सिर्फमाहौल बदला नहीं रुका अपराध

नेपालगन्ज रिपोर्ट:माओवादी जनयुद्ध के बाद देश में छोटे-बडÞे अपराध करने वालों नें संगठन बनाना सुरु किया, पिछले दिनों पुलिस तथ्यांक अनुसार तर्राई में १४० हथियारधारी समूहका नाम चिन्हित किया गया । जिनमें जनतान्त्रिक तर्राई मुक्ती मोर्चा, भगत सिंह जैसे समूह ने सरकार से वार्ता भी की और औपचारिक रूप में कुछ हथियार भी सरकारी खजाने में जमा किए । पुलिस एक-एक कर अपराध करने वालों की धर पकडÞ और इन्काउण्टर करती रही । माहोल और प्रचार दोनों पुलिस के पक्ष में था । सरकार भी पुलिस का साथ देने लगी और वार्ता के लिए एक टीम गठन गर तर्राई में सशस्त्र समूहों के बारे में जानकारी इकठ्ठा करने लगी ।
पुलिस तथ्यांक में जब हथियारधारी समूह १४० दिखाए गए तो फिर एक चुनौती खडी हर्ुइ कि कितने लोगों से वार्ता की जाए । वार्ता का कार्यक्रम सफल न होता देख जिले की पुलिस बौखलाई और दुखी लोनिया, जैसे दर्जनों अपराधियों का इन्काउण्टर किया । पुलिस ने लगातार चर्चा बटोरा, लोगों को लगने लगा कि अब जिला वाकई में अपराध मुक्त हो गया । अर्थात् अब चन्दा, अपहरण, हत्या का कोई खतरा नहीं रहा । लेकिन क्या वाकई पुलिस के दाबे के अनुसार जिला अपराध मुक्त है –
हिमालिनी ने २ साल बाद तलाश की है- अपराध के कुछ एसे ही कुछ तथ्यों की; जिसे जानकार आम लोग ही नहीं जिले की पुलिस ब्यवस्था भी बेचैन हो उठेगी । अपराध मुक्त जिला बनाने के २ साल बाद हिमालिनी ने भारत से जुडे सीमावर्ती क्षेत्रों के बारे वह सम्पर्ूण्ा जानकारी जुर्टाई जिसे उस क्षेत्र के लोग रोज झेलने के लिए मजबूर हैं ।
जिले के कुख्यात अपराधी सिकन्दर खाँ, आदर्श ऊर्फमेराज र्साईं, भगत सिंह जैसे लोग जब जेल जाने लगे तो लगा कि अब जिले में अपराध का माहोल समाप्त हो गया । लोग अमन चयनका साँस लेने लगे । लेकिन चौंकाने वाला तथ्य फिर बाहर आया । बडÞे अपराधी जेल तो गए लेकिन उनके नाम का फायदा लेने वाले लोग अब भी मौजूद हैं और सीमावर्ती क्षेत्रों में अपना काम भी करते हैं । नेपाल पुलिस के अभिलेख में फरार की सूची में वान्टेड ऐसे दर्जनों अपराधी हैं जो नेपाली और भारतीय दोनो क्षेत्रों में अपहरण और चन्दावसूली का काम करते हैं ।
नेपाल से फरार होकर भारत में और भारत से नेपाल में छिपने वाले अपराधियों अपराध का नयाँ-नयाँ तरीका निकालकर आए दिन चर्चा में रहते हैं, ऐसे ही एक युवक की कहानी है, जो अपराध क्षेत्र में सिकन्दर के साथ काम करता था और अब खुद उसका नाम प्रयोग कर भारत स्थित बहराइच से ही अपना नेर्टवर्क संचालन करता है ।
बाँके इन्द्रपुर गाबिस वार्ड नं. १ करमोहना गाँव निवासी स्व.अली बहादुर खाँ का २५ वषर्ीय पुत्र उपनाम सूरज सिंह ने सिकन्दर के नामसे चन्दा उठाना शुरु किया । उसने दर्जनों व्यवसायियों और उद्योग प्रतिष्ठान में फोन सर्म्पर्क कर सिकन्दर को छुटाने के लिए आर्थिक सहयोग की मांग की । सूरज की माँ सिंह जाति की थी । इसलिए उसका नाम अनूप सिंह रक्खा गया । सन् १९९५ में भारत रूपइडिहा स्थित एसेम्बली आफ गाड चर्च विद्यालय से उसने हाइस्कूल परीक्षा दी और ब्राउन सुगर की लत के कारण बाद में इन्टर मीडिएट अध्ययन नहीं कर सका । स्थानीय लोगों ने बताया कि ५ वर्षपहले वह ब्राउन सुगर तस्करी के आरोप में नेपालगन्ज कारागार में भी रहा है । उसी दौरान उसकी माँ जो स्थानीय करमोहना प्रावि में शिक्षिका थीं, उन्होने जहर खा लिया और फिर परिवार में सूरज और उसकी पत्नी मात्र बच गए ।
