स्वास्थ्य-ठण्ड के मौसम में हमारी त्वचा की देखभाल

रामदेव पण्डित
ठण्डे मौसम में लोग अपनी रूखी बेजान त्वचा पर तरह तरह के क्रीम लगाकर उसे मुलायम और चमकदार बनाने की कोशिश करने में लगे रहते हंै । लेकिन आजकल के केमिकलयुक्त क्रीम से असली चमक वापस लौटती नहीं है बल्कि कहीं खो जाती है ।
त्वचा मानव का एक ऐसा अंग है जो हरपल वायुमण्डल एवं बाहरी पर्यावरण के साथ जुड़ा हुआ रहता है । पर्यावरण एवं वायुमण्डल में पलपल होनेवाला हर परिवर्तन का प्रत्यक्ष असर निःसन्देह रूप से त्वचा पर पडती ही है । तो ये हम सबके अनुभव की बात है इसीलिए फिर कहना नहीं पडेÞगा कि अक्सर ठण्डे मौसम में त्वचा में तरह तरह की समस्याएँ आती हैं ।
त्वचा सूखी पड़ जाती है जिसके कारण उसमें खुजलाहट होती है । इतना ही नहीं कई चर्म रोग से सामना करना पड़ता है जैसे दाद, खुजली आदि । इनकी वजह से हम बैचेनी महसूस करते हैं । आखरि इनी वजह क्या है ?
ताप सदा उच्च तापमान से निम्न तापमान की ओर बहती है । ठण्डे मौसम में हावमण्डल की आद्रता कम हो जाती है और शरीर के तापमान से हवामण्डल एवं पर्यावरण का तापमान ज्यादा निम्न रहता है । अतः हमारी त्वचा के माध्यम से शरीर का ताप पर्यावरण में बह जाने से त्वचा सूखी, कड़ी और तनाव युक्त हो जाती है । सूखी और तनावयुक्त होने से त्वचा को आवश्यक पोषण एवं देखभाल ना मिलने से ठण्ड के मौसम में त्वचा की समस्या ज्यादा होती है । लिवर में टक्सिन इक्ट्ठा होने से रक्त में अशुद्धि बढ़कर भी त्वचा के रोग को आमन्त्रित करती है ।
त्रिभुवन विश्वविद्यालय, चिकित्साशास्त्र अध्ययन संकाय, चर्मरोग विभाग के प्रा.डा.डी.पी. श्रेष्ठ द्वारा सन् २००९ मे किए गए एक अनुसन्धान के मुताविक नेपाल में १० प्रकार के चर्मरोग प्राथमिक रूप से दिखाई पड़ रहा है । इक्जिमा, पिग्मेन्टरी डिस्अडर, पी. अल्बा, एक्नी, युट्रिकेरिया, मोलज् और लम्पस्, प्रुराइटिस्, भाइरल इनफेक्सन्, पायोडर्मा ओर फगंल इन्फेक्सन, ये १० त्वचारोग मे से प्रथम ५ ने जनता के गुणात्मक जीवनयापन को प्रत्यक्ष एवं बहुआयामिक रूप से प्रभावित किया है । अतः त्वचा की छोटी छोटी समस्याओं को सामान्य रूप से ना लेकर इसके प्रति हरपल सजग रहना जरुरी है, नही तो ये त्वचा का कैंसर बनकर जीवन को नर्क भी बना सकती है ।
ठण्ड के मौसम में त्वचा की समस्याओं से बचने के लिये हमें त्वचा को किसी भी तरह सूखी होने से बचाना होगा । इसके लिये हर बार नहाने के बाद तौलिया से पोछकर नारियल का तेल पूरे शरीर में लगाना सबसे उत्तम उपाय है । भारत के प्रसिद्ध आयुर्वेदाचार्य राजीव दीक्षित ने नारियल का तेल को सभी तेलों का बाप कहा है क्योंकि नारियल के तेल को त्वचा पर लगाने के साथ साथ, बालों में लगाना, मसाज करना और खाने में भी सेवन करना हितकारी है । नारियल में प्राकृतिक मॉइस्चराइजर और एंटी एजिंग तत्व शामिल होते हैं । प्रति दिन नहाने के बाद नारियल के तेल अपने सम्पूर्ण शरीर में लगाने से त्वचा स्मूद और मुलायम हो जाती है ।
बादाम का तेल त्वचा की खोई हुई रंगत वापस पाने के लिए त्वचा पर लगाया जाता है ।
सरसों का तेल इन्फेक्शन दूर करता है । अगर आप फटे होंठ से परेशान हैं तो सरसों के तेल से मसाज करें । ये ना केवल आपकी रूखी त्वचा को ठीक करेगा बल्कि इन्फेक्शन को भी दूर रखेगा । सरसों का तेल ओमेगा ३ और ओमेगा ६, फैटी एसिड, विटामिन ई और एंटी ऑक्सीडेंट से भरपूर होता है, इसलिए इसे सबसे ज्यादा हेल्दी तेलों में से एक माना जाता है ।
