स्वामी विवेकानन्द की १५०वीं जन्म जयन्ती

काठमांडू। स्वामी विवेकानन्द जी का १५०वीं जन्मजयन्ती समारोह विश्वभर में मनाया गया। इसी क्रम में नेपाल में रामकृष्ण आश्रम द्वारा १२ जनवरी २०१३ के दिन स्वामी जी का १५०वीं जन्मजयन्ती समारोह मनाया गया।
उस अवसर पर प्रमुख अतिथि राष्ट्रपति डा. रामवरण यादव और अतिथि भारतीय राजदूत जयन्त प्रसाद उपस्थित थे।
सभा की शुरुवात वैदिक गान-शान्ति पाठ और राष्ट्रगान से की गई। स्वामी गौरांगनन्द ने कार्यक्रम का परिचय और आगन्तुक का स्वागत करते हुए कहा- स्वामी विवेकानन्द के अनुसार सेवा ही परम धर्म है।
राष्ट्रपति द्वारा दीप प्रज्ज्वलित करने के बाद विवेकानन्द की बन्दना प्रस्तुत की गई। केन्द्र के अध्यक्ष दीपक ज्ञावली ने भी इस सर्न्दर्भ में अपने विचार व्यक्त किए।
भारतीय राजदूत जयन्त प्रसाद ने स्वामी जी के बारे में विचार व्यक्त करते हुए कहा कि विवेकानन्द ने पर्ूर्वी-पश्चिमी विचारों को एक साथ लेकर हिन्दू धर्म की ओर विश्व का ध्यान आकषिर्त किया। स्वामी जी ने हिन्दू वेदान्त दर्शन को भी आगे बढाते हुए अस्पृश्यता का भी प्रबल रुप से विरोध किया था।
राष्ट्रपति डा. यादव ने कहा कि टैगोर, वसु आदि प्रतिष्ठित व्यक्तियों ने भारतीय स्वतन्त्रता में महान योगदान दिया है। प्रथम विश्व धर्म सम्मेलन में उन्होंने हिन्दू धर्म का झण्डा फहराया। वे युगद्रष्टा थे और उन्होंने नारी आन्दोलन के लिए नारा बुलन्द किया था। राष्ट्रपति ने आशा व्यक्त करते कहा कि रामकृष्ण आश्रम सभी क्षेत्र में स्वामी जी के सन्देशों को आगे बढÞाएगा।
अन्त में रविराज थापा ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा- नेपाल में अभी चारों ओर से धर्म की हानि हो रही है। इस क्षेत्र में विवेकान्द के सन्देश निश्चय ही सशक्त भूमिका निर्वाह करेगा, यह खुशी की बात है। सांस्कृतिक सत्र में रेखा सत्याल ने भजन और सविना कार्की ने मधुर संगीत प्रस्तुत किया। स्वामी जी पर आधारित नाटक गौरी-शंकर विद्यालय ने प्रस्तुत किया। अन्त में आईसीसी द्वारा भरतनाट्यम् नृत्य प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर विवेकानन्द के चित्रों एवं उनसे सम्बन्धित पुस्तकें भी प्रदर्शित की गई थी।

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