सम्पादकीय विचारणीय मुद्दे

संविधान प्राप्ति के दर्ीघकालीन सपने को साकार करने हेतु नेपाली जनता ने दूसरे संविधान सभा के निर्वाचन में बढÞ-चढÞ कर हिस्सा लिया । फलस्वरूप नेपाली कांग्रेस एवं एमाले बडÞी पार्टर्ीीे रूप में सामने आई और इनकी सम्मिलित सरकार बनी र्।र् इमानदार व्यक्तित्व के कंधे पर सरकार की जिम्मेवारी सौंपी गई । समय-समय पर पार्टर्ीी नेताओं ने १ वर्षमें संविधान प्रदान करने की बात की है । पर सरकार की ओर से लगभग सौ दिनों के अन्तराल में कोई ठोस प्रारुप नहीं आया है, जिससे जनमानस में आशा की जगह निराशा व्याप्त हो गई है । आजतक सरकार विभागीय प्रमुखों की नियुक्ति की समस्याओं को भी नहीं सुलझा पाई है, स्थानीय निकाय की चुनावी बात तो दूर की बात है । गृहमन्त्रालय की ओर से भी शान्ति सुरक्षा के क्षेत्र में भी कोई ठोस कार्यक्रम लागू नहीं हो सका । गृहमन्त्री का हेलिकाप्टर भ्रमण यात्रा सरकारी व्ययभार को बढा रही है, जो चिन्ता का विषय है र्।र् इमानदार पुलिस अधिकारीगण आपराधिक तत्वों को पकडÞकर जनता में शान्ति सुरक्षा की अनुभूति कराना चाहते हैं, पर उनपर सस्ती लोकप्रियता कमाने की बात कहकर ऐसी अधिकारियों पर डाँट फटकार की चाबुक गृहमन्त्रालय की ओर से चलाया जाना विशेष चिन्ता की बात है, जो जनता को नागबार गुजर रही है । इस ओर सरकार प्रमुख को समय रहते ध्यान देना जरूरी है ।
सरकार ने सत्यनिरूपण विधेयक को जैसे पास कराया, वैसे ही अन्य समस्याओं के समाधानार्थ सरकार की ओर से शीघ्रातिशीघ्र तत्परता दिखाने की जरूरत है । समस्याओं के समाधानार्थ वर्तमान सरकार को द्रुतगति से आगे बढÞने की अविलम्ब आवश्यकता है, जिससे जनता में विश्वास बढÞे, समय की ऐसी मांग है । यदि ऐसा होता है तो सरकार की विश्वसनीयता बढÞ सकती है । जनता की कमर महंगाई ने तोडÞ दी है, जिसे नियन्त्रण करना सरकार की प्रमुख जिम्मेवारी है ।
एफएनसीसीआई में व्यवसायियों की नई समिति प्रदीपजंग पाण्डे के नेतृत्व में चुनकर आई है । इनसे व्यवसायियों एवं अन्यान्य क्षेत्रों में भी पाण्डे की नेतृत्ववाली समिति से बहुत सी अपेक्षाएँ हैं । निर्वाचित होने के बाद अध्यक्ष का यह कहना कि हम सभी पक्षों को मिलाकर काम करेंगे और देश के औद्योगिक विकास यात्रा को आगे ले जाएँगे । लेकिन क्या ऐसा करना सहज है – क्योंकि नेपाली राजनीति की तरह व्यवसायिक जगत में भी स्वार्थगत गुटबन्दी जडÞ जमाए बैठी है । ऐसी अवस्था में सब को एक साथ लेकर आगे बढÞना कम चुनौतीपर्ूण्ा नहीं है । देश में व्याप्त जर्जर अर्थतन्त्र को सही दिशा में ले जाने के लिए नेपाल उद्योग वाणिज्य संघ को चाहिए कि सरकार, राजनीतिक दलों के साथ समन्वयकारी भूमिका का निर्वाह करे । उद्योग संघ पर सबसे बडÞी जिम्मेवारी है, औद्योगिक क्षेत्रों में कार्यरत श्रमिकों को न्यायोचित परिश्रमिक दिलाने की ओर ध्यान देना ।

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