सी.के राउत चर्चा में, कहा हिम्मत है तो पकड़ के जेल में डालो

विजेता चौधरी, काठमाण्डू चैत्र १९

देश की अखण्डता एवम् सार्वभौम सत्ता को चुनौती देने के आरोप में बार–बार गिरफ्तार होते और छूटते आ रहे सी.के राउत एक बार फिर से चर्चा में हैं । अगर देखा जाय तो सीके राउत को पिछले दो वर्षों में चर्चित होने में अगर किसी ने सहयोग किया है तो वह स्वयं नेपाल की सत्ता है । एक व्यक्ति इतना अहम हो गया कि चाहे अनचाहे वह सरकार की आँख की किरकिरी बन जा रहा है । कभी देश द्रोह का आरोप तो कभी देश विखण्डन का आरोप डा. राउत पर लगता आया है सत्ता की ओर से और मजे की बात तो यह है कि वो बरी भी होते आए हैं । इन बातों से सीके राउत बिना किसी कारण भी चर्चित होते आ रहे हैं । फिलहाल देश नए नवेले लोकतंत्र को अपनाने की राह पर अग्रसर है । लोकतंत्र अर्थात वह तंत्र जहाँ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होती है परन्तु एक सीमित दायरे में जिसका खयाल हर नागरिक को रखना होता है । जहाँ तक सीके राउत की बात है तो उनका अभियान शांतिपूर्ण है आज तक उनके अभियान से किसी जानमाल की क्षति नहीं हुई है । किन्तु फिलहाल जो देश की स्थिति पिछले महीनों से देखी जा रही है, जिस तरह मधेश की मिट्टी खून से रंगी जाती रही है उस स्थिति में अगर सही और इमानदारी से सर्वेक्षण किया जाय तो सीके राउत वाली विचारधारा से प्रभावित हर एक घर में मधेशी दिख जाएँगे और यह इसलिए हुआ है क्योंकि मधेशी खुद को अपने ही देश में अवांछित और विभेदित महसूस कर रहे हैं । और इस भावना को फलने फूलने में अगर खाद का काम किसी ने किया है तो वह है सरकार की नीति जो कहीं से भी मधेश के हित में नहीं दिख रही ।

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अभी सी.के राउत राजधानी में हैं और व्यस्त हैं । वृहस्पतिबार को सुवह ११ बजे रिपोटर्स क्लब में होने वाले राउत कें पत्रकार सम्मेलन को अचानक से रोक दिया गया । सम्पूर्ण संचार क्षेत्र को सम्मेलन मे आने की जानकारी के बाद एन वक्त पर सम्मेलन को रोकने के पीछे रिपोटर्स क्लब के संचालक ऋषि धमला को प्रेस काउन्सील के किसी पदाधिकारी ने रोकने का आदेश देने की बात जानकारी में आई है ।

एबीसी नेपाल टेलीविजन में राउत का अन्तवार्ता प्रसारित किया गया था । प्राप्त जानकारी के मुताविक प्रसारित सीके राउत के अन्तर्वाता के लिए प्रेस काउन्सील नेपाल ने अन्तवार्ताकार पत्रकार सुशील पाण्डे से स्पष्टीरण मांगने के साथ टेलिभिजन के उपर कार्यवाही करने की भी चेतावनी दी है ।

पत्रकार पाण्डे ने अपना स्पष्टीकरण देते हुए कहा है– मैं पत्रकार से पहले नेपाली नागरीक हुँ । देश की अखण्डता एवम् सार्वभौम सत्ता मेरे लिए प्रिय है । मेरा दाबा है कि मैं अपने टेलिभिजन स्क्रिन मार्फत जनता का मनोविज्ञान बोलता हुँ तथा जनता के तरफ से ही अतिथि को प्रश्न करता हुँ, सिके को भी मैने वही किया । पाण्डे ने कहा कि मैने पत्रकार आचार संहिता का उल्लंघन नहीं किया है ।

एबीसी टेलिभिजन इस सन्दर्भ में प्रेसविज्ञप्ति भी निकाल चुकी है । एबीसी टेलिभिजन पर अन्तर्वाता देते हुए राउत ने मधेस को नेपाल का उपनिवेश दावी किया । उन्होंने कहा कि जैसे भारत स्वतन्त्रता संग्राम के माध्यम से अंग्रेज के उपनिवेश से मुक्त हुआ वैसे ही मधेस को नेपाली शासको से मुक्ति दिलाने का अभियान में वो लगे हुए हैं । उसका प्रतिप्रश्न था, कि कोई व्यक्ति यदि देश के सार्वभौम सत्ता को चुनौती दे रहा है तो अदालत क्यो छोड़ देता है ? राउत ने खुद को पकड़ के जेल में डालने की चुनौती तक दी । जाहिर सी बात है कि उन्हें यकीन है कि अगर सरकार उन्हें गिरफ्तार भी करती है तो वो फिर छूट जाएँगे ।

इधर हालात ये है कि राउत के इस प्रकार की अभिव्यक्ति के उपर विरोध जताते हुए उपराष्ट्रपति के पुत्र दीपेश पुन ने कह दिया है कि मैं अगर पहुँच में होता तो ऐसी अभिव्यक्ति देने वाले को इन्काउन्टर कर दिया होता । क्या यह कथन एक लोकतंत्र में उचित है ?

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