सरकार मधेश की समस्या का हल नही चाहती, वार्ता की नौटंकी करती है : मुक्तिनाथ साह

 मुक्तिनाथ साह, जनकपुर , २२ अक्टूबर | मधेश का कष्टकर जीवन ,आन्दोलनकारी का अशीम उत्साह और सरकार की उदासिनता ! 

मधेश मे चल रहे आन्दोलन का ७० दिन से उपर हो गया है जो विश्व का कीर्तमान ही होगा पर अब भी सरकार उदासिन है आन्दोल के प्रति ! पता नही मधेश कौन सा ऐसा चीज मांग रहा है जो शासक वर्ग ईतना हठी रबैया दिखा रहा है ! ईन ७० दिनों मे मधेश का जन जीवन ईतना कष्टकर हो गया है की कल्पना करने से ही रूह काप उठ्ती है ! ईस आन्दोलन और बन्दी के कारण मजदुर, किसान ,ब्यापारी से लेकर कर्मचारी सभी तवके के लोग बुरी तरह प्रभावित है ! खाध सामग्री, ईन्धन ,दवा आदि सभी चीजों का चरम अभाव है ! छोटी दुरी से लेकर लम्बी दुरी की सम्पूर्ण यातायात पूर्ण रुप से ठप्प है ! लोग अपने अपने घरों मे एक प्रकार से कैदी की जीवन जी रहे हैं !
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शायद कोइ भी अन्दाजा नही लगा पाया था की आन्दोलन ईतनी लम्बी चलेगी ! यहाँ तक की कोइराला सरकार भी अन्दाजा नही लगा पाया था की आन्दोलन ईतनी लम्बी जाएगी ! जब आन्दोलन शुरु हुई थी तो तीन दल के नेतागण और सरकार यह सोच रखा था की १०-१२ दिन मे आन्दोलनकारी थक जाएंगे, मजदुरों का जीना दुष्कर हो जाएगा और ब्यापारी आजिज हो कर आन्दोलन का अवज्ञा करेंगे,प्रतिकार करेंगे और आन्दोलन अपने आप मथर पड जायेगा ! सरकार को ज्यादा कुछ नही करना परेगा आन्दोलन को मथर करने मे ! माधव नेपाल जी ने तो अभिव्यक्ति भी दे दी थी की कितने दिन मधेशी आन्दोलन करेगे ? व्यपारिओं को ब्यापार नही करना है क्या ? मजदुर कितने दिन भुखा रहेंगे ? मधेश के बच्चों को पढ़ना नही है क्या ? आन्दोलन ज्यादा दिन नही चलेगा ! यही सोंच सरकार और शिर्षथ नेतागण को उल्टा पड गया ! आन्दोलन मथर होने के बजाय और ज्यादा सशक्त होने लगा,ज्यादा से ज्यादा जनता सडक पर आने लगे ! बिभिन्न संघ,संस्था ,संगठन एक्यब्धता जाहिर करने लगा आन्दोलन के प्रति ! रही सहि कसर पुरी कर दी सरकार ने आन्दोलन को दबाने के लिए गोली चलाकर ! आन्दोलनकारी मारे जाने से आन्दोलन और ज्यादा उग्र हो गया साथ ही साथ तटस्थ जनता भी आन्दोलन का हिस्सा बन गया! आन्दोलन के क्रम मे महत्वपूर्ण चीज जो देखने को मिल रहा है वह है मधेशी जनता का अदम्य साहस, स्वस्फुर्त उत्साह और हौसला ! मजदुर , किसान ,ब्यापारी,बुद्धिजीवी,नागरिक समाज लगायत हरेक वर्ग सारा शक्ति झोंक दिया है आन्दोलन मे ! पर्व,त्योहार के समय मे भी ब्यापारी वर्ग टस से मस नही हुए है ,हतोत्साह नही हुए है और बन्द का प्रतिकार नही किया है बल्कि और बढ़ चढ़ कर आन्दोलन मे हिस्सा ले रहे हैं ! मजदुर की समस्या को देखकर लोग व्यक्तिगत तौर पर और बिभिन्न संगठन की ओर से मजदुरों को खाधान्न बितरण किया जा रहा है ! गांव गांव से ट्रेक्टर और बैल गाडी पर खाधान्न भेजा जा रहा है बितरण करने के लिए ! सिर्फ जनकपुर मे ५-६ जगहों पर टेन्ट लगा कर खाधान्न वितरण हो रहा है ! दवा बिक्रेताओं के तरफ से घायलों को मुफ्त दवा वितरण हो रहा है ! ईस उत्साह और हौसला से ही आन्दोलन इतनी दिनों से चल रही है और आगे भी चलेगी तो उत्साह और हौसला मे कोइ कमी नही दिख रहा ! ब्यापारी वर्ग भी हतोत्साहित नही हुए है वल्कि और उत्साहित हैं आन्दोलन को निर्णायक बनाने के लिए ! ईतना सब कुछ होने के वावजुद भी न तो कोईराला सरकार गम्भीरता दिखाई ना तो ओली सरकार गम्भीर है ! सरकार की नियती साफ झलक्ती है की सरकार मधेश की समस्या का हल नही चाहती बल्की नाका खुलवाकर आपूर्ति सहज करना चाहती है ! नही तो आन्दोलनकारी से वार्ता न कर के दिल्ली क्यो जाते उप प्रधान मन्त्रि कमल थापा ? सरकार और बिभिन्न दलों के शिर्षथ नेतागण एक ही रट लगा रहे है की मधेश समस्या आन्तरिक है हम वार्ता कर सुल्झा लेंगे पर सुल्झाने के लिए क्या पहल किया है अब तक ? वही वार्ता की नौटंकी ? जब ईन शासक बर्गों को आपस मे समस्या होती है,ताल मेल नही बैठता है तो रात रात भर मीटिंग कर के समाधान निकाल लेते हैं पर मधेश की समस्या को उल्झाये हुए रखना चाहती है सरकार ! पर कितने दिनों तक ? देश भितर की समस्या का समाधान विदेश मे जा कर खोज्ने का कोइ तुक नही है ! ईस लिए मधेश की समस्या का अविलम्ब समाधान होना चाहिए नही तो और भी भयङ्कर स्थिती हो सकती है! क्योकि मधेश की जनता मे अब भी वही उर्जा ,उत्साह और हौसला है !

मुक्तिनाथ साह      (लेखक )

मुक्तिनाथ साह
(लेखक )

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