स्त्री पंखों की नहीं, हौसलों की उडान है : सीमा कर्ण

wo वीरगंज, ११ जुन २०१५ | इसमे कोई शक नहीं है कि तमाम उपलब्धियों के बाबजूद दुनिया में आज भी औरतें दोयम की जिंदगी जी रही है । आज इक्कसवीं सदी में जीवन के सभी क्षेत्रों में महिलाओं के आगे बढने के बाबजूद दुनिया की आधी आबादी का बडा हिस्सा आज भी स्वतंत्रता से कोसों दूर बेबसी का जीवन बिताने पर मजबूर है । आज भी इस पुरुष प्रधान समाज में अधिकतर औरतों की जिंदगी की डोर स्वंय उसके पास न होकर किसी अन्य के हाथ में थमीं हुई है । आज स्त्री शक्ति की अदम्य बयार जिस तेजी से बढ रही है, वह एक महत्वपूर्ण बदलाव है । वे मुक्त गगन में उडने को बेकरार है । उन्होने अपनी जिजीविषा और हौसले को अपना पंख बना लिया है । वे किसी के सहयोग की अपेक्षा नहीं रखती, न ही वे किसी से अपने प्रति सहानुभूति की इच्छा हीं रखती है । उनका तो सिर्फ इतना आग्रह है कि कोई उनका रास्ता न रोके । मुक्त गगन के उडान में बाधा न डालें । प्रकृति का सनातन नियम है कि परम्पराओं की अवधारणा को छोड दिया जाय, तो नारी का पूर्ण विकास इसी दुनिया में हो सकता है ।

दिल्ली पब्लिक स्कूल, बीरगंज की अध्यापिका पूजा प्रधान का कहना है कि स्त्री पैदा नहीं होती, बनाई जाती है । समाज ही उसे अबला की संज्ञा दी है । महिलाओं का सर्वांगीण विकास वक्त की मांग और जरुरत है । अतः महिलाओं को सुरक्षित समाज देने के लिए सरकार को भी पर्याप्त कदम उठाना चाहिए । इससे महिलाओं और युवतियों की बढ रहे कदम उन्हें उनकी मंजिल तक पहुँचा सकेंगे ।

 

सीमा कर्ण

सीमा कर्ण

सीमा कर्ण (एम.ए,बी.एड)
हिन्दी अध्यापिका
दिल्ली पब्लिक स्कूल
बीरगंज ।

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

avatar
  Subscribe  
Notify of
%d bloggers like this: