स्वराज की नेपाल यात्रा

नये सम्बन्धों की शुरुआत
हिमालिनी विशेष:अटकलों और उम्मीदों के बीच भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज नेपाल की औपचारिक यात्रा और भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन कर वापस हो चुकी हैं । उनके आगमन से पहले विरोध की जो हवा थी, उसमें सहमति ने अपनी जगह बना ली है । यह आसार सम्भावनाओं के द्वार खोलता है । भारतीय विदेशमंत्री सुषमा स्वराज का आगमन श्रावण ९ गते की शाम हुआ । तत्पश्चात मुलाकातों और वार्त्तर्ााें का दौर चला । तकरीबन हर प्रमुख दलों के वरिष्ठ नेताओं से उनकी मुलाकात हर्ुइ । नेपाल भारत के बीच के सभी समझौतों और संधियों के पुनरावलोकन पर दोनों पक्षों की सहमति ने आशा का एक संचार जनमानस में किया है । वर्षों से असमानता के आधार पर हर्ुइ संधि की जो पीडÞा नेपाली जनता भोग रही है उसमें सुधार की उम्मीद ने ही हवा के रुख को बदला है । इस मायने में कहा जा सका है कि भारत की नई सरकार की सोच सकारात्मक है । अगर उनकी नीति में सिर्फविद्युत व्यापार की बात होती तो पुनरावलोकन की बात अटक सकती थी या यूँ कहें कि बात ही आगे नहीं बढÞती । कल क्या होगा यह तो आने वाला समय बताएगा किन्तु हर बात को सकारात्मकता की सोच ही फलीभूत कर सकती है, क्योंकि कहा भी जाता है कि, अच्छा सोचो तो अच्छा होगा । दोनों देशों के बीच २३ वर्षों के बाद हुए तीसरे विदेशमंत्री स्तरीय बैठक में पुनरावलोकन का निर्ण्र्ाालिया गया । पाँच-पाँच सदस्यों के प्रबुद्ध समूह को तैयार कर दो वर्षों के भीतर कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया गया, अब देखना यह है कि हमारी सरकार इस ओर कितनी तत्परता से आगे बढÞती है । क्योंकि ऐसे समझौते पहले भी हो चुके हैं, पर नेपाल सरकार की

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स्वराज की नेपाल यात्रा
नये सम्बन्धों की शुरुआत

