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स्वर साम्रागी लता का अाज है जन्म दिन

मुंबई।

२८ िसतम्बर

भारतीय सिनेमा की उम्र लगभग 104 साल हो गई है, जिसमें से 70 साल सुरों की मल्लिका लता मंगेशकर ने सिनेमा के साथ बिताए हैं। आज लता मंगेशकर ने उम्र का 88वां पड़ाव पार कर लिया है। आइए, जानते हैं उनके बारे में कुछ दिलचस्प बातें।

लता मंगेशकर ने 1942 से अब तक, लगभग 7 दशकों में, 1000 से भी ज़्यादा हिंदी फिल्मों और 36 से भी ज्यादा भाषाओं में गीत गाये हैं, जिनकी संख्या 30 हज़ार से अधिक है। लता मंगेशकर को साल 2001 में भारत रत्न से भी नवाज़ा जा चुका है। इसके अलावा पद्म भूषण (1969), दादा साहब फाल्के अवार्ड (1989) और पद्म विभूषण (1999) से भी वो सम्मानित की जा चुकी हैं। लता दीदी तीन बार नेशनल फ़िल्म अवॉर्ड अपने नाम कर चुकी हैं।

लता नहीं है पहला नाम

लता मंगेशकर का जन्म 28 सितंबर 1929 को इंदौर में हुआ था। गायकी का हुनर लता को विरासत में मिला था। उनके पिता दीनानाथ मंगेशकर एक क्लासिकल सिंगर और थिएटर आर्टिस्ट थे। लता चार भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। जन्म के वक़्त लता का नाम हेमा था, मगर कुछ साल बाद पिता ने अपने नाटक के पात्र लतिका के नाम पर उन्हें लता रख दिया। लता ने पांच साल की उम्र से ही अपने पिता से संगीत सीखना शुरू कर दिया था और थिएटर में एक्टिंग भी करती रहीं। तब वह 13 साल की थीं, तभी पिता दीनानाथ का निधन हो गया। 1945 की फ़िल्म बड़ी मां में लता और आशा ने छोटे रोल भी प्ले किये थे।

आवाज़ की वजह से हो गयी थीं रिजेक्ट

जिस आवाज़ के दम पर लता मंगेशकर ने कई सालों तक भारतीय सिनेमा को अपने जादू में बांधकर रखा, उसी आवाज़ को रिजेक्शन भी मिल था। संघर्ष के दिनों में प्रोड्यूसर सशाधर मुखर्जी ने लता की आवाज को ‘पतली आवाज़’ कहकर अपनी फ़िल्म ‘शहीद’ के लिए रिजेक्ट कर लिया था। इससे गुस्साए म्यूजिक डायरेक्टर ने एलान किया था कि एक दिन फ़िल्ममेकर्स लता के पैरों में गिरकर फ़िल्मों में गाने की फ़रियाद करेंगे। गुलाम हैदर ने लता मंगेशकर को फिल्म ‘मजबूर’ में ‘दिल मेरा तोड़ा, कहीं का ना छोड़ा’ गीत गाने को कहा, जो काफी सराहा गया। लता ने एक इंटरव्यू में गुलाम हैदर को अपना ‘गॉडफादर’ कहा था।

लता के बिना फ़िल्में नहीं करती थीं मधुबाला

ता ने कई पीढ़ी की अदाकाराओं को अपनी आवाज़ दी है, लेकिन उनका मानना है कि इनमें से कुछ ही उनकी आवाज़ के साथ तालमेल बिठा सकीं। जया बच्चन उनमें से एक हैं। एक इंटरव्यू में लता ने सिनेमा में अपने सफ़र पर बात करते हुए कहा थ, कि मीना कुमारी, नर्गिस, मधुबाला और साधना ऐसी एक्ट्रेसेज थीं, जिन पर उनकी आवाज़ पूरी तरह फिट बैठती थी, जबकि बाद की पीढ़ी में माधुरी दीक्षित और काजोल की अदाकारी ने उनकी प्लेबैक सिंगिंग के साथ अच्छा तालमेल बिठाया। इन एक्ट्रेसेज ने गानों को लिप सिंक करते वक़्त अपने हाव-भाव से महसूस ही नहीं होने दिया कि पर्दे के पीछे किसी और की आवाज़ है। मधुबाला के बारे में बताया जाता है कि वो फ़िल्म इसी शर्त पर करती थीं कि लता उनकी आवाज़ बनेंगी। ये मधुबाला के कांट्रेक्ट में भी रहता था।

लता को छोटी बहन मानते हैं दिलीप कुमार

1974 में लंदन के रॉयल एल्बर्ट हॉल में लता मंगेशकर अपना पहला कार्यक्रम कर रही थीं तो उसकी शुरुआत करने के लिए दिलीप कुमार को बुलाया गया था। इस कार्यक्रम में लता पाकीज़ा के हिट गाने इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरा से शुरुआत करना चाहती थीं, मगर दिलीप कुमार की नज़र में ये गाना उतना उम्दा नहीं था और इसी बात पर वो लता से नाराज़ हो गये थे। हालांकि लता को दिलीप साहब अपनी छोटी बहन मानते हैं। दिलीप कुमार ने लता के करियर के शुरुआती दौर में हिंदी-उर्दू गाने गाते वक़्त लता के महाराष्ट्रिटन उच्चारण पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद उन्होंने उर्दू की बाकायदा ट्रेनिंग ली।

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