सशस्त्र समूह के साथ माओवादी का एकीकरण !

काठमांडू। लम्बे समय तक वामपन्थी आन्दोलन से जुडने, उसके बाद मधेश आन्दोलन में सक्रिय होने और बाद में कुछ समय के लिए मधेश के नाम पर बन्दूक उठाने फिर शान्तिपर्ूण्ा राजनीति में आने और अब एकीकृत माओवादी पार्टर्ीीे साथ ऐक्यवद्धता दिखाते हुए पार्टर्ीीें एकीकरण करने वाले प्रहृलाद गिरी का नाम को शायद किसी परिचय की जरूरत नहीं।
संयुक्त जनतांत्रिक तर्राई मुक्ति मोर्चा का वषर्ाें तक नेतृत्व करने वाले प्रहृलाद गिरी सशस्त्र आन्दोलन के सबसे बडÞे नेता माने जाने वाले जयकृष्ण गोईत के प्रमुख सल्लाहकार और उनके उत्तराधिकारी के रूप में भी चर्चित थे।
विद्यार्थीकाल से ही कम्यूनिष्ट विचारधारा से जुडे प्रहृलाद गिरी वैचारिक रूप से काफी प्रखर रहे हैं। पर्सर्ााजले में काफी प्रभावशाली माने जाने वाले प्रहृलाद गिरी के ही बल पर एमाले ने संगठन को मजबूत किया था।
पर्सर्ााजले के औराहा गाविस में जन्में ६१ वषर्ीय गिरी एमाले में त्यागी नेता के रूप में जाने जाते थे। छात्र जीवन में कार्ँर्डिनेशन केन्द्र से लेकर माले, एमाले होते हुए ०४६ साल में गिरी एमाले के जिला सचिव के पद तक पहुंचे थे। ०५१ के मध्यावधि चुनाव में एमाले की तरफ से उन्होंने चुनाव लडÞा था। इसमें तीसरे स्थान पर रहे प्रहृलाद गिरी ने ०५६ साल मंे एमाले की तरफ से प्रतिनिधि सभा का चुनाव लडÞा था। इस चुनाव में कांग्रेस के तत्कालीन सभापति के निर्देश पर बुथ कब्जा किए जाने को अपने हार का कारण बताते हुए प्रहृलाद गिरी ने ०६२ साल में एमाले परित्याग कर दिया।
एमाले छोडÞ कर कुछ दिनों तक राजनीति से दूर रहने के बाद वो मधेश आन्दोलन में सक्रिय हुए। फिर एक दिन खबर आई कि गोईत के भूमिगत संगठन में वो सक्रिय हो गए हैं। प्रहृलाद गिरी के वैचारिक मजबूती को देखते हुए वो गोईत के काफी करीबी हो गए और उनके संगठन में दूसरे स्थान पर पहुंच गए। लेकिन गोईत के साथ अधिक दिनों तक उनका साथ नहीं निभ पाया। गिरी ने गोईत पर जातिवाद हावी होने के बाद सशस्त्र संगठन के कुछ मजबूत नेताओं के साथ मिलकर संयुक्त जनतांत्रिक तर्राई मुक्ति मोर्चा का गठन किया, जिसके मुखिया वे स्वयं बने।
व्यक्तिगत रूप से लोकतांत्रिक प्रक्रिया में विश्वास रखने वाले प्रहृलाद गिरी अधिक दिनों तक ‘पवन’ नहीं बन पाए और वापस मूलधार की राजनीति में आ गए। एकीकृत माओवादी के महाधिवेशन से ठीक एक दिन पहले ही अपनी पार्टर्ीीा एकीकरण करने वाले प्रहृलाद गिरी को माओवादी में मधेश की बडी जिम्मेवारी दी जा सकती है। मधेश में अपनी जडÞंे मजबूत करने और नए नेता की तलाश में रहे माओवादी के लिए प्रहृलाद गिरी का इस पार्टर्ीीें जाना माओवादी के लिए फायदे का सौदा हो सकता है।

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