उदासीनता और अस्थिरता ने उसे बंद बक्से में डाल दिया है । दोनों देशों के सम्बन्ध और भी मजबूत बने इस बात को ध्यान में रखकर २६ सूत्रीय संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई । संयुक्त विज्ञप्ति के अनुसार बातचीत के क्रम में पाँच विषयगत क्षेत्र निर्धारण किए गए थे जिसमें विभिन्न ५२ एजेन्डा शामिल थे । जिसमें राजनीतिक, आर्थिक सहयोग तथा पर्ूवाधार, व्यापार तथा पारवहन, उर्जा तथा जलस्रोत और संस्कृति, शिक्षा एवं मीडिया आदि से सम्बन्धित मुद्दे थे किन्तु इन सब में सीमा सम्बन्धी विवादों को अधिक प्राथमिकता दी गई थी । नेपाल की तरफ से काला पानी, सुस्ता जैसे विवादास्पद सीमा नक्शांकन के विषय में जब बातें आईं तो भारतीय पक्ष ने इसे अत्यन्त जटिल माना ऐसा समाचार संचार माध्यम में आया था । किन्तु बैठक के पश्चात् ही कार्य शुरु करने की बात से यह स्पष्ट होता है कि दोनों पक्षों ने सीमा विवाद को गम्भीरता से लिया है ।
बैठक में पञ्चेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना को कार्यान्वयन करने के लिए भी दोनों देश सहमत हुए । कई दलों के वरिष्ठ नेताओं का भी मानना है कि अगर नेपाल में भारत किसी बडÞी परियोजना में निवेश की तैयारी में है तो, पंचेश्वर बहुउद्देशीय परियोजना को कार्यान्वयन में लाया जाय । सहमति के अनुसार पञ्चेश्वर की कार्यवधि तैयार करने के साथ ही महेन्द्रनगर में कार्यालय रखने की बात भी तय हर्ुइ । साथ ही ऊपरी कर्ण्ााली और तीसरे जलविद्युत आयोजना कोे भी आगे बढÞाने के लिए सहजीकरण और प्रोत्साहन के साथ आगे बढÞने के लिए दोनों पक्ष सहमत हुए ।
सुषमा स्वराज का नेपाल भ्रमण इस मायने में महत्वपर्ूण्ा है कि इस भ्रमण ने १७ वर्षों के बाद भारतीय प्रधानमंत्री के आगमन की पृष्ठभूमि तैयार की है । मोदी की नीति विकास की नीति है यह तो र्सवविदित है और इसके लिए वो प्रतिबद्ध हैं । ऐसे में नेपाल ही नहीं दक्षिण एशिया उनसे आशा कर सकता है और नेपाल चूँकि उनकी प्राथमिकता में है तो इसे भी इस समुचित वक्त का पूरा फायदा लेना चाहिए । नेपाल और भारत का सम्बन्ध बिगडÞा नहीं है हाँ समय ने जो दूरियाँ पैदा की थी और इससे जो अविश्वास की भावना बनी थी उसने नेपाली जनता को भारत के विरोध में खडÞा कर दिया । किन्तु भारतीय विदेशमंत्री के नेपाल भ्रमण ने जनता को यह उम्मीद दिलाई है कि उनकी भावनाओं और उम्मीदों पर भारत खरा उतरने की कोशिश अवश्य करेगा । सुषमा स्वराज की एक उक्ति अनुसार कि ‘भारत किसी भी हाल में नेपाल की भूमि नहीं हडÞपेगा’ भारतीय सरकार काम कर जाय तो भारत स्वयं यहाँ के जनमानस में विश्वास पैदा कर लेगा । इसी सर्न्दर्भ में प्रसिद्ध उद्योगपति विनोद चौधरी ने कहा था कि अगर भारत को विरोधी मनोदशा की औषधि खोजनी है तो नेपाली जनता जो १५-२० घंटे अँधेरे में रहने के लिए बाध्य है उनके घर में रोशनी पहुँचा दे, विरोधी मनोदशा स्वतः कम हो जाएगी । हमारी संस्कृति, हमारा धर्म हमारा रहन सहन सब एक है बस वैचारिक मतभेद हमें दो किनारों पर ला खडÞा करता है ।
सुषमा स्वराज ने नेपाली नेताओं से यह भी कहा कि दोनों पक्षों के भावनात्मक सम्बन्ध से भी नेपाल फायदा ले सकता है । उन्होंने विश्वास दिलाया कि अतीत में चाहे जो भी हुआ किन्तु भविष्य में इन सभी सहमतियों पर अवश्य कार्यान्वयन होगा । विद्युत व्यापार के विषय में भी उन्होंने भारत की धारणा स्पष्ट की । माना जाय तो स्वराज का यह भ्रमण अविश्वास के माहौल को दूर करना था । नेपाल की सरकार और जनता दोनों की शंकाओं को दूर करने की पूरी काेशिश भारतीय पक्ष की ओर से की गई और इस मायने में सुषमा स्वराज का नेपाल भ्रमण सफल भी माना जाएगा । अविश्वास के ही सर्न्दर्भ में जब भारतीय विदेशमंत्री से पत्रकारों ने नेपाली भूमि भारत द्वारा कब्जा करने की बात पूछी तो उन्होंने कहा कि, भारत के पास महात्मा गाँधी की धरती काफी है वो पशुपतिनाथ और बुद्ध की जमीन हडÞपने की कभी सोच नहीं सकता । नेपाल में अगर यह धारणा है कि जलस्रोत और उर्जा विकास के नाम पर भारत नेपाल की भूमि कब्जा करने की सोच रहा है तो यह बिल्कुल गलत सोच है । ऐसी अपवाहों को नहीं फैलाया जाय यह आग्रह उन्होंने किया । उन्होंने विश्वास दिलाया कि भारत, नेपाल के विकास के लिए सदा तत्पर है किन्तु इसकी पहल तो नेपाली नेताओं को ही करनी होगी । भारत के साथ व्यापार में जो घाटा नेपाल को हो रहा है, उसके लिए उर्जा समझौता आवश्यक है । भारत सिर्फउर्जा खरीदना चाहता है उस पर कब्जा नहीं करना चाहता । भारत ने सिर्फएक प्रस्ताव दिया है जिसपर खुली बहस कर के ही किसी निष्कर्षपर पहुँचा जा सकता है । पहले से ही भ्रम नहीं पालना चाहिए । मोदी के भ्रमण की पुष्टि करते हुए उन्होंने कहा कि अभी भारत में संसद चल रहा है, ऐसे में कोई भी प्रधानमंत्री सदन में अनुपस्थित नहीं रहते किन्तु प्रधानमंत्री नेपाल आ रहे हैं क्योंकि, वो श्रावण के सोमवार को पशुपति दर्शन भी करना चाहते हैं । १७ वर्षों के बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री नेपाल आ रहा है इसे सकारात्मक रूप में लेने का आग्रह उन्होंने किया । पुनः उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत नेपाल में सुख, समृद्धि और विकास देखना चाहता है और इसमें सहयोग के लिए तत्पर है । उन्होंने माना कि उनका भ्रमण सोच से अधिक सफल रहा । ज्ञातव्य हो कि मोदी वो पहले प्रधानमंत्री होंगे जो नेपाल की संसद को सम्बोधित करने वाले हैं । स्वराज के भ्रमण के पश्चात् सभी प्रमुख दलों के नेता यहाँ तक कि नेकपा माओवादी के रुख में भी अपेक्षाकृत सुधार नजर आ रहे हैं । तीनों प्रमुख दलों में भी विद्युत व्यापार समझौता -पीटीए) पर सहमति हो चुकी है । ऐसे में शायद नेपाली जनता अच्छे भविष्य की उम्मीद कर सकती है । नेकपा माओवादी के उपाध्यक्ष सीपी गजुरेल ने भी स्पष्ट किया है कि भारतीय प्रधानमंत्री के नेपाल आगमन पर उनकी पार्टर्ीीवरोध नहीं करेगी । रिपोर्र्टर्स क्लब द्वारा आयोजित साक्षात्कार में उन्होंने स्पष्ट किया कि वो भारतीय विदेशमंत्री से वार्ता के इच्छुक थे किन्तु यह हो नहीं पाया । उन्होंने कहा कि आर्श्चर्य है कि भारतीय विदेशमंत्री ने उनसे वार्ता क्यों नहीं की । उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय प्रधानमंत्री के आने पर हमने कोई विरोध कार्यक्रम नहीं रखा है और न हीं रखेंगे । पशुपति नाथ के दर्शन के लिए आनेवाले भारतीय प्रधानमंत्री का विरोध नहीं हम स्वागत करेंगे । हम भारत विरोधी नहीं हैं और हमें भारत विरोधी कह कर प्रचार भी नहीं किया जाय यह उनका आग्रह था । गजुरेल ने माना कि कुछ मुद्दों पर हमारी असहमति हो सकती है पर हम भारत विरोधी नहीं हैं । नेपाली की समस्याएँ दूर हों हम भी यही चाहते हैं पर, पानी विद्युत पर नेपाल का अधिकार हो । मोदी भ्रमण का स्वागत सभी तबके की ओर से किया जा रहा है और यह भी सभी मानते हैं कि नेपाल के विकास के लिए नेपाल-भारत के बीच सहकार्य आवश्यक है । भारतीय प्रधानमंत्री ने नेपाल को उच्च प्राथमिकता दिया है इसलिए नेपाल के राजनीतिक दलों को एक स्पष्ट खाका मोदी के समक्ष रखना चाहिए ताकि एक स्वस्थ माहौल में सहमति हो और नेपाल के विकास की राह प्रशस्त हो सके । इन सारी बातों के लिए एक मजबूत और दृढÞ निश्चय के साथ हमारे प्रतिनिधियों को आगे आना होगा ताकि एक ऐतिहासिक सहमति हो सके । मोदी के समक्ष नेपाल अपने तीन महत्वपर्ूण्ा प्रस्ताव रखने की तैयारी में है । उर्जामंत्री ज्ञवाली के अनुसार नेपाल की तरफ से विद्युत समझौता, लम्की रायबरेली ट्रांसमिशन और तमोर जलविद्युत आयोजना का प्रस्ताव रखा जाएगा । उनके अनुसार सभी पक्ष में मोदी आगमन से पहले सभी दलों से सहमति हो जाएगी । वातावरण सकारात्मक है और आशा है कि मोदी भ्रमण में ही समझौता हो ।

