हमारी औद्योगिक नीति राजनीति से दुष्प्रभावित हैः अरुणराज सुमार्गी

मकवानपुर उद्योग वाणिज्य संघ के पर्ूव अध्यक्ष, फिलहाल मध्यमाञ्चल क्षेत्रीय उद्योग वाणिज्य संघ के अरुणराज सुमार्गी, एक कर्तव्यनिष्ठ समाजसेवी के रूप मंे भी जाने जाते हैं । वे जव हेटौडा उद्योग वाणिज्य संघ के अध्यक्ष थे, उस समय उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता माधवराज सुमार्गी स्मृति कोष के एक करोड रूपये से हेटौडा में पेयजल और सडक निर्माण कार्य प्रारम्भ किया था । उनसे हिमालिनी के सम्वाददाता गोविन्द न्यौपाने द्वारा की गई बातचीतः
० पचास वर्षपुराना औद्योगिक क्षेत्र हेटौडा, अभी क्यों बदहाली में जी रहा है –

arunraj sumargi

अरुणराज सुमार्गी

– ऐसी अवस्था का मुख्य कारण देश की राजनीतिक अस्थिरता है । इस अस्थिरता के चलते औद्योगिक नीति, कानूनी प्रत्याभूति सभी भाषण और कागज में सीमित रह गए, विकास पिछडÞ गया ।
० औद्योगिक नीति में सुधार की आशा की जा सकती है –
– जरूर की जा सकती है । इसके लिए राज्य और राजनीतिक दलों को आगे आना होगा । उद्योगी व्यवसायियों को यदि आवश्यक सुविधा राज्य से प्रदान की जाए तो पाँच से लेकर सात वर्षके अन्दर विकसित देश की तरह गार्हस्थ्य आमदनी को बढÞाया जा सकता है । जैसे कोई उद्योगी सौ व्यक्ति को रोजगार देने वाला उद्योग स्थापना करता है तो राज्य की ओर से विभिन्न निकाय में स्थित निष्त्रिmय पूँजी को कम से कम दस वर्षके लिए न्यूनतम ब्याज लेकर उस उद्योग को कर्जा प्रवाह करना चाहिए । ऐसा किया जाए तो युवाओं का विदेश पलायन भी कम होगा ।
० फिर भी युवा वर्ग का विदेश जाने का क्रम तो हर रोज बढÞता ही जा रहा है, प्रभावी नीति कब तक आ सकती है –
– रोजगारी की ग्यारेन्टी नहीं होने से और सरकार तथा राजनीतिक दल भी इस मामले में गम्भीर न होने से क्षमतावान पठित युवा वर्ग के लिए वैदेशिक रोजगार ही एक विकल्प के रूप में दिखाई पडÞ रहा है । दर्ुभाग्य देखिए, यहाँ के डाक्टर, इन्जीनियर भी विदेश जा रहे हैं । इसके लिए पर्ूण्ातः सरकार और राजनीतिक दल जिम्मेवार हैं ।
० लेकिन हेटौडा में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों में स्थानीय लोगों का प्रवेश बहुत कम है । उच्च पदों में प्रायः बाहर के ही लोग हैं । तब कैसे अपेक्षित नीति साकार होगी –
-देश की सरकार को कानून द्वारा सञ्चालित होना चाहिए । लेकिन यहाँ राजनीतिक समूह का शासन चल रहा है । राजनीतिक दल और राज्य दोनों मिल कर खास नीति निर्माण कर राज्य का सञ्चालन होना चाहिए था । लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है । क्योंकि हमारा नियम-कानून कमजोर है । कानून का कार्यान्वयन भी कमजोर है । उस पर नेपाल का श्रम कानून भी समयानुकूल नहीं है ।
० उद्योग बन्द होने का क्रम अभी भी जारी है, ऐसा क्यों –
-नेपाल सरकार द्वारा सब से ज्यादा पूँजी निवेश कर स्थापित पचास वर्षपहले का औद्योगिक क्षेत्र, इसी हेटौडा नगर मंे स्थित है । इतना ही नहीं, बहुराष्ट्रीय कम्पनी भी यहाँ सञ्चालन में हैं और दिनों दिन उनकी संख्या बढÞ रही है । लेकिन राज्य के नीति-निर्माताओं को इसके बारे में न कोई जानकारी है, न कोई गर्व है । नेपाल का सबसे बडÞा भन्सार कार्यालय यहाँ से ५०-५५ किलोमीटर की दूरी वीरगन्ज में स्थित है । नेपाल के मध्यभाग में स्थित इस शहर से राजधानी काठमांडू पहुँचने में सिर्फ ३ घण्टे लगते हैं । यहाँ की जमीन सिर्फ१७ प्रतिशत खेतीयोग्य है । जलवायु समशीतोष्ण है । मौसम अनुकूल रहता है । इतने सबल पक्ष होते हुए भी इस शहर को हम लोग विकास के दृष्टिकोण से देश का दूसरा शहर नहीं बना पाये । फिर भी इस नगरी को सुन्दर और सम्पन्न बनाने के लिए यहाँ के स्रोत और साधन का उपयोग करते हुए स्थानीय उद्योग वाणिज्य संघ, यातायात व्यवसाय संघ, निर्माण व्यवसाय संघ और जेसिस संस्थाओं ने संयुक्त प्रयास शुरु किया है ।
