सिरहा में कम्युनिष्टों की लालकिला ध्वस्त होने जा रहा है : डा. सुरेन्द्र झा

सिरहा, ३० भाद्र । नेपाली राजनीति में सिरहा जिला एक महत्वपूर्ण स्थान के रुप में आता है । राजनीतिक इतिहास में इस जिला ने कई नयां रकेर्ड भी बनाया है । पिछली बार इस जिला को मधेश आन्दोलन के केन्द्र बिन्दू के रुप में भी जाना जाता है । इसीलिए स्थानीय निर्वाचन की पूर्वसंध्या में इस जिला में किस पार्टी का प्रभाव ज्यादा रहता है, इसमें विचार–विमर्श होना स्वाभाविक बनता है । चुनाव से पूर्व हर पार्टी का दावा रहता है कि हम ही चुनाव जीत जाएंगे । लेकिन दावा करना और चुनाव जीत जाना अलग–अलग बात है । जिला में किस पार्टी ने अपना प्रभुत्व स्थापित करेगा, यह तो आश्वनी २ गते होने वाले स्थानीय चुनाव के बाद पता चला ही जाएगा । लेकिन आज यहां चर्चा करते हैं, सिरहा जिला की राजनीतिक वस्तुस्थिति के बारे में । इसके लिए हिमानिली को साथ दे रहे हैं– मधेश आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता और बौद्धिक व्यक्तित्व डा. सुरेन्द्र कुमार झा । झा, राष्ट्रीय जनता पार्टी के नेता भी हैं और अभी सिरहा में सशक्त भूमिका निभा रहें हैं।

राजनीतिक इतिहास

राजनीतिक रुप से सिरहा जिला एक उर्बर भूमि है । प्रजातन्त्रिक आन्दोलन के दौरान किया गया जनमत संग्रह में इस जिला से ज्यादा जनमत प्राप्त हुआ था, और वह प्रजातन्त्र के पक्ष में था । आज सिरहा जिला को नेपाली कांग्रेस के केन्द्रीय कोषाध्यक्ष सीतादेवी यादव से जोड़ कर भी दिखा जाता हैइतना ही नहीं पूर्व केन्द्रीय कोषाध्यक्ष पदमनारायण चौधरी, वौद्धिक व्यक्तित्व प्रदीप गिरि भी यहां के स्थापित नेतृत्व हैं । इसी तरह पूर्वप्रधानमन्त्री पुष्पकमल दाहाल प्रचण्ड ने भी दूसरे संविधानसभा निर्वाचन में सिरहा जिला से ही चुनाव जीते थे । एमाले के प्रभावशाली नेता लिला श्रेष्ठ भी यहीं के हैं इतना ही नहीं, मधेश आन्दोलन के उद्गम स्थल भी सिरहा जिला ही है । ०६३ साल के प्रथम मधेश आन्दोलन के शहीद रमेश महतो भी सिरहा जिला के ही हैं । इसीलिए मधेशवादी दलों का भी आधार क्षेत्र माना जाता है– सिरहा जिला ।
सिरहा जिला के ६ निर्वाचन क्षेत्रों मे से प्रथम संविधानसभा निर्वाचन में मधेशी जनअधिकार फोरम ने ५ निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल किया था । राष्ट्रीय जनता पार्टी के नेता डा. सुरेन्द्रकुमार झा कहते हैं– ‘लेकिन मधेश मुद्दा और आन्दोलन से प्राप्त जनभावना को अनदेखा करने के कारण आज उपेन्द्र यादव और संघीय समाजवादी फोरम नेपाल की अवस्था यहा दयनीय है । फोरम नेपाल के नेतृत्व में जो विचलन आया है, उस का असर आज सिरहा में सबसे ज्यादा पड़ा है ।हां एक बात तो सच ही है कि मधेशी जनता की चाहत है कि सभी मधेशवादी दल एक होकर चुनाव लड़े, जनता की इस चाहत को सम्बोधन करने के लिए विभिन्न ६ मधेशवादी दल मिलकर राष्ट्रीय जनता पार्टी बना, लेकिन इसमें फोरम नेपाल सहभागी नहीं हो पाया । डा. झा आगे कहते हैं– ‘ऐसी कई कारण है, जिसकी वजह से फोरम नेपाल के प्रति वितृष्णा और राजपा के प्रति जनता की आकर्षण ज्यादा दिखाई देता है ।’
