के काम के समापन के बाद भारत अपना काम आगे बढाएगा ।
ल.वि.स. हिरण्य वर्णेश्वर महाविहार, ज्येष्ठ वर्ण महाविहार, शिवपुर चैत्य, नापीचंद्र महाविहार, कुमारी घर, आगमदीगी व रत्नाकर महाविहार के ड्राइंग व कास्टिंग का काम हो रहा है । इन सभी कामों में लगने वाला सभी खर्च भारत ही करेगा ।
दूसरी तरफ, वसन्तपुर दरबार क्षेत्र व नुवाकोट का ७ मंजिला दरबार व इसके अगल बगल के क्षेत्र का भार भी चीन को मिला है । इसमें आने वाला सभी खर्च चीन सरकार का होगा ।
  जापान ने हनुमान ढोका के आगमन घर व जगन्नाथ मंदिर बनाने बा भार लिया है जिसमें एम ओ यू भी हो चुका है । इसके साथ ही स्विस सरकार ने भी सम्पदा के पुनः निर्माण के काम में सहयोग की इच्छा जतायी है जिसमें दोलखा के त्रिपुरा सुन्दरी मंदिर भी शामिल है ।
 भक्तपुर का पुजारी मठ व विद्यालय का परिसर जर्मनी की जिम्मेदारी है । स्वययं भू का आनंद कुटी महाविहार व बुंगमति का लालमछेनद्रनाथ का मंदिर श्रीलंका सरकार बनाएगी ।
इन दोनों ही भवन के निर्माण के लिए लगभग २० करोड़ का खर्चा आने की संभावना है । इन सबके अतिरिक्त पशुपति नाथ,वसनतपुर दरबार, पाटन दरबार क्षेत्र भक्तपुर व चांगु नारायण बौद्धनाथ स्वयं भू नाथ विश्व समपदा सूची में हैं ।
यदि इनका पुर्ननिर्माण नहीं किया गया तो इसे खतरे की सूची में रखने का आदेश यूनेस्कों ने दे दिया है । दाहाल के अनुसार सभी कामों के लिए ५ वषों का समय लिया गया है ।
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