सूफी संत हजरत इब्राहिम की कथा

 

सद्‌गुरु : एक बहुत सुंदर कहानी है। ये कहानी सूफी संत हजरत इब्राहिम से जुड़ी है। उनके बहुत सारे शिष्य थे। वह अपने आश्रम में अपने बहुत सारे शिष्यों के बीच घिरे रहते थे। उस शाम कुछ यूं हुआ कि दो युवक उनसे मिलने आए थे, जो उनके शिष्यों की भीड़ में बैठे थे। शाम का समय था, सूर्य ढल रहा था। वह एक बेहद सुंदर और शानदार शाम थी, लेकिन वे दोनों युवा रोनी सूरत बनाकर वहां बैठे थे। वैसे भी रेगिस्तान में सूर्यास्त देखने लायक होता है। दरअसल, रेगिस्तान में सूर्योदय व सूर्यास्त, खासकर सूर्यास्त देखने लायक होता है, जो काफी रंगीन होता हैं। हवा की विरलता, रेत कण और नमी, ये सारी चीजें मिलकर रेगिस्तान की शाम को, खासकर सूर्यास्त को एक शानदार रंगीन नजारे में बदल देते हैं।

तो उस शाम भी ऐसा ही शानदार नजारा था, लेकिन वे दोनों युवक दुखी बैठे थे। हालांकि यह कोई अजीब बात नहीं थी। इसकी वजह थी कि वे लोग कुछ देर पहले ही आश्रम में पहुंचे थे और वे अपने धूम्रपान की लत की वजह से परेशान हो रहे थे।

यह सुनकर साथी कहता है, ‘यहीं तुमने गलती कर दी। मैंने उनसे ये पूछा कि क्या मैं धूम्रपान के दौरान ध्यान लगा सकता हूं। तो हजरत ने कहा- बेशक।’वे आपस में बात कर रहे थे, ‘क्यों न हम सूफी हजरत के पास जाकर धूम्रपान के बारे में इजाजत ले लें? हजरत थोड़े सनकी हैं, क्या पता वह हमें इसकी इजाजत दे दें या फिर वह हमें तंबाकू से ज्यादा कुछ और भी दे सकते हैं।’ वे दोनों इसकी इजाजत लेने अलग-अलग जाते हैं। अगले दिन फिर एक शानदार शाम ढल रही होती है, जहां एक आदमी दुखी बैठा होता है और दूसरा धूम्रपान करता हुआ वहां आता है। दुखी व्यक्ति अपने साथी को देखता है और उससे पूछता है, ‘तुम कैसे धूम्रपान कर रहे हो? तुम हजरत के कहे का अपमान कर रहे हो।’ दूसरा साथी जवाब देता है- ‘नहीं।’ दुखी युवक कहता है, ‘कल मैंने उनके पास जाकर इजाजत मांगी थी, तो उन्होंने कहा था कि तुम धूम्रपान नहीं कर सकते।’ साथी उससे पूछता है, ‘तुमने उनसे क्या पूछा था?’ वह जवाब देता है, ‘मैंने पूछा कि क्या मैं ध्यान के दौरान धूम्रपान कर सकता हूं। हजरत ने कहा, ‘नहीं, बिल्कुल नहीं।’ यह सुनकर साथी कहता है, ‘यहीं तुमने गलती कर दी। मैंने उनसे ये पूछा कि क्या मैं धूम्रपान के दौरान ध्यान लगा सकता हूं। तो हजरत ने कहा- बेशक।’

आपका प्रश्न गढ़ने का तरीका वही है

इसी तरह से आप मुझसे इस समय पूछ रहे हैं कि क्या मैं सोते समय ध्यान लगा सकता हूं। इस दुनिया में तमाम ऐसे लोग हैं, जिन्हें जागते हुए भी ध्यान करने में दिक्कत आती है।

सहज रूप से सोने की कोशिश कीजिए। कहा जाता है न – ‘लट्ठे की तरह सोइए।’ अगर आप लट्ठे की तरह नहीं सो सकते तो कम से कम किसी कुत्ते या बिल्ली की तरह तो सो जाइए।अगर लोगों ने पर्याप्त अभ्यास या साधना नहीं की हो तो ज्यादातर लोग अगर एक घंटे ध्यान के लिए बैठते हैं, तो आमतौर पर वे ज्यादा से ज्यादा तीन मिनट तक ही ध्यान लगा पाते हैं। एक घंटे में वे महज तीन मिनट के लिए ध्यान में जा पाते हैं और बीच में वे ध्यान में आते जाते रहते हैं। एक पल वे ध्यान में होते हैं, फि र कहीं और भटक रहे होते हैं। साठ मिनट की अवधि में तीन मिनट उसका पांच फीसदी हुआ। सिर्फ पांच फीसदी ही उन्हें जबरदस्त अनुभूति करा देता है। अगर वे किसी तरह पचास फीसदी तक पहुंच जाएं तो वे पल भर में एक धन्य इंसान हो जाएंगे।