सिरहा में राजपा की चुनावी गतिविधि कैसे है और चुनाव जीतने आधार क्या है ? इस प्रश्न में झा ने जो जावाब दिया, वह इस प्रकार है–
सिरहा में दो नगरपालिका और तीन गांवपालिका है । यिन सभी निकायों में राजपा के ही संगठन मजबूत दिखाई दे रहा है । सिरहा में जम्मा १७ स्थानीय ठ है | जिसमेपाँच निकायों में राजपा की जीत सुनिश्चित मानी जा सकती है । दो में कड़ा प्रतिस्पर्धा है । हमारे विश्वास हैं कि प्रतिस्पर्धा के बावजूद भी यहां राजपा ही जीत पाएगी । हां, हमारे प्रतिस्पर्धी नेपाली कांग्रेस है ।
हम सभी जानते हैं कि सिरहा के निर्वाचन क्षेत्र नं. ५ को पहले से ही कम्युनिष्ट का आधार क्षेत्र माना जाता है । पिछली बार वहीं से माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ने भी चुनाव जीते हैं । कम्युनिष्ट पार्टी की संस्थागत नेता जयगोविन्द साह भी इसी क्षेत्र के हैं, जिन्होंने पुष्पलाल के साथ काम किया है । सिर्फ एक बार वि.सं. २०५४ साल के चुनाव में नेपाली कांग्रेस के नेता प्रदीप गिरि इस क्षेत्र से चुनाव जीते थे । नहीं तो हर बार यहां कम्युनिष्ट पुष्ठभूमि के लोग ही चुनाव जीतते आ रहे हैं ।
वि.सं. २०५६ साल में एमाले के धर्मनाथ प्रसाद साह ने चुनाव जीत थे यहां । वह एमाले के लिए एक स्थापित नेता भी थे लेकिन प्रथम मधेश आन्दोलन के क्रम में उन्होंने जो चरित्र प्रस्तुत किया, उससे मधेशी जनता रुष्ट हो गए हैं । मधेश आन्दोलन जारी रहते वक्त धर्मनाथ प्रसाद साह के सा सौकत में सिरहा भ्रमण में आए थे, एक दूसरे को भड़कना, डकैत करनेवालों को संरक्षण करना आदि के कारण साह, नैतिक रुप में पतन हो गए हैं । अभी इस जिला में उनकी कोई भूमिका नहीं है । उनका घर मिरचैया में हैं, लेकिन वे अभी अपनी घर से बारह नहीं निकल सकते हैं ।
मधेशी जनता मूल्याकंन कर रही है कि समग्र एमाले पार्टी भी मधेश के विरोधी है । संविधान संशोधन विरोधी के रुप में एमाले को जाना जाता है । एमाले के अध्यक्ष केपी ओली मधेशी को बिहारी कहते हैं, सडा हुआ आम कहते हैं और दो नम्बर प्रदेश को धोती प्रदेश कहते हैं । इसीलिए सिर्फ सिरहा में ही नहीं समग्र मधेश के जनता एमाले के पक्ष में नहीं हैं ।
इधर माओवादी केन्द्र के अध्यक्ष पुष्पकमल दाहाल ने बार–बार कहा है कि मधेश से मेरा ‘प्रेम’ है, मधेश मेरा मायका है । अगर मधेश मायका है, तो मायका में लोग लेने के लिए ही आते हैं, देने के लिए नहीं । प्रचण्ड भी मत लेने के लिए आए थे, लेकर गए । और मधेश के लिए उन्होंने कुछ भी नहीं किया । यहां से जीत कर वे प्रधानमन्त्री बने, लेकिन उन्होंने कोई भी विकास की योजना सिरहा जिला में नहीं लाया ।
