सरकार कोई बीच का रास्ता निकाले, ताकि देश टकराव से बचे : विनोदकुमार विश्वकर्मा

विनोदकुमार विश्वकर्मा ‘विमल’, काठमांडू , २८ दिसिम्बर |

सरकार आखिरकार राजी होकर मधेश और आदिवासी जनजाति पार्टीयों की सिकायतों के मद्देनजर वह संविधान में संशोधन के लिए कदम उठायी है । नए प्रस्ताव के अनुसार प्रान्त नं. ५ का बंटवार इस तरह हुआ की इसमें पहाडी जिलाें को अलग किया गया है और मैदानी जिलाें को जोड़ते हुए नवलपरासी से लेकर वर्दिया जिले तक एक प्रान्त बनाया गया है । प्रधानमंत्री पुष्पकमल दाहाल का मानना है कि इससे थारु की अलग राज्य की माँग पूरी हो सकेगी । वैसे सरकार के लिए एक बड़ी रुकावट प्रमुख विपक्षी पार्टी सी.पी.एन. यू.एम.एल. है । यूएमएल अध्यक्ष के.पी. शर्मा ओली ने संविधान संशोधन की जरुरत को लगातार खारिज किया है ।

prachand-&-madhesi-leaders

लिहाजा प्रधानमंत्री यूएमएल के समर्थन के बिना संशोधन के लिए जरुरी दो तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिस कर रहे हैं । और यह सम्भव है, अगर कुछ छेटी पार्टीयां और करीव दो हफ्ते पूर्व एक हुई राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी और राष्ट्रीय प्रजातन्त्र पार्टी नेपाल संशोधन प्रस्ताव के पक्ष में बोट दे । दूसरी तरफ यूएमएल नेताओं तथा जनजाति पार्टीयों के नेताओं ने देश भर में संविधान संशोधन के विपक्ष में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं । वैसे अगर यूएमएल को अपने साथ लाया जाता है, तो सम्भव है कि सरकार इस प्रस्ताव को थोड़ा उदार बनाने को मजबूर हो जाएंगे । इससे आन्दोलन करने वाली पार्टीयों का विश्वास जीतने की बजाए उन के और उग्र होने का खतरा होगा । उस स्थिति में सरकार वही गलती कर रही होगी, जो उसने संविधान के पारित होने के समय किया था । इसके बरक्स, अगर संशोधन प्रस्ताव पर यूएमएल की कई सारी आपतियां हों, तो मधेशी पार्टीयां भी इस पर सहमत नही होंगी । फिलहाल, मोर्चा के एक बड़े घड़े ने प्रधानमंत्री दाहाल से वादा किया है कि अगर कुछ आरक्षण मिले, तो वह प्रस्ताव का समर्थन करेगी । हालांकि, उपेन्द्र यादव ने इसके विरोध की बात कही है, तो कुछ को इस प्रस्ताव में कूटनीतिक बू लग रही है ।
साफ है की सरकार के लिए चुनौती बड़ी है । हालांकि, मोर्चा का विरोध संविधान को लेकर है, इसलिए उचित यही है कि सरकार यूएमएल की बजाए उसकी मांगों पर गौर करे ।
मुझे याद है, वीरगंज मे आयोजित योग विज्ञान शिविर के उद्घाटन के वाद प्रधानमंत्री दाहाल ने कहा था की ‘नेपाल में नयाँ संविधान का कार्यान्वयन आपसी सहमति से हो रहा है । इससे लोकतान्त्रिक व्यवस्था को मजबूती मिलेगी । संविधान संशोधन की प्रक्रिया पूरा होेते ही नेपाल की चुनौती समाप्त हो जाएगी । नेपाल मे शांति कायम होंगी । वह विकास के मार्ग पर चलने लगेगा ।’ अब देखना यह है कि क्या मधेशियों की मांगें पूरी हो सकेंगी ? क्या संविधान कार्यान्वयन हो सकेगा ? क्या लोकतान्त्रिक व्यवस्था को मजबूती मिल पाएगी ? क्या नेपाल में स्थाई शांति कायम हो सकेगी ? आदि, इत्यादि, इत्यादिक ।
इन सारी समस्याओं के बावजूद हम उम्मीद करते हैं कि सरकार कोई बीच का रास्ता निकाल ले, ताकि देश अब और अनावश्यक टकराव से बचे ।

 

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz