सुरक्षित मधेश ही सुरक्षित भारत का मजबूत आधार बन सकता है : कैलाश महतो

पानी की आग कहीं मधेश और भारत को निगल न जाये !

कैलाश महतो, परासी | १९ अगष्ट को सुनौली से गोरखपुर और गोरखपुर से सुनौली की सफर । समान्य दैनिकी से चलने बाली सुनौली गोरखपुर की सरकारी रोडवेज की गाडियाँ भारी बर्सात से क्षतिग्रस्त सडकों के कारण बन्द । प्राइवेट बस से कैम्पियरगंज, महंदेवा, खलिलावाद के लम्बे रास्ते दोब्बर किराये पर दोब्बर समय लगाकर गोरखपुर पहुँचना । उस बस में करीब दर्जनभर नेपाली लोग भारत में काम करने जा रहे थे । दिन के करीब १२ः४५ बजे होंगे ।
शाम करीब ५ः४५ बजे एक बोलेरो गाडी, जिसमें मेरी परिवार और मेरे बाहेक सारे यात्री नेपाली थे, से वापस होना । गाडी चालक भारतीय था । हम सारे १२ लोग थे । ९ लोग नेपाली और हम दो मधेशी । परिचय में हमने भी नेपाली ही बताया । नेपाली लोगों के बातों के अनुसार एक को छोड बाँकी सब भारत के हैदराबाद से आ रहे थे, जहाँ वे अनेक जगहों पर काम करते हैं । एक तो भारत के सरकारी कर्मचारी ही बता रहा था ।
बर्षात की कहर, पानी की जहर, सडकों में नहर, दोब्बर दुरी की सफर और किराये दोब्बर से परेशान यात्रियों ने भारी बर्षात की शिकायत करना वाजिव था । भारत के लाखों हेक्टर की खेत और बस्ती डुबे हुए थे । टिवी च्यानलों के अनुसार बिहार में ३४१, उत्तर प्रदेश में ९५ और असम में १४१ लागों की मौत हो चुकी है और यह संख्या और बढने की संकेत कायम है । । बर्षात से हुए बर्बादी और पानी से मची तबाही की चर्चा होना आम बात थी । मगर उससे भी ज्यादा वे लोग भारत को गालियाँ देकर सफर काट रहे थे ।
बातों के दौरान भारत सरकार के किसी सरकारी विभाग में काम करने की हैसियत दिखा रहे नेपाली यात्री ने के.पी ओली की राष्ट्रवाद को सराहे जा रहा था तो वहीं दूसरी तरफ बाँकी के नेपाली लोग ओली जैसे नेतों से ही भारत को खडा चुनौती मिलने की भी बात कर रहे थे । उनके अनुसार नेपाल के विकास का मूल शत्रु ही भारत और भारतीय नीतियाँ हैं । गोर्खाली सेना के कारण ही भारत सुरक्षित होने का भी वे दावा कर रहे थे । उनके अनुसार जिस दिन नेपाली सेना भारत के पक्ष से लडना छोड दे, उसी दिन चीन और पाकिस्तान भारत को मिट्टी में मिला देने की बात कर रहे थे ।
बातों के दौरान ही कोशी, गण्डक, टनकपुर आदि नदियाँ तथा उनके ब्यारेजों के बारे में भी बात चली । भारत के कारण ही नेपाली भूमि डुबने और धनजन की क्षति होने के बातों के साथ उन्होंने १९५० की सन्धि की भी विरोध की । वे चीन को नेपाल का असली मित्र बता रहे थे । हाल ही में उत्तर कोरियन राष्ट्रपति द्वारा नेपाली नेता माधव कुमार नेपाल को दी गयी सुझाव में भारत को उसके हैसियत में रखने के लिए नेपाल को रसायनिक मिसाइलें बनाने को भी सराह रहे थे । उनका मानना है कि नेपाल को मिसाइल बनाने के सुझाव को कार्यान्वयन करना चाहिए । उनके अनुसार भारतीय प्रधानमन्त्री मोदी द्वारा बाढ पीडित के नामपर घोषित चालीस करोड रुपयों के बदले नेपाल सरकार को कोशी लगायत के सारे नदियों के दरबाजे खोलने की माँग करनी चाहिए । वहीं बगल में बैठे भारतीय चालक चुपचाप गाडी चला रहे थे ।
