सामाजिक सदभाव के लिये धर्मों का सम्मान जरूरी

नेपालगन्ज,(बाके), पवन जायसवाल, असोज ६ गते ।
सामाजिक सदभाव तथा शान्ति के लिये सभी धर्म समुदाय को सम्मान करने को विभिन्न धार्मिक गुरुओं ने नेपालगन्ज में एक कार्यक्रम में जोड़ दिया ।

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युएनडिपी की सहयोग में सूचना और मानव अधिकार अनुसन्धान केन्द्र के आयोजन में सम्पन्न हुआ सामाजिक सदभाव की विषय पर विभिन्न धर्म तथा समुदाय के युवाओं को दो दिन के लिये क्षमता अभिवृद्धि तालिम की समापन तथा प्रमाणपत्र वितरण समारोह में धर्म गुरुओं ने नेपालगन्ज क्षेत्र सदभाव भडकने वाला जितना सम्बेदनशील स्थान होने की बावजूद भी उतना ही सदभाव कायम होनेवाली जगह भी है बताया ।
उन लोगों ने सभी धर्म समुदाय की पहिचान, कला संस्कृति, तथा सामाजिक अभियान में सभी लोगों की सहभागिता तथा सहयोग करने में जोड दिये थे ।
कार्यक्रम में हिन्दू धर्म के गुरु हनुमानगढी मन्दिर सञ्चालन तथा व्यवस्थापन समिति के संरक्षक हीरामान हरीशंकर गिरी, मुस्लिम धर्म गुरु मौलाना अब्दुल जव्बार मञ्जरी, सिख्ख धर्म के गुरु गुरुनानक सतसंग सभा के उप– प्रधान दलजीत सिंह सरदार, बौद्ध धर्म के गुरु गुनबहादुर लामा और क्रिश्चियन के पास्टर धनबहादुर पाण्डे ने सामाजिक सदभाव के लिये अपने अपने क्षेत्र से विशेष भुमिका निर्वाह करने की प्रतिवद्धता किया ।

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उस अवसर पर धर्मगुरुओं को दोसल्ला ओढाकर सम्मान समेत किया गया था । नेपालगन्ज उद्योग बाणिज्य संघ के नवनिर्वाचित अध्यक्ष नन्दलाल बैश्य को भी स्वागत तथा सम्मान किया गया है ।
सामुदाय में सामाजिक सदभाव, दिगो शान्ति स्थापना, सदभाव के लिये विभिन्न धर्म जाति समुदाय की सम्बन्ध प्रगाढ बनाना, तथा सदभाव बारे समुदाय में विभिन्न गतिबिधि तथा अभियान सञ्चालन करने की उद्देश्यों से तालीम सञ्चालन किया गया था ।
तालीम में सामाजिक सदभाव, महत्व, विशेषता, आवश्यकता, उपयोगिता, राजनितिक धार्मिक तथा जातिय सदभाव की अवस्था, अभ्यास, सामुदायिक सुरक्षा और सदभाव की अन्तर सम्वन्ध, सदभाव के लिये युवाओं की भुमिका, विभिन्न धर्म की पहिचान, सदभाव शिक्षा, अन्र्तरधार्मिक विद्यालय शिक्षा, लगायत के विषय पर युएनडिपी के शिवपुजन विश्वकर्मा, सतिश पाण्डेय औरसूचना और मानव अधिकार अनुसन्धान केन्द्र विश्वजीत तिवारी र राकेश कुमार मिश्रले सहजीकरण किया था ।

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तालीम में बा“के जिला के कम्दी, हिरमिनिया, सोनपुर, गनापुर गाविस और नेपालगन्ज उपमहानगरपालिका अन्र्तगत के हिन्दू, मुस्लिम, सिख्ख, बौद्ध, क्रिश्चियन, तेस्रो लिङ्गी, समुदाय के करीब ४० लोगों की युवतीहरुको सहभागिता रही थी ।

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