सेवा परमो धर्म

समाजसेवा एक ऐसा कार्य है जिससे हमारे मन को शान्ति मिलती है । हम भले ही कितने अमीर क्यों न हो लेकिन जो सुख हमें दूसरों की सेवा या समाज सेवा करने में मिलता है वो सुख सारे सुखों से अलग होता है । क्योंकि हमारे शास्त्रों में भी वर्णित है सेवा परमो धर्मः और अगर यह भावना सभी मानव के दिलों में व्याप्त हो जाय तो मानव जीवन को सार्थकता मिल जाएगी और जरुरतमन्द को जीवन । सेवा के इसी धर्म को बासुदेव गोल्यान जी ने अपने जीवन में शामिल कर लिया है । बासुदेव गोल्यान एक सुपरिचित नाम है जिस से हम सब परिचित हैं । २०११ ÷१२ नेपाल रोटरी के रोटरी इंटरनेशनल डिस्ट्रिक्ट ३२९२ के यह पूरब डिस्ट्रिक्ट गवर्नर भी रह चुके हैं और नेपाल के बड़े उधोगपति भी हैं । प्रस्तुत है हिमालिनी महाप्रबन्धक कविता दास की आपसे हुई बिशेष बातचीत का सम्पादित अंश–
० सबसे पहले आप का बहुत स्वागत है । आप कब से रोटरी से जुड़े और कहाँ से प्रेरणा मिली ?

Basudev Golyan

बासुदेव गोल्यान जी ने

– आप को बहुत धन्यवाद । शुरुआत में हमारे मित्र कृष्णलाल दुग्गड़ जी जो पहले बिराटनगर में रहते थे उन्होंने मुझे रोटरी में आने के लिए