उस गाडी में हो रहे बातों से कुछ अहम् वर्तमानीय और कुछ भविष्यीय बातों का खुलासा होता है । पहला यह कि नेपाली जिस थाल में खाता है, उसमें ही छिद्र करने में उसे कोई आत्मग्लानी नहीं होती । दूसरा, वह भारत को गाली देना ही अपना राष्ट्रभक्ति समझता है । तीसरा, वह भारत को आजतक समझने की कोशिश ही नहीं की है चौथा, राणाशाही खत्म कर राजशाही को नेपाली राजगद्दी भारत के कारण ही मिलने कारण राणाओं ने अपने दामाद राजा महेन्द्र को ससुरालप्रिय बनाकर भारत के विरोध में खडा कर भारत के खिलाफ योजना बनाने की जो रणनीति बनबायी, उसका निरन्तरता आज भी नेपाली लोगों में व्याप्त है । पाँचवाँ, भारत को गाली देकर उसे मानसिक रुपसे परेशान करना और उसके बदले भारत से फोकट में दानापानी तथा मधेश पर शासन करने का छुट पाना । छठा, चीन कार्ड दिखाकर भारत को त्रसित कर मधेश से भारत को दूर रहने की अप्रत्यक्ष धम्की देना । कारण नेपाल के लिए मूल परेशानी मधेश ही है जिसके बारे में वह बखुबी जानता है कि भारत को मधेश का वास्तविक इतिहास पता है । मधेश के इतिहास के अनुसार भारत अगर सत्य बोल दे तो मधेश की आजादी चन्द दिनों में ही संभव है ।
नेपाल का भविष्यीय रणनीति भी भौतिक रुप में भारत के खिलाफ होने की संभावना बेहद मजबूत है । इस वर्ष की बर्षात के कारण भारत के बिहार और यू.पी दोनों अस्तव्यस्त है । यह अवस्था प्राकृतिक नहीं, कृतिम है जो नेपाल सरकार जानबुझकर निर्माण करती है । उसके लिए वह मधेश के सारे जंगलों को नष्ट करती जा रही है । जंगलों के अभाव में मधेश के चुरे क्षेत्रों में बर्षात के पानी से भूस्खलन करवाना नेपाल सरकार की रणनीति ही है ताकि वातावरण और पर्यावरण में भूचाल आ जाये । मधेश की भूमि बर्बाद और बंजर हो जाये, मधेशी खाने को तरसे और अन्ततोगत्वा वे मधेश खाली करके भारत पलायन कर जाये । मधेशीबिहीन मधेश पर हमेशाा के लिए उनका राज हो जाये, नेपाली झण्डा फहराने का अन्तहीन सर्टिफिकेट पा जायें । मधेशियों के कच कच बाले आन्दोलनों से उन्हें हमेशा के लिए छुटकारा मिल जाये और करोडों मधेशी भारत का बोझ बन जाये । भारत को एक बात से अब बिल्कुल वाकिफ होना ही बेहतर होगा कि नेपाल के अचेतन मन की अवस्था को उत्तर कोरिया के राष्ट्रपति ने जगाने का काम कर दी है । नेपाली मानसिकता का उजागर गोरखपुर से सुनौली आ रही उस गाडी के यात्रियों ने कर चुका है । आम नेपाली मानसिकता भारत विरोधी ही है जिससे भारत स्वयं भी वाकिफ है ।
नेपाल भारत से बिल्कुल नहीं डरता । वह अगर किसी से परेशान है तो सिर्फ और सिर्फ मधेशियों से, जो उसके नियत के सामने रोडा बनकर आगे आ जाता है । यही वास्तविकता है । जिस रोज मधेश से मधेशियों की पलायन हुई, या वे आर्थिक, राजनीतिक, भाषिक, शैक्षिक, रोजगार, कुटनीतिक आदि क्षेत्रों में दरिद्र और कमजोर हुए, मधेश को वे पूर्णतः कब्जा कर इसे नेपाल बनाने के लिए भारत विरोधी राष्ट्र और शक्तियों को नेपाल में जगह उपलब्ध करायी जायेगी