सिटोमोल पाने से भी मरीज वंचित हो रहे हैं

काठमांड, २ अप्रिल । सरकार बताती है कि अत्यावश्यक कई औषधी सरकारी अस्पतालों में जनता को निःशुल्क प्राप्त होती है । लेकिन सरकारी अस्पतालों में जा कर पुछते हैं तो प्रायः वहां के कर्मचारी बताते हैं– अभी निःशुल्क मिलनेवाला औषधी खत्म हो गया है, जब आएगा तब मिलेगा । होते–होते अब तो मरीज सिटोमोल पाने से भी बंचित होने लगे हैं ।
आज प्रकाशित अन्नपूर्ण दैनिक के अनुसार औषधी खरीद के लिए सरकार ने १ अर्ब ५ करोड विनियोजन किया है । डेढ महिना से स्वास्थ्य तथा जनसंख्या मन्त्रालय से विनियोजित २५ करोड रकम निर्धारित समय में भुक्तान न होने के कारण प्रायः अधिकांश जिलों में औषधी का अवभा हो रहा है । विनियोजित रकम खर्च करने का अधिकार स्वास्थ्य सेवा विभाग के महानिर्देशक को है । लेकिन विभाग में अभी निमित्त महानिर्देशक हैं । निमित्त महानिर्देशक सिर्फ ५ लाख तक ही खर्च कर सकते हैं । जिसके चलते सभी जिलों में औषधी नहीं पहुँच पा रहा है ।
औषधी खरीद प्रक्रिया अवरुद्ध होने के कारण प्रायः अधिकांश जिला अस्पताल में औषधी अभाव हो रहा है । जानकारों का मानना है कि स्वास्थ्य सेवा विभाग नेतृत्वविहीन होने के कारण समस्या आ गई है ।

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