राजमार्ग के आसपास रहनेवाले एक लाख जनता पीने का पानी के लिए लड़ रहे हैं, स्थानीय स्तर में विकास का कोई भी योजना नहीं आता है । किसानों के लिए यहां कुछ भी नहीं है । राष्ट्रीय स्तर में भी उन्होंने मधेश में कुछ भी नहीं किया है । प्रचण्डजी कहते थे कि जनसंख्या के आधार में निर्वाचन क्षेत्र बनाया जाएगा और ५० प्रतिशत स्थानीय निकाय मधेश को ही दिया जाएगा । उस समय प्रचण्ड प्रधानमन्त्री थे, लेकिन ऐसा नहीं किया । चुनावी प्रचार–प्रसार के दौरान राजपा ने इस सत्य को जनता के बीच स्पष्ट किया है । इसलिए यहां माओवादी केन्द्र हो या एमाले, दोनों के पक्ष में जनता नहीं है । हम दावे के साथ कहते हैं कि इस बार सिरहा जिला में कम्युनिष्टों का आधार क्षेत्र ध्वस्त हो जाएगा । इस बार यहां कोई भी कम्युनिष्ट चुनाव नहीं जीत सकता ।
अब बात रही, नेपाली कांग्रेस का । नेपाली कांग्रेस भी कह रहा है कि वे मधेश के पक्ष में है । लेकिन वास्तविकता ऐसी नहीं है । नेपाली कांग्रेस के पार्टी सभापति सुशील कोइराला के नेतृत्व में मधेश विरोधी संविधान जारी किया गया है । उन्हीके शासनकाल में ४७ मधेशियों को गोली से मार दिया । शेरबहादुर देउवा जब प्रधानमन्त्री बनते हैं, तो ३८८ मत लाते हैं तो जब संविधान संशोधन की बात होती है, तो ३४८ मत प्राप्त होता है । अभी प्रधानमन्त्री देउवा बोल रहे हैं कि स्थानीय निर्वाचन समापन होने के बाद संविधान संशोधन किया जाएगा । लेकिन वे झूट बोल रहे हैं । हम जानते हैं कि अब भी संविधान संशोधन विधेयक पास होने वाला नहीं है । क्योंकि एमाले तो फिर वहां रहेगा ही । एमाले संशोधन के विपक्ष में है तो कैसे फिर संशोधन हो सकता है ? इसीलिए जनता जानती है कि प्रधानमन्त्री झूट बोल रहे हैं । इन सारी घटनाओं से स्पष्ट होता है कि नेपाली कांग्रेस भी मधेशी जनता के पक्ष में नहीं है ।
इसीलिए इस बार जनता चाहती है कि राजपा चुनाव जीते । और इसका माहौल भी बन रहा है । ६ पार्टी एक होकर चुनाव में शामील हो रहे हैं, उसका नेतृत्व कर रहे हैं– आदहरणीय महन्थ ठाकुर, जो दक्षिण एसिया के लिए एक आदर्श और नैतिकवान व्यक्तित्व भी हैं । वे राजनीति करते हैं, लेकिन उनके लिए कोई भी पद महत्वपूर्ण नहीं बनता । न राष्ट्रपति, न उप–राष्ट्रपति, न ही प्रधानमन्त्री वा मन्त्री । उनका एक ही उद्देश्य मधेशी जनता को अधिकार दिलाना है । उनके ही नेतृत्व में आज हजारों मधेशी युवा मेची से महाकाली तक परिचालित हैं । उसका प्रभाव सिरहा में भी पड़ रहा है । खास करके राजपा के नेता राजकिशोर यादव का कड़ा मेहनत सिरहा का रंग बदलने को तैयार है |
सिरहा नगरपालिका के केन्द्रविन्दू है– मिर्चैया नगरपालिका । मिर्चैया नगरपालिका में राष्ट्रीय जनता पार्टी के उपाध्यक्ष रामकुमार मण्डल मेयर पद के उम्मीदवार हैं । मण्डल वि.सं. २०६४ साल में हुए मधेश आन्दोलन के नेतृत्वकर्ता हैं । उन्होंने दो संसदीय निर्वाचन में भी प्रतिस्पर्धा किया है । उप–मेयर के उम्मीदवार है– चन्द्रकला साह । वह भी दूसरे मधेश आन्दोलन के अगुवा महिला हैं । इसीलिए हम यहां चुनाव जीत सकते हैं ।’
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