सिरहा में यादवों की राजनीति को ब्रेक करेंगे : डॉ. दिलिप सदाय

डॉ. दिलिप सदाय

सिरहा, २६ भाद्र । सिरहा नगरपालिका के भावी मेयर डाक्टर ही होंगे, यह तो लगभग निश्चित ही है । लेकिन तीन डाक्टरों में किसकी जीत होगी, यह अभी निश्चित नहीं है । हां, यहां चुनावी प्रतिस्पर्धा में तीन डॉक्टर आगे दिखाई दे रहे हैं । नेपाली कांग्रेस से डॉ. सुभाषचन्द्र यादव, नेकपा एमाले से डॉ. नवीन यादव और नयां शक्ति नेपाल से डॉ. दिलिप सदाय चुनावी प्रतिस्पर्धा में हैं । स्थानीय जनता का कहना है कि यह तीनों डॉ. एक से एक हैं, लेकिन जीत किसकी होगी, यह अभी नहीं कहा जा सकता । लेकिन कुछ लोगों को मानना है कि संघीय समाजवादी फोरम के उम्मीदवार अशेश्वर प्रसाद यादव भी किसी से कम नहीं हैं । तीन डॉक्टरों की प्रतिस्पर्धा में फोरम के अशेश्वर जीत जाएंगे, ऐसा अनुमान करनेवाले लोग भी हैं । सिरहा निवासी फुलेश्वर यादव का कहना है कि फोरम नेपाल के उम्मीदवार अशेश्वर स्थानीय लोगों में ज्यादा लोकप्रिय हैं । फुलेश्वरका कहना है कि जो कोई भी जीते, लेकिन सिरहा नगरपालिका का विकास होना चाहिए ।
लेकिन नयां शक्ति की नेतृ सुनिता मरिक की धारणा हैं कि इस नगरपालिका में डॉ. दिलिप सदाय की जीत सुनिश्चत है । जीत की वजह क्या है ? इस प्रश्न के जवाब में मरिक ने हिमालिनी से कहा– ‘कोई स्वीकार करे या न करे, तराई–मधेश में जातीय वोटों का प्रभाव अधिक पड़ता है । सिरहा नगरपालिका में एक तिहाई जनसंख्या दलितों और मुसलमानों का है । हमारे उम्मीदवार दलित समुदाय से हैं और उपमेयर के उम्मीदवार मिना खातुन मुसलमान समुदाय से हैं । दलित व मुसलमानों के वोट नयां शक्ति को ही मिलने वाला है ।’ नेतृ मरिक के अनुसार सिरहा नगरपालिका में ३ लाख ३१ हजार से ज्यादा मतदाता हैं । नेतृ मरिक ने आगे कहा– ‘इतना ही नहीं डॉ. सदाय तीन सालों से सिरहा अस्पताल में मेडिकल अधिकृत के रुप में स्थानीय जनता के बीच लोकप्रिय रह चुके हैं । उनके पिताजी प्लम्बर का काम करते हैं और वे अधिकांश नगरवासियों के घरों में प्लम्बिङ का काम भी कर चुके हैं । इसलिए नगरबासी उन्हें सम्मान भी करते हैं ।’ नेतृ मरिक ने आगे कहा– ‘जीतने का आधार यह भी है कि अन्य पार्टी बात करती हैं, लेकिन हम काम करते हैं ।’


मेयर पद के उम्मीदवार डॉ. दिलिप सदाय भी सुनिता मरिक की बातों से सहमत हैं । उन्होंने हिमालिनी से कहा– ‘इस बार सिरहा में यादवों की राजनीति ब्रेक होने वाली है ।’ डॉ. सदाय आगे कहते हैं– ‘सिरहा के राजनीतिक इतिहास को देखा जाए, तो आज तक यहां यादव जाति के लोग ही जीतते आ रहे हैं । जो भी जीते हैं, उल्लेखनीय काम कुछ भी नहीं किए हैं । इसलिए इस बार यहां की जनता विकल्प ढूंढ रही हैं ।’ हां, डा. सदाय की बात में कुछ दम अवश्य ही है । यहां के अन्य प्रतिस्पर्धी यादव ही हैं । उनका वोट विभाजन होना निश्चित है । डॉ. सदाय का दावा है कि इस बार यादव समुदाय से भी मुझे वोट मिलेगा । सिरहा नगरपालिका की समस्या क्या है ? जबाव में डा. सदाय कहते हैं– ‘सिरहा, नगरपालिका की तरह नहीं दिखाई देता, गांव जैसा ही लगता है । इसे व्यवस्थित नगरपालिका बनाने के लिए विकास निर्माण सम्बन्धी बहुत काम करना है । सर्वप्रथम तो व्यवस्थित और सुविधा सम्पन्न सड़क निर्माण करना है, विजली की आपूर्ति नियमित कराना है, शुद्ध पेय जल उपलब्ध कराना है । ये सभी आधारभूत आवश्यकताएं हैं । इसके अलावा नगरपालिका के अन्दर स्तरीय आवासीय विद्यालय तथा उच्च विद्यालय की स्थापना करना है ।’ डा. सदाय के अनुसार हाल यहां के अधिकांश विद्यार्थी स्तरीय शिक्षा के लिए बाहर जाते हैं । प्राविधिक शिक्षा भी उनकी प्राथमिकता में है । महिला हिंसा का अन्त्य और सुलभ न्याय प्रदान करना भी डा. सदाय की प्राथमिकता में है । उन्होंने कहा– ‘सामान्य मुद्दों में भी न्याय पाने के लिए आज महीनों प्रतीक्षा करनी पड़ती है । इसलिए यहाँ ‘फास्टट्रयाक न्याय’ दिलाना अति आवश्यक है ।’ विकलांग, दलित और विधवा महिलाओं को सामाजिक भत्ता में वृद्धि करना भी उनकी प्राथमिकता में है ।

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