हमारा देश महान है, यहां शहीदों का उत्पादन धड़ल्ले से होता है: बिम्मीशर्मा

बिम्मीशर्मा, काठमांडू, २२ अगस्त | (शहीदों का देश)

अन्य देश धान, गेहूं और अन्य अन्न उत्पादन करते हैं । अन्य देश में दाल और सब्जी वगैरह भी उपजाया जाता है । पर हमारा यह देश कितना महान है कि यहां शहीदों का उत्पादन धड़ल्ले से होता है । परिश्रम करना कुछ नहीं है, न कुछ जमीन में बोना ही है । बस शहीदों का फसल हरेक साल काटने के लिए देश तैयार रहता है । हो भी क्यों न ? विभिन्न दल और इस के नेता राजनीति की जमीन पर अपने लोकप्रिय भाषण और घोषणा पत्रों से बीज और मल, खाद्य का छिड़काव जो करते हैं ।

100 days of madhesh andolan

करीब तीन करोड़ की आवादी वाला यह देश और चीजों में आत्मनिर्भर हो न हो पर शहीद उत्पादन में कब का आत्मनिर्भर हो चुका है । जब से देश में माओवादी द्धन्द्ध शुरु हुआ तब से यह देश शहीदों का उत्पादन करता आ रहा है । पिछले २० सालों मे इस देश में जितने बच्चे पैदा नहीं हुए है उतने शहीद पैदा हो चुके हैं । यह देश और कब तक शहीदों का उत्पादन करता रहेगा यह यहां कि राजनीति की आबोहवा और नेताओं की नीयत पर निर्भर हैं ।

अन्य देशों में देश के लिए मर मिटने और जान कुर्बान करने वालों को शहीद कहा जाता है । पर हमारे देश में ऐसा नहीं है । कोई अपनी इच्छा से भी खुदकुशी कर ले तो भी उस को आत्महत्या करने वाले शहीदों की कोटि मे रख कर उस के परिवार वालों को घर के सदस्य के शहीद होने की खुशी में मुआवजा दिया जाता है । कोई सवारी दुर्घटना में मारा गया तो वह सड़क शहीद माना जाता है । सौ बात कि एक बात यह है कि जन्म भले ही मां, बाप की खुशी या वाध्यता से हुई हो । पर मरने पर वह शहीद बन जाता है । यह देश किसी को भी सामान्य नहीं मानता इसी लिए हर एक को शहीद घोषणा कर मातमपुर्सी कर के राहत की रकम बांटने के लिए बावला हो रहा है ।

जब जब देश में सरकार परिवर्तन होता है तब तब देश में नए नए शहीद अपने आप पैदा हो जाते है । सरकार में काविज दल जब सत्ता सम्हालती है तब वह और कोई काम करे न करे शहीद घोषणा और शहीदों को सम्मान कर उन के बारे में कसीदे गढ़ कर राहत की रकम उपलब्ध करा कर अपने को धन्य मानती है । कोई वृद्ध हो कर या बीमार हो कर मर जाए तब भी यह देश उन्हें वृद्ध और बीमार शहीद घोषणा कर क्षतिपूर्ति का रकम स गर्व उपलब्ध कराती है । सरकार का काम ही शहिदों को उचित सम्मान और रहात मिला है कि नहीं यह देखना है ।

देश में विकास निर्माण का काम कितनी सुस्त या रफ्तार से है । यह देखना सरकार का काम नहीं है । देश खाई से लुढ्के तो भी हमारी बला से । पर शहीदों की आंखो मे आंसू नहीं आने चाहिए । जहां शहीदों की आंखो मे आंसू आए और इन के परिवार जन हाय, हाय करने लगे तब समझिए इस देश की सरकार जल्दी ही सिंह दरवार को बाय बाय करेगी । इसी लिए यह हमारे देश के शहीद नही“कूल देवता” हैं । जिन्हे सत्ता में आसीन होने के बाद हरेक दल या सरकार सब से पहली पूजती है । शालीग्राम के लिए सारे विश्व में मशहुर यह देश अब शहीदग्राम बन रहा है । जितना काली गण्डकी नदी से शालीग्राम नहीं निकलता उतने इस देश की मिट्टी से शहीद पैदा हो रहे हैं ।