प्रखर व्यक्तित्व और मुखर वक्ता ः सुषमा स्वराज
सुषमा स्वराज का व्यक्तित्व भारतीय जनता पार्टर्ीीें मुखर वक्ता का रहा है । सम्पर्ूण्ा व्यक्तित्व में ही एक ताव है जो उन्हें औरों से अलग करता है । आकर्ष व्यक्तित्व और सम्मोहक मुस्कान अपना प्रभाव छोडÞ जाती है । र्फरुखावाद के एक ब्राहृमण परिवार में इनका जन्म १४ फरवरी १९५२ में हुआ । इनकी प्रारम्भिक शिक्षा भी वहीं से हर्ुइ । राजनीतिशास्त्र इनका प्रिय विषय था । सफल भाजपा नेत्री और कुशल राजनीतिज्ञ के रूप में इनकी छवि रही है और एकर् इमानदार नेता के रूप में इन्होंने अपनी पहचान बनाई है । २५ वर्षकी छोटी आयु में हरियाणा की कैबिनेट मंत्री के रूप में आप उभर कर सामने आईं । इनकी राजनैतिक यात्रा १९७० में भारतीय अखिल परिषद् से शुरु हर्ुइ । कई उतार चढÞाव आए किन्तु इनकी काबीलियत पर कभी सवाल नहीं खडÞे हुए । इसका अनुमान इस बात से भी लगाया जा सकता है कि राजनैतिक यात्रा में इन्हें हमेशा महत्वपर्ूण्ा पद मिलते रहे हैं । भाजपा की पहली महिला मुख्यमंत्री, संघ कैबिनेट मंत्री, महासचिव, प्रवक्ता आदि दायित्वों का आपने निर्वाह किया है । इंदिरा गाँधी के बाद दूसरी महिला विदेशमंत्री होने का भी गौरव इन्हें प्राप्त हुआ । इनकी योग्यता ने ही इन्हें मोदी सरकार में इस महत्वपर्ूण्ा पद का अधिकारी बनाया है । किसी भी तंत्र में प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और विदेशमंत्री का पद अत्यन्त महत्वपर्ूण्ा माना जाता है और नरेन्द्र मोदी की सरकार में इन्हें यह पद मिलना निश्चय ही इनके लिए अभूतपर्ूव उपलब्धि है । आपका विवाह स्वराज कौशल के साथ हुआ है । जो एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और इनकी एक पुत्री है जिसने आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है ।

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