सामाजिक सद्भाव, राष्ट्रीय एंकता का सम्बर्धन थारु जाति की जिम्मेदारी : ओनसरी घर्ती

विनोदकुमार विश्वकर्मा ‘विमल’ , काठमाण्डू, माघ १ ।
माघी संक्रान्ति सद्भाव व राष्ट्रीय एकता का पर्व है । इस पर्व को संरक्षण एवं सम्बर्धन करना सरकार एवं थारु जाति के लोगो की बहुत बड़ी जिम्मेदारी होती है । ये बातें सभामुख ओनसरी घर्ती ने आज थारु राष्ट्रीय माघी महोत्सव २०७३ के समुदघाटन के अवसर पर कहीं ।

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उन्होंने कहा कि संविधान कार्यान्वयन एवं २०७४ माघ ७ के भीतर स्थानीय, प्रांतीय एवं प्रतिनिधि सभा के चुनाव संम्पन करने के लिए सरकार एवं राजनीतिक दल एकजुट होकर आगे बढ़ें ।
अवसर पर नया शक्ति पार्टी के संयोजक डॉ. बाबुराम भट्टराई ने कहा कि नेपाल एक बहुजातीय, बहुभाषीय एवं बहुसांस्कृतिक देश है । देश का सभी जातियों के त्योहारों को संरक्षण एवं सम्बर्धन करना सरकार की जिम्मेदारी है । उनकी संस्कृति, प्रथा, एवं रीतिरिवाजों को संरक्षण एवं सबम्द्र्घन होना चाहिए ।
पूर्व सांसद शान्ता चौधरी ने कहा कि देश में गणतंत्र लाने में थारु जाति की अहम भूमिका रही है, परन्तु राज्य के किसी भी अंगों में भागीदारी नहीं हो सकी है । कुछ दिन पूर्व हुए न्यायाधीश की नियुक्ति में एक भी थारु जाति को नियुक्त नहीं किया गया ।

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मौके पर मोरंग, सप्तरी, बांके, बर्दिया, कैलाली व कंचनपुर की कला संस्कृति पर आधारित नृत्याें की प्रस्तुतियां हुईं । कलाकारों की इस रोमांचक प्रस्तुतियों को देखने बढ़ी संख्या में दर्शक टुंडि़खेल में उपस्थित हुए ।
अवसर पर थारु जाति की भाषा,संस्कृति, अभिनय आदि के क्षेत्रों में विशिष्ट योगदान देनेवाले सोनु थारु, कृष्णराज सर्वहारी, डॉ. नरेन्द्र कुमार सिंह, मिनराज चौधरी, सत्यमोहन जोशी चौधरी, शांति चौधरी, निष्मा चौधरी, बसन्ती चौधरी, राम थारु, भुलाई चौधरी, सरस्वती चौधरी, सीमा धौधरी, लक्ष्मी चौधरी, कुलमान चौधरी को मुख्य अतिथि सभामुख ओनसरी घर्ति ने प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया ।
इसी प्रकार सप्तरी, सिरहा, महोत्तरी, रोतहट, दाङ्ग, बांके, बर्दिया, कैलाली एवं कंचनपुर के थारु जातियों के द्वारा ५ दर्जन से ज्यादा स्टॉल रखा गया था । स्टॉाल में विविध प्रकार के खाद्य पदार्थ भी रखा गया था ।
ध्यातव्य है कि माघ १ गते से सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं । सूर्य को एक से दूसरी राशि में जाने के समय को संत्रंmाति कहा जाता है । इसलिए थारु जाति माघ १ गते को नव वर्षारंभ के रुप में मनाते हैं ।
महोत्सव थारु विधार्थी सहित २९ संस्थाओं के द्वारा आयोजन किया गया था ।

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