सूरज ने अपनी आदतों को सुधारा नहीं और पुलिस से बचने के लिए वह भारत में रहकर ब्राउन सुगर का कारोबार करने लगा । सूरज की स्थिति जानने के लिए हिमालिनी ने भारत बहराइच का दौरा किया तो माहोल कुछ अलग निकला । बहराइच जिला अदालत में हिमालिनी से बातचीत में स्थानीय अधिवक्ता मोहम्मद शरीफ इद्रिसी ने बताया की वे सूरजको मासिक रूपसे चन्दा पहुँचाते हैं ।
सूरज सिंह अपना नाम परिवर्तन कर बहराइच में अनूप सिंह के नाम से अपराध में लिप्त है, नेपाली क्षेत्र के युवाओं को प्रयोग कर ब्राउन सुगर, चरस, अफीम, कोरेक्स आदि तस्करी करना उसका मुख्य पेशा है । अधिवक्ता इद्रिसी ने बताया कि नगर कोतवाली बहराइच में अनूप पर अपहरण की धम्की, मारपीट, आक्रमण, गाली-गलौज जैसे एनसीआर ३२३ और ५०४ आइपीसी अर्न्तर्गत कई मामलों पर मुकदमा दर्ज है । लेकिन कुछ भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों ने अनूप से रूपए दोहन के लिए उसे छोडÞ रक्खा  है ।
२ अगस्त २०१३ में अधिवक्ता के भाई मोहम्मद हुसेन इद्रिसी को अनूप और उसके साथियों ने गायब कर दिया जिसका आज तक कोई पता नहीं चला । हुुसेन जैसे सामान्य परिवार के लोगों से अनूप ने उसकी रिहाई के लिए पाँच लाख रूपए माँग किए और परिवार के सदस्यों ने २ लाख तक देने की तयारी की लेकिन अनूप का फोन फिर दोबार नहीं आया ।
बाँके इन्द्रपुर गाबिस निवासी सूरज ने अब बहराइच को सुरक्षित स्थान के रूप में पसन्द किया है । सूरज बहराइच स्थित मोहल्ला खत्रीपुरा बल्लु खन्ना के घर में कमरा लेकर पत्नी सहित रहता है और वहीं से विभिन्न अपराधको अन्जाम देता है । नाम गोप्य रखने की शर्त पर इन्द्रपुर के दर्जनों लोगों ने सूरज के बारे बताया कि वह अब भी सिकन्दर के नाम का दहशत बरकरार रक्खे हुए है । लोग अब भी भारतीय क्षेत्र र्रूपईडिहा पहुँच कर सूरज को आर्थिक सहयोग अर्थात् चन्दा देते हैं । सूरज के साथ ५ और लोग हैं, जो बहराइच निवासी हैं । बहराइच में छोटे बडे अपराध करने वाले लोग अनूप को अपना खुदा मानते हैं ।
स्थानीय लोगों ने बताया कि सूरज से मिलने आए दिन पुलिस की गाडी आती रहती है, लेकिन सूरज न गिरफ्तार किया जाता है और न थाने ले जाया जाता है । नेपाली क्षेत्र में ब्राउन सुगर की तस्करी में मुख्य भूमिका सूरज की बताई गई है । नेपाली पुलिस ने भी उसे ड्रग डीलर के रूप में चिन्हित कर रक्खा है ।
सूरज अपना भारतीय मोबाइल ७८३९१२९३७८ नं. प्रयोग कर नेपाली और भारतीय क्षेत्र के ब्यापारियों से चन्दा उगाहता है । इस नम्बर से उसने नेपाल के कई स्थानो पर चन्दा वसूल किया । २ वर्षपहले भारतीय थाना रूपइडिहा में तैनात पुलिस सहायक निरीक्षक सुबास यादव जिनका पोष्टिङ्ग भी हाज नगर कोतवाली बहराइच में है, उनके सहयोग से ही सूरज अपना आपराधिक गतिविधि करता पाया गया था ।
वान्टेड सूची में साढे ३ हजार अपराधी
