सावन : सुदी दशमी पर करें जल भरे कलश की पूजा, कष्ट होंगे दूर

हिमालिनी डेस्क
काठमांडू, २ अगस्त ।
आज श्रावण सुदी दशमी है और आज के दिन जल भरे कलश की पूजा की जाती है । इससे वरुण देवता खुश होते हैं और मनचाहा वरदान देते हैं । पूजा में सारे देवताओं को याद कर ज्ञट वस्तुएं जल में मिलाकर पूजा की जाती है ।

दरअसल, शास्त्रों में जल को अमृत माना गया है । इसलिए इसकी पूजा की जाती है । हमारी संस्कृति में वैदिक काल से ही पंचतत्व पूजन का विधान रहा है ।

जल से भरे कलश को देवताओं का आसन माना जाता है । जल से भरे कलश पर वरुण देव विराजते हैं । इस पूजा से घर में सुख समृद्धि आती है और जीवन से नीरसता का नाश होता है । ऐसा कहा जाता है कि इस दिन पानी में दूध मिलाकर नहाने से सभी शारीरिक कष्ट दूर होते हैं ।

पूजन विधि

जल से भरे तांबे के कलश का पूजन करें । इसमें रोली, मोली, अक्षत, शर्करा, दूध आदि डालकर अशोक के पत्ते डालें और ज्ञण्ड बार ॐ अपां पतये वरुणाय नमः मंत्र का जाप करें । इसके बाद पूरे घर में इस जल का छिड़काव करें । हां, ये बात ध्यान रहे कि छिड़काव अशोक के पत्ते से ही करें ।एजेन्सी

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