० औद्योगिक विकास के लिए अच्छी सडÞकों का सञ्जाल होना जरूरी है । लेकिन यहाँ सडÞकों की अवस्था गई-गुजरी है । ऐसा क्यों –
-सडÞकों के बारे में सरकार अब आकर कुछ सचेत हर्ुइ है । देश के इतिहास में ही पहली बार प्रधानमन्त्री ने डोटी सवारी दर्ुघटना के कसूरवारों को कारवाही करने के लिए एक छानबीन समिति का गठन किया है । यातायात के इतिहास में इसे नवीनतम कहा जा सकता है । इससे प्रमाणित होता है कि सम्बन्धित निकाय अर्थात् सडÞक विभाग, ट्राफिक प्रहरी, सडÞक बनाने वाले ठेकेदार इन सबों की लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना रवैये से सडÞक दर्ुघटना होती है । सवारी चालक की दक्षता को बिना देखे लाइसेन्स मुहैया कराने से भी दर्ुघटना में वृद्धि हर्ुइ है । दर्ुघटना में मरने वालों को शहीद घोषणा कराने के लिए भी लोगों ने कोई कसर बाँकी न रखा । लेकिन दर्ुघटना के तह तक पहुँच कर सुधार करने की दिशा में किसी ने पहल नहीं की । सडÞको की हालत दयनीय होने से ही दैवी प्रकोप से जितने लोग मारे जाते हैं, सडÞक दर्ुघटना में उससे ज्यादा लोग अपनी जान गंवाते हैं । कैसी विडम्बना है ।
० इस बारे में राज्य क्यों गम्भीर नहीं है –
– राजनीतिक दल विकास योजना के बारे में चर्चा तो करते हैं लेकिन विकास का काम होने नहीं देते । वे सोचते हैं, जब अपनी सरकार बनेगी, यह विकास का काम उसी समय में किया जाएगा । अर्थात् विकास का श्रेय वे किसी दूसरी पार्टर्ीीो देना नहीं चाहते । इतनी घटिया सोच रखने वाले नेता से हम लोग क्या आशा कर सकते हैं !
० हेटौडा क्षेत्र अर्न्तर्गत १३ किलोमीटर -तिरतिरेधार से रातोमाटे) की एक सडÞक बनने वाली थी, उसका क्या हुआ –
– देश के विभिन्न स्थान से हेटौडा बाजार होते हुए काठमांडू और सुदूर-पश्चिम तक जाने के लिए हजारों गाडÞी इस शहर में हर रोज आती है । इससे निकला हुआ कार्बन से कैसे निपटा जाए, यह एक समस्या है । एक बाइपास रोड हो तो बात कुछ बन सकती है । इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए जब मैं मकवानपुर उद्योग वाणिज्य संघ का अध्यक्ष था, उस समय मैंने अपने स्वर्गीय पिता माधवराज सुमार्गी स्मृति कोष से एक करोडÞ के सहयोग में बाइपास रोड निर्माण कार्य शुरु किया था । वह कार्य अभी बन्द नहीं है । लेकिन जिविस और नगरपालिका की ओर से इसका कोई संरक्षण नहीं हो रहा है । इस शहर को सुन्दर बनाने के लिए यह बाइपास सडÞक जरूरी है । इससे सवारी चाप में कमी भी आएगी और शहर का सौर्न्दर्य भी बचा रहेगा ।
० पाँच सौ युवकों को रोजगार देने की बात चली थी, उसका क्या हुआ –
– वैदेशिक रोजगार में जाने वाले युवकों की संख्या दिनोंदिन बढÞती जा रही है । इस समस्या को गम्भीरता से लेते हुए एक सच्चे नेपाली उद्योगी व्यवसायी के रूप में हम लोगों ने विदेश से पूँजी और रोजगारी दोनों को लाने का अवसर उपलब्ध कराया है । इस रोजगार, ग्रामीण शक्ति -रुरल सोर्स) को हम विश्व बाजार में अनलाइन द्वारा सेवा प्रदान करेंगे । इस उद्देश्य के साथ बेलायत के अक्सफोर्ड युनिभर्सिटी अर्न्तर्गत भारत के बैंलोर में स्थित रुरल सोर्स के साथ मिल कर करीब पाँच सौ युवा शक्ति को रोजगार प्रदान करने का उद्देश्य है । वि.सं. २०७२ के पहले महिने से इस काम का श्रीगणेश हमारे गृहजिला मकवानपुर से प्रारम्भ होने जा रहा है । इस का दूसरा फेज लुम्बिनी में स्थापना करने की योजना भी हम लोगों ने बनाई है ।
० आप को क्या लगता है, निश्चित समय के अन्दर नया संविधान बन जाएगा –
– अवश्य बनेगा, इसको जैसे भी बनाना ही होगा । आगामी माघ ८ गते तक जैसे भी समग्र नेपाली के हित में इस नये संविधान को जारी करना ही होगा । हम लोग इस में आशावादी हंै ।

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