सूफ़ियाना इश्क़ :मनीषा गुप्ता

अंबर धरती कुछ यूँ गुनगुनाती है और मैं कुछ यूँ खो जाती हूँ जैसे रच गया हो अम्बर भी मेरे प्यार के रंग में
और दिशाएँ मेरे तेरे प्यार की साक्षी बन मंत्रो की ध्वनि सी चहु दिशा में ध्वनित हो झंकृत हो जाती हैं।

”  मेरा इश्क़ हुआ सूफ़ियाना साgetimage
तेरे इश्क़ में मैं हुई बाबरी
जग सारा मेरा कायल हुआ
मैं घुमु तेरी दीवानी सी !!

मीरा के जैसा इश्क मेरा
और राधा जैसी तुझ पर
वारी हूँ ……….!!

तू दीप बना मेरे जीवन का
मैं तेरे दिए की बाती सी
तुझ में ही जल जाउंगी
तेरी हूँ यही कहलाऊँगी !!

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