सिर्फ भत्ता के लिए संसद जाते हैं हमारे सांसद

काठमांडू, २१ श्रावण ।
जनता की अमूल्य मत से निर्वाचित सांसद लोगों की क्रियाकलाप और प्राथमिकता क्या होनी चाहिए ? जवाफ स्पष्ट होता है– जनता से जुड़ी हुई समस्या और उसके समाधान के प्रति वे लोग सक्रिय रहे । लेकिन नेपाल के अधिकांश सांसद लोग की प्राथमिकता ऐसा नहीं होता है । वे लोग सिर्फ भत्ता और अपनी सेवा–सुविधा के लिए संसद जाते हैं । यह आरोप नहीं, तथ्य प्रमाण है ।
श्रावण २० गते शुक्रबार व्यवस्थापिका संसद् बैठक बुलाई गई थी । बैठक का उद्देश्य संवैधानिक आयोग गठन सम्बन्धी विधेयक को पारित करना था । लेकिन गणपुरक संख्या (आवश्यक न्यूनतम संख्या) उपस्थित न होने के कारण बैठक ही दो दिनों के लिए स्थगित करना पड़ा । बात यह नहीं है कि सांसद लोग भवन ही नहीं गए । आश्चर्य की बात तो यह है अधिकांश सांसद् संसद भवन में गए थे, लेकिन वे लोग बैठक में शामील नहीं हुए, सिर्फ हाजिरी करके वापस लौट आए है ।
सांसद भवन में रहे हाजिरी पुस्तक की रेकर्ड को देखा जाए तो उस दिन ४७७ सांसदों ने हाजिरी किया है । लेकिन बैठक में सिर्फ ९७ सांसदों की उपस्थित हैं । बाँकी ३८० सांसदों ने हाजिरी तो किया है, लेकिन बैठक में पस्थिति नहीं जाताया है । स्मरणीय बात यह है कि एक दिन उपस्थित होकर हाजिरी जताने से सांसद लोगों को एक हजार रुपैयाँ भत्ता मिलती है । वही एक हजार के लिए वे लोग जल्दबाजी में संसद भवन पहुँचते हैं और हाजिरी करके अपनी व्यक्तिगत काम के लिए लौटते है । शुक्रबार भी ऐसा ही हुआ था ।
संसद बैठक जारी रहते वक्त नेपाल मजदुर किसान पार्टी के सांसद डिल्ली प्रसाद काफ्ले ने जब सांसदों की संख्या काउन्ट किया तो वहां आवश्यक गणपुरक संख्या नहीं था । कोई भी विधेयक संसद में निर्णयार्थ पेश करने के लिए न्यूनतम २०० सांसद् की उपस्थिति अनिवार्य बनता है । हाजिरी पुस्तक में ४७७ सांसदों की हस्ताक्षर है, लेकिन वे सभी लोग बैठक में शामील नहीं हुए हैं । उसके बाद सभामुख ओनसरी घर्ती ने संसद् बैठक को स्थगित किया ।
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