सूखे के बावजूद भक्तों की श्रद्धा बरकरार

नवीनकुमार नवल:वैद्यनाथ धाम -देवघर
मिथिलाञ्चल से शुरु किया गया काँवर सुलतानगंज से गंगा जल भर के १०५ कि.मी. पैदल यात्रा कर के वैद्यनाथ महादेव को जल चढÞाया जाता है। लेकिन इसबार बाबा को र्स्पर्श कर के जल चढÞाने के बदले मंदिर से बाहर गेट पर रखे पीत्तल के टब में जल रखने से बाबा पर पाईप के द्वारा जल चढÞता था, जिससे लोगों को बाहर से देख कर प्रणाम कर के निकलना पडÞता था। जिससे बहुत से लोगों के मन में असन्तुष्टी हर्ुइ एवं आस्था में कमी दिखाई दी। जब कि सरकार एवं व्यवस्थापन पक्ष की तरफ से इसे सुरक्षा एवं सुविधा के लिए बताया गया।

वैद्यनाथ धाम -देवघर

वैद्यनाथ धाम -देवघर

अमलेश्वर महादेव
सुरसण्डÞ प्रखण्डÞ मुख्यालय से ६ कि.मी. दक्षिण में अवस्थित अमलेश्वर महादेव -सुकेश्वर बाबा) पर प्रत्येक सोमवारी के क्रम में तीसरी सोमवारीको सामाजिक कार्यकर्ता विजय शाही के सहयोग से लगभग २०० तीनपहिया से छहपहिया तक वाहन में काँवारिया द्वारा रसुलपुर, मधरापुर, शिवाईपट्टी गाँव की परिक्रमा करते हुए देवनाथपट्टी के उत्तरबाहिनी नदी से जल भर के जल चढÞाया जाता। साथ ही अन्तिम सोमवारी की रात में मिथिलारत्न गायक कुन्ज विहारी मिश्र द्वारा शिव भजन की प्रस्तुति से मन्दिर के चारों तरफ जय जयकार कर किया जाता है। इसी प्रखण्डÞ से २ कि.मी. उत्तर नेपाल भारत सीमा -मरुवाही गाव) पर स्थित बाल्मीकेश्वरनाथ महादेव में भी दोनों देश के हजारों लोगों ने जनकपुर के दूधमती नदी से जल भर के एवं १२१ साइकल सवार काँवरिया ने पहलेजा घाट से गंगाजल लाकर जल चढÞाया जाता है। जिसमें स्थानीय मुखिया शोभित राउत दिल खोल कर सहयोग प्रदान करते हैं ।
लंगूर खोला -जनकपुर)
लंगूरबाबा के नाम से चर्चित भोला बाबाको कंचन पर्वत पार कर के दो दिनों में कमला नदी से जल भरते हुए बाबा को लाखों भक्तो द्वारा जल चढÞाया जाता है। पहाडÞÞ और नदी के मनोरम दृश्य से होकर यात्रा करने से इस यात्रा का आकर्षा दिन प्रतिदिन बढÞता जा रहा है। लेकिन इस बार भी ९-१० काँवरियों के नदीं में डÞुब जाने से लोगों के मन में काफी निराशा छायी है। साथ ही महोत्तरी जिला के जंगल में स्थित टुटेश्वर महादेव को हजारों भक्तों ने नदी से जल भर कर जल चढÞाया और वहाँ भी एक बाबा की संदिग्ध अवस्था में मृत्यु हो जाने से भक्तों की आस्था में दरार पडÞ गई है।
जलेश्वरनाथ महादेव -महोत्तरी, नेपाल)
जलेश्वरनाथ महादेव रुद्रेण द्वारा स्थापित स्वयं महालिंग में से एक महादेव को प्रत्येक सोमवारी के दिन जनकपुर अञ्चल एवं विहार के सीतामढÞी, मधुवनी जिला के लाखों भक्त द्वारा दूधमती नदी से १६ कि.मी. पैदल यात्रा कर के जल चढÞाते है। वैसे बाबा धाम से आनेवाले सभी काँवरिया यहाँ अवश्य जल चढÞाते हैं।
डÞेकुली स्थान -शिवहर विहार)
भुवनेश्वर महादेव डÞेकुली स्थान से चर्चित बाबा के मन्दिर में प्रत्येक सोमवारी के दिन लाखों काँवरियों द्वारा बगल की बाग्मती नदी से जल भर कर जलाभिषेक किया जाता है। यहाँ महिला के लिए विशेष श्रृंगार सम्बन्धी मेला लगा रहता है जिससे महिला भक्तों की सहभागिता उल्लेखनीय होती है।
कपिलेश्वरनाथ महादेव -मधुवनी)
मधुवनी जिला मुख्यालय से ६ कि.मी. पश्चिम दरभंगा जयनगर राजमार्ग १०५ पर रहिका के नजदीक बाबा कपिलेश्वर महादेव कपिल मुनि के पिता कर्दम ऋषि की तपस्या से प्रकट शिव लिंग कपिलमुनि द्वारा स्थापित है। यहाँ भी लाखों भक्तों द्वारा जलाभिषेक किया जाता है। वैसे १९३र्४र् इ. में नेपाल के राजा द्वारा अष्टकोणीय शिव मन्दिर बनाया गया था। उसके बाद भूकम्प की वजह से मन्दिर गिर जाने के बाद दरभंगा महाराज द्वारा शिव-पार्वती का मन्दिर बनवा कर २१ एकडÞ भूमि दान में दी गई थी।
गरीब स्थान -मुजफ्फरपुर)
मुजफ्फरपुर मुख्यालय स्थित गरीब स्थान महादेव मन्दिर में कई वषोर्ं से लोग हाजीपुर के पहलेजा घाट से गंगाजल भर के लगभग ८० कि.मी. पैदल यात्रा कर के जल चढÞाते हैं। जिसमें स्थानीय विधायक एवं मन्त्री की तरफ से जगह जगह भजन एवं जागरण, करने के लिए शिविर, दावा-खाना आदि की व्यवस्था की गई होती है।
हलेश्वर महादेव -सीतामढ
सीतामढÞी जिला मुख्यालय से ६ कि.मी. उत्तर पश्चिम फतेहपुर गिरमिसानी में राजा जनक जी द्वारा सीता जी की उत्पति के क्रम में हलेष्ठि यज्ञ करके हलेश्वर महादेव को स्थापित किया गया था और यही से जनक जी ने हल चलाना शुरु किए था। यहाँ नेपाल एवं विहार के कई जिले के लोगों द्वारा नेपाल के नुनथर पहाडÞ एवं सुप्पी घाट बागमती से जल भर कर जलेश्वरका जलाभिषेक किया जाता हैर्।र् इ. १९४२ के भूकम्प में मन्दिर ध्वस्त हो जाने एवं जंगल झाडÞी बढÞने से लोगों का ध्यान हट गया था। लेकिन इधर २००र्०र् इ. में तत्कालीन डिÞ.एम. अरुणभूषण प्रसाद जी बाबा की प्रेरणा से इस मन्दिर का जिर्णोद्धार किया तव से लोग काफी श्रद्धा से पूजा आर्चना करते आ रहे है। इसी तरह खोटाङ जिला में हलेसी महादेव प्राचीन काल से ही प्रसिद्ध है और वहाँ भी प्रत्येक वर्षश्रद्धालु भक्तजन हजारों की संख्या में जल चढÞाने जाते हैं। िि
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