नींद में ध्यान लगाने की कोशिश करने के बजाय आप जो ध्यान लगाते हैं, उसकी गुणवत्ता सुधारने पर काम कीजिए तो बेहतर होगा। कम से कम आप सोइए तो सही तरह से, नींद को आप अपने तरह-तरह के विचारों से दूषित होने से बचाइए। जब भी सोइए, पूरी बेफिक्री के साथ सोइए। सहज रूप से सोने की कोशिश कीजिए। कहा जाता है न – ‘लट्ठे की तरह सोइए।’ अगर आप लट्ठे की तरह नहीं सो सकते तो कम से कम किसी कुत्ते या बिल्ली की तरह तो सो जाइए। आप कैसे सोते हैं, इससे फर्क नहीं पड़ता। बस सहज रूप से सोइए। अगर आप सोते समय खर्राटे लेते हैं तो लीजिए खर्राटे।

सोते समय मृत व्यक्ति जैसे हो जाएं

सोते समय सामाजिक शिष्टाचार का पालन मत कीजिए और सबसे बड़ी बात कि सोते समय अपनी आध्यात्मिकता को बीच में मत लाइए। सहज रूप से सोइए – कुछ ऐसे मानो आप मर गए हों।

अमेरिका में मैंने एक चीज गौर की। सुबह जब भी लोग मिलेंगे तो जरूर आपसे पूछेंगे कि आप ढंग से सोए या नहीं? मरे हुए इंसान भले ही शारीरिक तौर पर काफी अकड़े हुए होते हैं, लेकिन वे लोग पूरी तरह से बेफिक्री की स्थिति में होते हैं। उस दौरान उन्हें चिंता नहीं होती कि वे कैसे दिखते हैं। इसी तरह से जब आप सो रहे हों तो आपको चिंता करने की जरूरत नहीं है कि आसपास क्या हो रहा है। चिंताओं के बीच आप सो नहीं सकते। अमेरिका में मैंने एक चीज गौर की। सुबह जब भी लोग मिलेंगे तो जरूर आपसे पूछेंगे कि आप ढंग से सोए या नहीं? मैं कभी इस सवाल को समझ ही नहीं पाया कि आखिर इसमें दिक्कत क्या है? मैंने देखा है कि नींद को लेकर तमाम लोगों को दिक्कतें हैं और अगर आप भी नींद के दौरान ध्यान लगाने की कोशिश करेंगे तो यकीकन आपको भी दिक्कत हो सकती है।

ध्यान कोई कार्य है ही नहीं

ध्यान कोई कार्य नहीं है, यह एक गुण है, जिसे आपको हासिल करना है। यह एक सुगन्ध है जिस तक अगर आप पहुंच गए तो आपके हर काम से यह छलकेगा।

एक बार अगर यह गुण आपके जीवन का हिस्सा बन जाए, या कहें कि आपके लिए एक जीवन जीने का तरीका बन जाए तो फिर क्या फ र्क पड़ता है कि आपका शरीर जागा हुआ है या सोया हुआ? ऐसा इसलिए नहीं होगा, क्योंकि आप इसके लिए कुछ कर रहे थे, बल्कि यह तब होगा जब आप अपने तन, मन, ऊर्जा व भावनाओं को एक खास स्तर की परिपक्वता के साथ तैयार करते हैं और तब आप ध्यानावस्था में पहुंच जाते हैं, या आप स्वयं ध्यान बन जाते हैं। आप ध्यान कर नहीं सकते। अगर आप अपने भीतर यह गुण ले आते हैं तो फिर वह गुण आपको तब भी नहीं छोड़ता, जब आप नींद में होते हैं। आपको सोते समय ध्यान लगाने के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं है। इसी तरह से आपको जागते हुए ध्यान लगाने के बारे में भी चिंता करने की जरूरत नहीं है। एक बार अगर यह गुण आपके जीवन का हिस्सा बन जाए, या कहें कि आपके लिए एक जीवन जीने का तरीका बन जाए तो फिर क्या फ र्क पड़ता है कि आपका शरीर जागा हुआ है या सोया हुआ? फिर चाहे जो भी अवस्था हो, ध्यान प्रक्रिया हमेशा चलती रहेगी। लेकिन अगर आप सोने के दौरान ध्यान लगाने की कोशिश करेंगे तो एक चीज जरूर होगी कि आप ठीक तरीके से सो नहीं पाएंगे।

साभार, दैनिक जागरण

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