सूडान घोटाले के पा“च खलनायक

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देश में अब तक हुए सबसे बडे घोटाले में विशेष अदालत ने अपना फैसला सुना दिया है। १३ फरवरी को दिए अपने फैसले में विशेष अदालत ने इस बडे घोटाले के लिए नेपाल पुलिस के तीन पर्व प्रमुखों और दो ठेकेदारों को कैद और जर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने कहा है कि इन पांचों से करीब सवा अरब रूपये की वसूली की जाए। इस घोटाले में आरोपी बनाए गए अन्य ३१ पुलिस अधिकारियों को इस मामले से बरी कर दिया गया है।
सूडान घोटाले के मुख्य अभियुक्त के रूप में रहे नेपाल पुलिस के तीन पर्व आईजीपी ओम विक्रम राणा, हेम गुरूंग और रमेश चन्द ठकुरी को दो दो साल की कैद की सजा सुनाई गई है जब कि बेलायती ठेकेदार माईकल र्राईडर को भी दो साल और नेपाली ठेकेदार शम्भु भारती को एक वर्षकी कैद की सजा सुनाई गई। विशेष अदालत के मुख्य न्यायाधीश गौरी बहादुर कार्की, न्यायाधीश ओमप्रकाश मिश्र और केदार चालीसे की संयुक्त खण्ड्पीठ ने बेलायत स्थित एस्योर्ड रिस्क कम्पनी के मालिक माइकल राइडर को मुख्य अभियुक्त करार देते हुए ५६ करोड ८० लाख रुपैयाँ और २ वर्षजेल सजाय का फैसला सुनाया है। उनके नेपाल स्थित स्थानीय ठेकेदार शम्भु भारती को २८ करोड ४० लाख रुपये और १ वर्षकैद का फैसला सुनाया है।
पर्ूव प्रहरी प्रमुख राणा को १७ करोड ६ लाख रूपये जर्ुमाना और २ वर्षकैद की सजा सुनाई गई है। अदालत ने अपने आदेश में कहा है कि ‘ओमविक्रम राणा ने प्रहरी प्रमुख की हैसियत से आदेश निर्देशन देकर नेपाल सरकार, नेपाल प्रहरी और प्रहरी कल्याण कोष को आर्थिक नुकसान पहुंचाया है और समग्र में नेपाल को अन्तर्रर्ााट्रय जगत में बदनामी करने और ठेकेदार को फायदा पहुंचाने के लिए प्रमुख रूप से जिम्मेवार ठहराया जाता है।
पर्ूव प्रहरी प्रमुख हेमबहादुर गुरुङ को ६ करोड ४५ लाख रूपये जर्ुमाना और २ वर्षजेल की सजा विशेष अदालत द्वारा सुनाई गई है। अदालत ने कहा है कि अपने पर्ूववर्ती की गलती को सुधार करने के बजाय उसे और बढÞावा देना और ठेकेदार को आर्थिक फायदा पहुंचाते हुए उसके रकम की भुगतानी करने के लिए जिम्मेवार ठहराया जाता है।
निलम्बित प्रहरी प्रमुख रमेश चन्द ठकुरी को ४ करोड ८५ लाख रूपये जर्ुमाना और दो वर्षजेल की सजा का फैसला सुनाया गया है। ठकुरी के बारे में फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा है कि गुरूंग के बाद काम ही ना लगने वाली एपीसी की खरीद की जानकारी होते हुए भी उसके बारे में कोई कार्रवाही न करना और खराब एपीसी खरीद के बावजूद ठेकेदार को अन्तिम किस्त की रकम का भुगतान के लिए आदेश देना है। कंपनी के विरूद्ध कानूनी कार्रवाही करने के बजाय ठेकेदार को ही फायदा पहुंचाने के लिए चन्द को दोषी करार दिया गया है।
अदालत ने बांकी बचे पुलिस अधिकारियों को बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि निचले दर्जे के पुलिस अधिकारियों ने सिर्फअपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का ही पालन किया है। विभागीय कामकार्रवाही की प्रक्रिया होने की वजह से अपने वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का पालन कर इन्होंने कोई भी गलती नहीं की है इसलिए बांकी बचे पुलिस अधिकारियों को दोषी करार नहीं किया जा सकता है।
