स्वास्थ्य मंत्री गिरिराजमणि पोखरेल को ‘स्वाइनफ्लु’ (जानिए– क्या है स्वाइनफ्लु और कैसे बचे)

काठमांडू, १५ भाद्र
स्वास्थ्य मन्त्री गिरिराजमणि पोखरेल को स्वाइनफ्लु अर्थात एन्फ्लुएन्जा ए पोजेटिभ भाइरस (एच१ ए)न १) का संक्रमण हो गया है । स्वास्थ्य मन्त्रालय के प्रवक्ता डा. श्रीकृष्ण गिरी ने इस बात को पुष्टि किया है । स्मरणीय है, मन्त्री पोखरेल एक सप्ताह से वीर अस्पताल में उपचारत हैं । डा. गिरी के अनुसार दो दिन पहले यह बात का पुष्टि हुआ है कि मंत्री पोखरेल को स्वाइनफ्लु का संक्रमण हुआ है । फिजिसियन डा. सुरेन्द्रलाल श्रेष्ठ नेतृत्व में रहे चिकित्सकों की निगरानी में मन्त्री पोखरेल हैं । बाढ़ पीडितों को राहत वितरण के लिए महोत्तरी जिला पहुँचे मंत्री पोखरेल बुखार होने के कारण गत शनिबार काठमांडू आए थे ।

क्या है स्वाइन फ्लू?
स्वाइन फ्लू , इनफ्लुएंजा यानी फ्लू वायरस के अपेक्षाकृत नए स्ट्रेन इनफ्लुएंजा वायरस A से होने वाला इनफेक्शन है। इस वायरस को ही H1N1 कहा जाता है। इसके इनफेक्शन ने 2009 और 10 में महामारी का रूप ले लिया था-लेकिन WHO ने 10 अगस्त 2010 में इस महामारी के खत्म होने का भी ऐलान कर दिया था। अप्रैल 2009 में इसे सबसे पहले मैक्सिको में पहचाना गया था। तब इसे स्वाइन फ्लू इसलिए कहा गया था क्योंकि सुअर में फ्लू फैलाने वाले इनफ्लुएंजा वायरस से ये मिलता-जुलता था।

क्या है स्वाइन फ्लू के लक्षण ?
स्वाइन फ्लू के लक्षण भी सामान्य एन्फ्लूएंजा जैसे ही होते हैं
-नाक का लगातार बहना, छींक आना
-कफ, कोल्ड और लगातार खांसी
-मांसपेशियां में दर्द या अकड़न
-सिर में भयानक दर्द
-नींद न आना, ज्यादा थकान
-दवा खाने पर भी बुखार का लगातार बढ़ना
-गले में खराश का लगातार बढ़ते जाना

स्वाइन फ्लू का वायरस तेजी से फैलता है। कई बार मरीज के आसपास रहने वाले लोगों और तिमारदारों को चपेट में ले लेता है। लिहाजा, किसी में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखें तो उससे कम से कम तीन फीट की दूरी बनाए रखना चाहिए, स्वाइन फ्लू का मरीज जिस चीज का इस्तेमाल करे, उसे भी नहीं छूना चाहिए।

कैसे फैलता है स्वाइन फ्लू?
-स्वाइन फ्लू का वायरस हवा में ट्रांसफर होता है
-खांसने, छींकने, थूकने से वायरस सेहतमंद लोगों तक पहुंच जाता है

डॉक्टरों का ये भी कहना है कि अगर किसी घर में कोई शख्स स्वाइन फ्लू की चपेट में आ गया तो, घर के बाकी लोगों को इससे बचने के लिए डॉक्टरी सलाह ले कर खुद भी इसकी दवाईयां खानी चाहिए। राजधानी दिल्ली में स्वाइन फ्लू की रोकथाम के लिए पांच निजी अस्पतालों समेत 22 अस्पतालों को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल भी उनमें से एक है। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में डॉक्टरो और नर्सिंग स्टाफ का एक बड़ा दल स्वाइन फ्लू वार्ड मे लगाया गया है। अस्पताल के मुताबिक इस विशेष दल के सदस्यों को भी इस बीमारी से बचने के लिए दवाईयां दी जा रही हैं। साथ ही वॉर्ड में स्वाइन फ्लू के मरीजो को कॉरंटाइन रखने की खास व्यवस्था की गई है।

स्वाइन फ्लू से बचाव इसे रोकना का बड़ा उपाय है, हालांकि इसका इलाज भी अब मौजूद है। आराम करना, खूब पानी पीना, शरीर में पानी की कमी न होने देना इसका सबसे बेहतर है। शुरुआत में पैरासीटमॉल जैसी दवाएं बुखार कम करने के लिए दी जाती हैं। बीमारी के बढ़ने पर एंटी वायरल दवा ओसेल्टामिविर (टैमी फ्लू) और जानामीविर (रेलेंजा) जैसी दवाओं से स्वाइन फ्लू का इलाज किया जाता है।

लेकिन इन दवाओं को कभी भी खुद से नहीं लेना चाहिए। वैसे सर्दी-जुखाम जैसे लक्षणों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली तुलसी, गिलोए, कपूर, लहसुन, एलोवीरा, आंवला जैसी आयुर्वेदिक दवाईयों का भी स्वाइन फ्लू के इलाज में बेहतर असर देखा गया है। सर्दियों में इन्हें लेने से वैसे भी जुखाम तीन फिट की दूरी पर रहता है, और स्वाइन फ्लू के वायरस से बचने के लिए भी इतने ही फासले की जरूरत होती है।

 

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