जिला पुलिस कार्यालय बाँके के अनुसार जिले में कुल साढे ३ हजार अपराधी वान्टेड लिस्ट में हैं । डिएसपी सुशील सिंह राठौर ने बताया कि पिछले दिनों अदालत ने फैसला कार्यान्वयन दस्ता गठन कर पुराने अपराधियों को पकडÞने और कैद तथा जर्ुमाना असुल करने के लिए ३ हजार ६ सौ लोगों को वान्टेड लिस्ट में रक्खा गया है ।
जिन की कैद-अवधी बाँकी थी, या जो जर्ुमाना में पडÞे हैं, सभीको अदालत ने आदेश उल्लंघन के आरोप में अपराधी ठहर करते हुए वान्टेड लिस्ट में समाहित कर दिया है । जिले में पिछले एक महिने के भीतर १८५ लोग पकडÞे जा चुके हैं । अदालत की गिरफ्त में आने वाले ऐसे कई अपराधी हैं, जो अपना अपराध भी भूल चुके हैं । लम्बे समय से अदालत के सर्म्पर्क में नआने के कारण केस भूल चुके लोगों को अदालत ने पर्ूण्ा विवरण जनाने की भी व्यवस्था की है ।
निशाने पर ड्रग रैकेट
एक दशक पहले नेपाल अनुसन्धान विभाग ने बाँके जैसपुर में लागूऔषध विरुद्ध जुलियट नामक एक अप्रेसन किया । जिसमें ड्रग किंग के रूप में परिचित स्थानीय पुत्तन खाँ सहित दर्जन भर लोगों को हिरासत में लिया गया । उसके बाद भी छिट-फुट घटनाएँ सामने आती रहीं, पुलिस ने अपनी कारवाही जारी रक्खी । जो पकडÞा गया, वह जेल गया लेकिन अपराध थमा नहीं, और अब एक बार जिले की पुलिस ने फिर ड्रग्स के खिलाफ आरपार की जंग छेड रक्खी है ।
इस क्रममें जिला पुलिस ने जयसपुर और आसपास के क्षेत्रों से एक हप्ते में भारी मात्रा में लागूऔषध सहित २५ लोगों को गिरफ्तार किया । पिछले ३ वर्षों से लागूऔषध का कारोबार बढÞता देख पुलिस ने अपनी सक्रियता बढर्Þाई है । जिला एसपी शेखर कोइराला ने स्थानीय लोगों से साथ देने के लिए आग्रह किया, हिमालिनी से बातचीत में उन्होने कहा- यह अपराध सिर्फपुलिस समाप्त नहीं कर सकती, कोइराला ने हर सामाजिक स्तर से इस क्यान्सरको समाप्त करने के लिए आहृवान किया है ।
एसपी कोइराला ने कहा- दैनिक एक ब्यक्ति पकडने से अच्छा है कि पूरा नेर्टवर्क ही ध्वस्त कर दिया जाए । पुलिस सक्रियता के साथ लगी हर्ुइ है, स्थानीय लोगों का भी सहयोग अच्छा है । जयसपुर से पुलिस ने लागुऔषध व्यवसायी मुख्य दो महिलाओं को भी गिरफ्तार कर मुकदमा चलाया है । मुन्नी और भाभी टाइटल नामकी दो महिलाएँ लम्बे अर्सर्ेेे इस कारोबार में संलग्न बताइ गई हंै ।
पुलिस ने आर्थिक वर्ष२०६९-७० में १६ महिला सहित १ सय ३६ लोगों पर लागू औषध मुद्दा चलाया है । गिरफ्तार हुए लोगों से ३ सौ ४३ ग्राम ६९ मिलीग्राम ब्राउन सुगर, ९ किलो २० ग्राम अफीम, ३ किलो ४ सौ २० ग्राम गाँजा, ५१ किलो ८ सौ २० ग्राम चरेस बरामद किया ।  इसी प्रकार २०७०- ७१ में ५ महिला सहित १ सौ ३६ लोगो पर मुद्दा चलाया है । पुलिस ने ४ सौ ३२ ग्राम ९० मिली ग्राम ब्राउन सुगर, साढे २१ किलो अफीम, ५२ किलो ६ सौ ३५ ग्राम चरेस, ९ किलो ४ सौ ग्राम गाँजा, ३ सौ ७३ नेट्रोजेट टेबलेट, १ लीटर ३ सौ मिलीलीटर कोरेक्स बरामद किया था । हाल में २०७१- ७२ अर्थात् ४ महिने में ५ महिला सहित ७५ लोगों पर लागूऔषध मुद्दा चलाया गया है । पुलिस ने ५ सौ २३ ग्राम ९० मिलीग्राम ब्राउन सुगर, १५ लिटर ७ सौ मिली लीटर कोरेक्स, ३ सौ नेट्रोजेट टेबलेट भी बरामद किया । इस तथ्यांक से भी पता चलता है कि जिले में सिर्फमाहौल बदला, लेकिन अपराध नहीं रुका ।

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