अदालत के आदेश के बाद बरी होने वाले पुलिस अधिकारियों ने काफी प्रसन्नता जाहिर की है। उन सभी का कहना था कि विशेष अदालत के द्वारा दिया गया फैसला सही और सटीक है और इस देश में न्याय व्यवस्था अभी भी जिन्दा है इस बात से खुशी हर्ुइ है। रिहा होने वाले सभी पुलिस अधिकारियों ने राहत की सांस ली है। पूरे आठ महीने तक मानसिक यातना झेल रहे इन पुलिस अधिकारियों को फिर से अपने पदों पर बहाल किया गया है। इन सभी पर चार्जशीट दाखिल होने के बाद से ही सभी को निलम्बित कर दिया गया था।
क्या है सूडान घोटाला का सच –
संयुक्त राष्ट्र संघ शान्ति स्थापना अभियान के लिए सूडान के डार्फ में गए नेपाल पुलिस की मिशन टोली के लिए आवश्यक बन्दोबस्त सामग्री और बख्तरबन्द गाडियों -एपीसी) की खरीद में हुए भ्रष्टाचार ही सूडान घोटाला है। तत्कालीन प्रहरी प्रमुख ओम विक्रम राणा के कार्यकाल में इस खरीद की प्रक्रिया शुरू की गई थी। लण्डन स्थित एसयोर्ड रिस्क नामक कंपनी ने इन सभी सामग्रियों की खरीद के लिए टेण्डर भरा था और पुलिस ने उसी टेण्डर को स्वीकृत करते हुए अनुमति दी थी। इस कंपनी के निर्देशक माईकल र्राईडर हैं हालांकि अभी तक यह व्यक्ति कौन है कहां रहता है और उसकी तस्वीर कैसी है इस बारे में किसी को भी कुछ भी जानकारी नहीं है। इस कंपनी के स्थानीय प्रतिनिधि शम्भु भारती था। पुलिस कल्याण कोष से करीब ४५ करोड रूपये में काम न लगने वाली आठ एपीसी गाडी खरीद कर सूडान भेजी गई थी। लेकिन यूएन द्वारा इन खटारा गाडियों को लेने से मना करने के बाद इस घोटाले का पर्दाफाश हुआ था।
इस घोटाले की प्रारम्भिक जांच संसदीय जांच समिति द्वारा की गई थी। उक्त जांच में पर्ूव गृह मंत्री कृष्ण प्रसाद सिटौला, बामदेव गौतम और भीम रावल को भी दोषी ठहराया गया था। लेकिन अख्तियार दुरूपयोग अनुसंधान आयोग ने राजनीतिक दबाब में आकर पर्ूव गृहमंत्रियों के खिलाफ केस दायर नहीं किया। हालांकि इन सभी के खिलाफ मुकदमा चलाए जाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा विचाराधीन है। इस घोटाले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने सभी पुलिस अधिकारियों और ठेकेदारों को करोडों रूपये लेकर जमानत पर रिहा कर दिया था। बाद में ठेकेदार शम्भु भारती ने इसके खिलाफ र्सवाेच्च अदालत में केस लडकर विशेष अदालत द्वारा जमानत राशि के रूप में लिए गए १५ करोड में से १४ करोड २० लाख रूपये वापस करने का आदेश दे दिया था। र्सवाेच्च के न्यायाधीश ताहिर अली अन्सारी और ज्ञानेन्द्र बहादुर कार्की की संयुक्त इजलास ने भारती के जमानत राशि को वापस करने का आदेश विशेष अदालत को दिया था। इस मुकदमे के दौरान ठेकेदार भारती के वकीलों ने विशेष अदालत में बहस की सुनवाई खत्म होने और इसमें भारती को निर्दाेष साबित किए जाने का तर्क दिया था। लेकिन अभी विशेष अदालत ने इस भ्रष्टाचार के लिए शम्भु भारती को भी मुख्य अभियुक्त बनाया है। ±±±
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