और वे शक्तियाँ नेपाल में उत्तर कोरिया के सुझाव को मूर्त रुप देने के लिए अनेकानेक अत्याधुनिक मिसाइलें व हथियारों का निर्माण, आपूर्ति व भण्डारण कर सकती है । नेपाल को प्रयोग कर भारत विरोधी योजनायें बनेंगी, तब जाकर भारत को वह परेशानी उठाना पड सकता है जिसकी वह कल्पनातक नहीं की है । भारत को अपने दुश्मनों से या तो तंग रहना पडेगा, या नेपाल के अनुसार भारत को चलना पड सकता है । प्रमाण है कि महाभूकम्प में जिस भारत ने सबसे ज्यादा चढबढ कर सहयोग की, उसीकी फजीहत की गयी । जिस भारत ने बाढ के प्रलय में नेपाल को ४० करोड का सहयोग किया है, उससे पैसे के बदले ब्यारेजों की फाटकों को खुल्ला करने की माँग हो रही है । क्यूँँकि नेपाली लोग यह नहीं चाहते कि भारत का वह सहयोग मधेशी तक जा पाये । मधेश का भारत से वे सम्बन्ध ही कमजोर करना चाहते हंै ।
यह स्वाभाविक है कि भारत यदि सचेत नहीं हुआ तो मधेशी और नेपाली बीच घमाशान युद्ध होना है, साम्प्रादायिक दंगे होंगे, जातीय नरसंहार निश्चित है, और तब करोडों मधेशी मधेश छोड भारत मेें शरणार्थी बनेंगे जो वहाँ मानव बम का काम करेगा । नेपाल को स्वीकारने बाले मधेशी भारत विरोधी होने को बाध्य होंगे और वे नेपालियों के हाथों के कठपुतली बनकर न चाहते हुए भी भारत विरोधी काम करेंगे । गरीब और मजबूर लोगों द्वारा किसी भी काम को स्वीकारना मानव स्वाभाव होता है । आने बाले कल्ह में भारतीय सीमाओं से सटे सारे नदियों के फाटक को खोलकर भारत को पानी की आग में धकेलने की रणनीति बनायी जा सकती है जो भारत को निगलने की हैसियत रखती है । क्यूँकि नेपाल भारत विरोधी शक्ति और पैसों से संचालित होने के चौराहे पर खडा है । भारत से अनाहक सौदाबाजी भी कर सकता है । जिस भारत ने आज चालिस करोड की सहायता की है, कल्ह चालिस अरब का माँग धम्की के साथ कर सकता है ।
और गंभीर बात यह है कि भारत की तबाही चाहे जिस स्तर पर हो, वो सिर्फ भारत का ही नहीं, अपितु मधेशियों का भी होगा । क्यूँकि किसी न किसी रुप से मधेशियों का आधा जीवन भारत में है । मधेशियों की चिन्ता का विषय यही बनता नजर आ रहा है । सुरक्षित मधेश ही सुरक्षित भारत का मजबूत आधार बन सकता है । अपने सगे सम्बन्धितों को मधेशी किसी भी हाल में असुरक्षित देख नहीं सकता ।
भारत को इस भ्रम से भी निकलना ही होगा कि नेपाल सरकार उसके विरोधी नहीं हो सकती । प्रथमतः नेपाल सरकार ही उसके खिलाफ में है । दूसरा, सरकार जनता की मानसिकता से बनती है । नेपाली सरकार अगर लोगों के मानसिकता अनुसार नहीं चली तो नेपाल को उन आतंककारियों कीे एक हिस्सा बनना पडेगा जैसा पाकिस्तान है । जैसे पाकिस्तान चाहकर भी आतंककारियों से छुटकारा नहीं पा सकता, नेपाल भी उस अवस्था से दूर नहीं रह सकने की संभावनायें हैं । सरकार जनमत से बनती है, और नेपाली जनमत भारत विरोधी है । इंतजार है तो बस् कुछ समय और हालात का ।
भारत अध्ययन करे, गौर करे, योजनावद्ध हो और ठोस कदम उठाये । हमारे रिश्तेदारों को बचाये ।

 

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