इस देश की सरकार चाहे जो कोई भी हो अपने देश के नागरिकों को शहीद बनाना इसी लिए चाहती है ताकि वह निष्कटंक राज कर सके । हर किसी को शहीद बना कर उस के परिवार वालों के मुहं में कुछ लाख रुपएं ठूस दो । बस हो गया काम तमाम । तब न कोई सरकार और उस के काम, कारवाही, न महंगाई, तस्करी और कालाबजारी के विरोध में मुँहं खोलेगा या बोलेगा । पत्थर के बुत बस देखते है बोलते कुछ नही । शहीद मल तब पत्थर की शालिक जिसे माला पहना दो, अबीर लगा दो बस हो गया । दो, चार दिन यह शहीद खबरों में बने रहेगें । मीडिया सरकार के कामों का ढिढोंरा पिटेगी बस । कुछ महीने बाद इन शहिदों की सालिक पर चिड़ीया बिट कर के और दूसरा सम्मान देती दिखेगीं ।

देश भले ही प्राकृतिक संसाधनो और औधोगिक संरचना में धनी न हो । तो क्या हुआ यह देश शहीद उत्पादन में तो धनी है । ७० लाख से ज्यादा नेपाली जो मध्यपूर्व या अन्य देशों में रोजगारी के लिए गए हैं वह भी तो शहीद ही है । हरेक दिन १५ सौ से ज्यादा नेपाली नागरिक विदेश पलायन हो रहे है । कई बार वह लौट कर नहीं आते उनका शव काठ के बक्से मे आता है विदेशी मरुभूमि में शहीद बन कर । अरब देशों में यह ५० डिग्री से उपर के तापमान में ऊँटं या अन्य जानवर का गंदगी साफ करते है । इन के मालिक इन से जानवरों जैसा सुलुक करते है । इतने गर्म तापमान में अपनी हड्डी, खून, आंसू और पसीने को गला कर उस का चूर्ण बना कर देश में भेजते हैं । तब इस देश की सरकार उस चूर्ण को रेमिट्यान्स का तिलक बना कर अपने माथे पर लगाती है और इन पलायन हुए शहीदों पर गर्व करती है । सरकार चाहती ही है कि अधिक से अधिक देशवासी विदेश पलायन हो ।

देश के नागरिकों को शहीद बनाने के लिए ही तो सरकार वैदेशिक रोजगारी मे जाने वालों के लिए भिषा फ्री कर रही है । यहां रहेगें तो सिर्फ पार्टी का कार्यकर्ता बन कर विरोधियों को पत्थर ही मारेगें । विदेश जाएगें तो कम से कम अपनी हड्डी को घोट कर कुछ पैसे तो परिवार और देश के लिए भेजेगें । ईसी लिए जितने ज्यादा लोग शहीद बनेगें सरकार उतनी ही मालामाल होगी । कोई काठ के बक्से मे सो कर शहीद, कोई चिता मे जल कर शहीद, कोई पासपोर्ट बनाने कि लाईन पर शहीद और कोई विमान स्थल में हवाई जहाज चढ्ता हुआ शहीद । जितने लोगो कें नाम और जात नहीं है उस से ज्यादा शहीदों का नाम है । यहां तो लोग चलते, फिरते भी टहलुवा शहीद हो जाते हैं ।

तो देखा आपने ?अब पढ्ना, लिखना छोड़ दीजिए । परीक्षा की चिंता भी मत कीजिए । किसी विषय में नंबर कम या ज्यादा आए तो भी कोई बात नहीं । अपने मन मुताविक विषय पढ्ने को नहीं मिला या मन माफिक कलेज या बिश्वविद्यालय में चयनित नहीं हुए तो भी कोई बात नहीं । बस आज से ही शहीद बनने की दिशा में आगे बढिए । इस देश में अब जल्द ही शहीदों का स्कूल, कलेज और बिश्वविद्यालय खोला जाने वाला है । जहां सिर्फ शहीदों के बारे में ही पढ़ाई होगी । तो देर किस बात की ? यह देश और यहां की सरकार आपका बाट जोह रही हैं । क्या पता इस देश के अगले शहीद आप हीं हो ? (व्यग्ंय)

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