नींबू का तेल दाग धब्बों को दूर करता है । अगर आपके चेहरे पर ढेर सारे दाग धब्बे हैं और आप उन्हें दूर करने के लिए तरह तरह के ट्रीटमेंट ले चुके हैं तो नींबू का तेल का मालिश इसके लिए बहुत कारगर साबित होगा । शरीर पर जैतून के तेल के मालिश से प्रजनन क्षमता बढ़ती है । शरीर में खुजली हो रही है या फिर चकते पड़ रहे हैं तो नीम के तेल का मसाज करने से सारी परेशानियां दूर होती है ।
त्वचा के समस्याओं से दूर रहने के लिए खाने पीेने में परहेज अत्यन्त आवश्यक होता है । चिपचिप होनेवाली सब्जी जैसे बैगन, ओरबी, आदि का त्याग करना फायदेमन्द माना जाता है । त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए सम्झने की सबसे अहम बात यह है कि त्वचा में होने वाली अक्सिडेन्ट और एन्टिअक्सिडेन्ट का मामला । जब त्वचा पर सूर्य की रोशनी पड़ती है तो प्राकृतिक रूप से त्वचा में अक्सिडेसन् होती है और त्वचा के कोष के सतह पर फ्री रेडिकल नामक एक हानिकारक तत्व का उत्पादन होता है । अतः त्वचा को स्वस्थ रखने के लिए इस फ्री रेडिकल को व्यवस्थापन या काउन्टर करना अनिवार्य होता है ।
त्वचा के लिए महत्वपूर्ण पोषण तत्व पाये जाने वाले आहार इस प्रकार हैं —
विटामिन सी ः ये त्वचा के लिए आवश्यक कोलाजिन प्रोटिन के उत्पादन में सहायक होती है और एन्टीअक्सीडेन्ट के रूप में कार्य करती है । त्वचा का कंैसर होने से रक्षा करती है । ब्रोकोली, बन्दा गोबी, अमरुद, अंगुर, स्ट्रबेरी आदि इसका अच्छा स्रोत है ।
सेलेनियमः ये विटामिन ई को अवशोषित करता है और एन्टीअक्सीडेन्ट के रूप में कार्य करती है । त्वचा को कड़ापन एवं इलास्टिसिटि को बनाए रहती है । अखरोट, प्याज,गेहुँ के कीटाणु, लिभर, ब्राउन राइस्, आदि में ये पायी जाती है ।
विटामिन ईः ये भी त्वचा में एन्टी अक्सिडेन्ट के रूप में कार्य करती है, त्वचा के कैंसर होने से और त्वचा का रीङक्लड् होने से भी रक्षा करती ही । बादाम, अण्डे, अखरोट आदि में ये पाया जाता है ।
ओमेगा ३ ः इससे हमारी त्वचा में होनेवाली सूजन को रोका जाता है साथ ही त्वचा में रीङक्लड् होने से भी रक्षा करती है । अखरोट, सैल्मन, मछली का तेल आदि में ये पाया जाता है ।
विटामिन ए और बिटा क्यारोटिन ः ये भी एन्टी अक्सिडेन्ट के रूप में कार्य करता है । इसका प्रमुख स्रोत है शतावरी, आडू., अण्डे, शखरखण्ड, आदि ।
जिङ्क ः ये मरे हुवे कोष को रिपेयर करता है और घाव को हिलिङ्ग करने में सहायक होता है । जिङ्क के अभाव में त्वचा की ग्रन्थी तेल का उत्पादन करना बन्द कर देती है । इसलिए खाने में जिङ्कयुक्त आहार जैसे फर्सी का बीज, जिन्जर, दाल, पालक आदि का सेवन करना चाहिए ।
खूबसूरत त्वचा हर किसी की पहली चाहत होती है । हो भी क्यों न त्वचा सांस लेती है, महसूस करती है और प्यार भरे देखभाल से खिल भी उठती है । ये बाहरी नुकसानदेह वातावरण से शरीर को बचाने वाला पहला रक्षक है और इसीलिए इसकी रक्षा करना हमारे लिए उतना ही जरूरी है । त्वचा का सौंदर्य अधिक समय तक बना रह सकता है लेकिन उसके लिए जरूरी है उसकी सही देखभाल ।

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