कहा तो मैं उन्हें मना नहीं कर पाया और १९८२ में रोटरी से जुड़ा । पहले एक दो साल बस रोटरी में आना जाना रहा, पर १९८८ में भूकम्प आया था, धरान में जिसमें बहुत से लोगों की मौत हो गई थी और काफी क्षति भी हुई थी । उस वक्त मैं इस संस्था से पूरी तरह जुड़ा । मुझे लगा कि लोगों की सेवा करनी चाहिए ।
० आप पूर्व डिस्ट्रिक्ट गवर्नर हैं आपने अपने कार्यकाल में क्या क्या मुख्य काम किए ?
– मैं २०११÷२०१२ का डिस्ट्रिक्ट गवर्नर था. डिस्ट्रिक्ट गवर्नर बनने से २ साल पूर्व ही नामांकन किया जाता है । बनने से पहले ही मैंने कई योजनाएँ बनाई थी । मुझसे पहले जो भी तीन गवर्नर थे वो काठमान्डू से थे । मैं चौथा गवर्नर था जो विराटनगर का था । मैं बाहर के क्लब को पूरी तरह से जोड़ना चाहता था और इसके लिए प्रेरित करना चाहता था । मैं डिस्ट्रिक ३२९२ को कैसे आगे लाया जाय और उसे कैसे अन्तर्राष्ट्रीय पहचान दिलाई जाय और इसके लिए प्रयत्नशील रहा । ज्यादा से ज्यादा सदस्यों को बनाना भी एक कोशिश थी मेरी । क्योंकि जब अधिक सदस्य होंगे तभी रोटरी क्लब को उनके योगदान से बढ़ाया जा सकता था । मैंने करीब ३५० सदस्य बनाए । उन्होंने उस समय लगभग युएस डॉलर ३,३३,००० रकम अपना योगदान दिया । यह एक रिकार्ड ही था । हमारे एक मित्र हैं पूर्व अध्यक्ष कल्याण बानिया, वो चाहते थे कि भूटान में भी एक रोटरी क्लब खुले । हमलोग इसके लिए जावलाखेल के पूर्व अध्यक्ष जाया राज्यलक्ष्मी को गवर्नर का विशेष प्रतिनिधि बनाया । उन्होंने बहुत मेहनत की और फलस्वरूप एक नया क्लब खुला । यह हमसब के लिए एक बड़ी उपलब्धि थी । बस ४ साल हुए थे डिस्ट्रिक्ट खुले हुए और हमलोगों ने एक नए क्लब का निर्माण किया वह भी भूटान में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर । शांति का अभियान भी हमलोगों ने चलाया और मुझे यह लगा कि बस सम्मेलन करने से कुछ खास उपलब्धि नहीं होगी । पहले लोगों को साक्षर करना जरूरी है । इसलिए हमलोगों ने काठमांडू के हयात होटल में ५०० लोगाें कोे जिन्हें विभिन्न देश से बुलाया गया था इससे बहुत फायदा हुआ । यह सब मेरे कार्यकाल में हुआ जिसकी मुझे खुशी है और मैं सन्तुष्ट भी हूँ ।
० अभी आप को क्या जिम्मेदारी मिली है ?
– हमारे जो पूर्व गवर्नर २०१३÷२०१४ के दीलेन्द्र राज श्रेष्ठ थे उन्होंने मुझे डिस्ट्रिक्ट फाउंडेशन चेयर बनाया । हमारा फाउंडेशन नंबर ३ पर आता है । पिछले साल हमलोगों ने १० लाख विभिन्न प्रोजेक्ट किया यह क्लब द्वारा कराया गया । हम रकम को जमा करके इन्टरनेशनल फाउंडेशन में भेजना और प्रिजोगना पे काम करना है . क्लब अपने अपने तरीकेसे काम करते थे और यह कार्यालय को सूचित नहीं करते थे । पर अब डीएसआरएफसी के अंतर्गत होता है और किसी भी फाउंडेशन के कार्य को मंजूरी देने के बाद ही उस प्रोजेक्ट पे काम करसकते है । फाउंडेशन को चेक करके उसे अधिकारिक करना ही मेरी जिम्मेदारी है ।
० आप एक समाजसेवी हैं और जानेमाने उद्योगपति भी हैं । आप अपने उद्योग व्यवसाय के बारे में कुछ बताईये ?
– हम लोग पुराने उद्योगपति हंै नेपाल के । मेरे पिता जी जो नेपाल आए हुए थे वो एनआरआइ थे । हम लोग गोल्यान समुह के नाम से जाने जाते हैं । हम लोग नेपाल में पहला समुह हंै जो तीसरे मुल्क से कच्चा मालसमान लाकर यहां पर उद्योग सञ्चालन करते थे । वैसे तो उस समय नेपाल में चीनी मिल, जूट मिल होता था और हम लोग ही थे जो तीसरे मुल्क से समान आयात कर के बटन का मिल खोले थे । और हमारे बहुत सारे मिल चलते थे । अभी बस हमारा स्पिनीङ मिल ही बांकी है, और सब बन्द हो गया है । अभी हम बैंक, फाइनान्स, इन्स्योरेन्स, कपड़ा उद्योग, हाइड्रोपावर, हाउजिङ मे निवेष करते हैं ।
० आप एक व्यवसायी हैं । इस काम मे कोई कठिनाई का सामना करना पड़ता है ?
– सबसे बड़ी समस्या बिजली की है । आज उद्योग के लिए यह एक बड़ी मुसीबत है । सालभर ही आठ से दस घण्टे रोजाना बिजली कटती है और जाडेÞ मे तो दस से सोलह घण्टा तो बिजली ही नहीं रहती है । हम बाहर समान निर्यात करते हैं । निर्यात में प्रतिस्पर्धा बहुत ज्यादा होती है पर बिजली कि परेशानी नहीं दिखा सकते हैं । बस हम लोगों को बिजली आसानी से मिले तो नेपाल के इन्डस्ट्री को जो नेपाल सरकार ने सुविधा दे रखी है उसमें कोई भी परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी ।
० ये जो विनाशकारी भूकम्प से क्षति हुई है उसमें आप के क्लब या डिस्ट्रिक्ट से क्या राहत का काम हुआ है ?
– इस महाभूकम्प से हम सभी प्रभावित हुए हैं । वैसे तो उस समय मैं बिराटनगर में था अपने परिवार के साथ । वहां पर कुछ क्षति तो नहीं हुई है पर लोग डरे और सहमे हुए थे । हमारे रोटरी डिस्ट्रीक्ट के गवर्नर केशव कुमार उस विपत्ति में सब के साथ मिलकर भूकम्प पीडि़त का सहयोग किया । हमलोगों को इन्टरनेशनल फाउन्डेशन से भी सहयोग रकम और सामग्री मिली । हमने यहां पर विभिन्न पीडि़तों को त्रिपाल, टेन्ट, खाद्य सामग्री और कुछ समान बाँटे । हम लोगों ने अपने स्तर से पूरी तरह से सहयोग किया हैं । अभी हमारे पूर्वअध्यक्ष कल्याण मानन्धर जी ने आगे कैसे सहयोग करें इसपर सरकार के योजना आयोग से बात की है । योजना आयोग के उपाध्यक्ष से मिलकर हजार स्थायी घर बनाने और हजार विद्यालय पुनर्निर्माण करने की योजना बनाई है । अभी हमलोगों ने कोई जगह निर्धारण नहीं किया है । आयोग ने हम लोगो को यह जानकारी दी कि अभी बरसात का समय पुनर्निर्माण करने के लिए उपयुक्त नहीं है । पर अस्थायी घर बनाने के लिए हम लोग लगे हुए हैं ।
– इस विपत्ति के दौरान सरकार से क्या अपेक्षा रखते हैं ?
– देखिये अपनी तरफ से सरकार पूरी तरह से लगी है । इतना बड़ा भूकम्प आएगा यहाँ ऐसा किसी ने सोचा भी नहीं था । अभी काठमाडाँैं में दाता सम्मेलन हुआ है ये भी सरकार के द्वारा किया गया काम है । हम लोग बहुत आसानी से दोष दे देते हैं पर जब अपने उपर आए तो पता चलता है कि कितना मुश्किल काम है । सरकार की भी अपनी सोच है और वह काम में लगी हुई है । हम उन पर टिप्पणी करने के बजाय हम क्या कर सकते हंै उसपर ध्यान देना जरुरी मै समझता हूँ । सरकार से ये अपेक्षा रखते हैं कि अभी जो राहत का समान आ रहा है उस में डयुटी फ्री कर दें तो बहुत अच्छी बात होगी ।
० अन्त में रोटरी की तरफ से हमारे पाठकों से कुछ कहना चाहते हैं ?
– मै बस इतना कहना चाहता हूँ कि किसी पर टिप्पणी करने के बजाय खुद कुछ करें और यह जरुरी नहीं है कि कुछ बडा ही काम करना पड़े । आप अपनी स्थिति को देखकर सहयोग में आगे आएं । किसी के चेहरे पर मुस्कान आपकी वजह से आती हैं तो आप वो कीजिए और हँसा नहीं सकते तो रुलाने का भी काम मत कीजिए । सेवा करनी चाहिए इससे आत्मसंतुष्टि मिलती है और आपको लगता है कि आपकी जिन्दगी सार्थक हो गई । सेवा करेंगे तो उस का आनन्द आप को मिलेगा । सेवा ही धर्म है ।

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