सर्वोच्चअदालत के न्यायधीश उप्रेती द्वारा इच्छामरण या आत्महत्या ?

विनयकुमार

विनयकुमार

विनय कुमार, २५ मई, काठमाडौं | हर सुबह को तकरिवन ५ बजे मेरा निंद खुल जाता है, बीना अलार्म का । मैं हर रोज सबेरे ध्यान करने का प्रयत्न में रहता हूँ । करता भी हुँ । फिर भी कुछ सुबह का वो पल है जिसमे मैं ध्यान नहीं कर पाता हूँ । सबकुछ ठिक चल रहा था लेकिन सुबह में देशभर की खबरें सुनने की मेरी आदत नें मुझे झकझोंर कर रख दिया । उस वक्त घड़ी में ९ बज रहा था जब कान्तिपुर रेडियो ने ‘सर्वोच्च अदालत के पुर्व न्यायधीश भरतराज उप्रेती द्वारा आत्महत्या’ का समाचार प्रसारण किया । उप्रेती का ‘सुसाईड नोट’ में क्या लिखा था समाचार में यह बात नहीं आया । ‘सुसाईड नोट’ में क्या लिखा होगा यह जानने के लिए मेरी जिज्ञासु स्वभाव को मैं नियन्त्रण कर नहीं सका । तब ‘फेसबुक न्युजफिड’ खोलते ही एक वेबसाईट नें पोष्ट किया था–‘इच्छा मरण हो,‘मेरो शव अस्पताल लाई दिनु, मेरो क्रिया खर्चको ५ लाख भूकम्प पिडितलाई दिनु’ । बस…यह पढ्ते ही मै स्तब्ध हो बैठा । न्यायधीश उप्रेती नें यह क्या कर दिया, क्या लिख दिया ? मै सोचनें पर बिवश हूं ।
क्या ‘इच्छा मरण’– ‘आत्महत्या’ हो सकता है ? हो सकता है तो कैसे ? अपने आप द्वारा अपने शरीर को मार देना इच्छा मरण नहीं आत्महत्या है । देहत्याग है । इच्छा मरण तो अपनी इच्छाओं का मारना है । इच्छा मरण अपने शरीर को मारना नहीं है । वैसे तो कोइ आदमी अपनी इच्छा को मार भी नहीं सकता । मारने से इच्छा मरता भी तो नहीं । वो तो ‘अनन्त’ है । समझने की बात है, इच्छा को समझने से इच्छा मरता है । अगर वरिष्ठ अधिवक्ता उप्रेती अपनी इच्छाओं को समझते तो अपनी शरीर को नहीं त्याग करते । इसलिए यह इच्छामरण नहीं आत्महत्या ही है ।
न्यायधीश उप्रेती अपनी शरीर को त्याग नहीं करते, इस जीवन को भोग करते रहते तो ज्ञानी हो जाता । शरीर को मार देने की जरुरत नहीं पड़ती । भग्वान गौतम बुद्ध का एक कहाबत है, ‘अपनी इच्छाओं से मुक्ति पाना ही जीवन को मुक्त करना है ।’ उनका आत्मा माहान था । क्योंकि ‘मैने जीवन में सही और गलत दोनो काम किया है, उन्होने यह स्विकार किया है सुसाईड नोट में । सभी लोग अपने जीवन में की हुई गलती स्विकार करने की हिम्मत नहीं जुटा पाता है । जिस ने भी गलती को स्विकार करने की हिम्मत को जुटाया है वो सत्य मार्ग को पाया है । न्यायधीश उप्रेती महात्मा थे । उन की आत्मा को शान्ति मिले इेश्वर से यह मेरी प्रार्थना है ।
उप्रेती के मृत्यु उपर तहकिकात हो रहा है महानगरीय प्रहरी परिसर के प्रमुख एसएसपी उक्तम कार्की नें यह जानकारी दी है । सुसाईड नोट के विषय पर भी हमारी जांचपडताल जारी है एसएसपी कार्की ने बताया । सुसाईड नोट में ‘मेरो काजक्रिया गर्नुपर्दैन, मेरो शवलाई अध्ययनमा प्रयोग गर्न शिक्षण अस्पताल लाई दिनु र काज क्रिया बापतको ५ लाख राहत कोषमा जम्मा गरिदिनु’ लिखा है । कल रात १० बजे बाद फांसी लगने की अनुमान कि गई है ।

Bharatraj upretiकौन थे भरतराज उप्रेती ?
६३ साल के भरतराज उप्रेती पूर्व न्यायधीश थे । वरिष्ठ अधिवक्ता के नाम से जाने जाते थे , उप्रेतीजी। ज्ञानेश्वर में अपनी पत्नी के साथ रहते थे । उनकी दो बेटी और एक बेटा था । बेटा अनुप उप्रेती सितापाईला में अलग ही रहता है । न्यायधीश उप्रेती न्यायक्षेत्र में चर्चित और विवाद रहित न्यायधीश के रुप में परिचित है । सर्वोच्च के अस्थायी न्यायधीश से अवकास पाये थे । न्यायधीश होने से पूर्व कम्पनी लयर के रुप में चर्चित थे । हालसाल में निजी क्षेत्र और कर्पोरेट क्षेत्र के कानुनी परामर्श मे सहभागी थे ।

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