हमारी कोशिश है कि हम गुणात्मक शिक्षा दे सकें

sp singh

पेन्टागन के प्रिंसिपल एस.पी.सिंह

काठमान्डौ के जाने माने कॉलेज पेन्टागन के प्रिंसिपल एस.पी.सिंह से, कॉलेज की शिक्षण पद्धति और भूकम्प के बाद आई स्थिति को मद्देनजर रखते हुए, हिमालिनी की महाप्रबन्धक कविता दास से हुई बातचीत का सम्पादित अंश
० आप अपने काँलेज के विषय में कुछ बताएँ ?
– पेन्टागन कालेज आज से ६ वर्ष पहले २००९ में स्थापित किया गया । स्थापित करने का मुख्य कारण अपने ही देश में गुणस्तरीय शिक्षा देना है । इस क्षेत्र मे लगे अनुभवी शिक्षक, प्रोफेसर, लेक्चर को लेकर और उन लोगों को ही प्रोमोटर बना कर हमलोगो ने इस कां‘लेज की शुरुआत की है । इन ६ वर्षों में हमने जो सोचा था कुछ हद तक वह पूरा भी हुआ है । हमारे कॉलेज से जो भी छात्र पढ़ कर निकले हैं आज वह डाक्टर, इंजीनियर, चार्टर अकाउंटेंट बने हुए हंै । और भी बहुत सारे क्षेत्र में यहाँ के छात्र  अच्छा कर रहे हैं । आज तक हमलोगाें के कॉलेज से करीब ३०० से ज्यादा विद्यार्थी डाक्टर, ५०० से ज्यादा इंजीनियर, १५० से ज्यादा चार्टर अकाउँटेंट क्षेत्र में अपना सपना पूरा कर चुके हैं । जिस से हम भी बहुत खुश हंै और यह आगे भी जारी रखने की हमारी पूरी कोशिश रहेगी । हम विश्वस्तरीय शिक्षा अपने देश में ही देना चाहते हैंंंंंंं ।
० आपके कलेज की शिक्षण पद्धति क्या है ?

– आजकल आधुनिक पद्धति के द्वारा शिक्षा प्रदान की जा रही है । हमारी भी यही कोशिश है कि हम आधुनिक पद्धति के द्वारा अपने छात्रों को हर क्षेत्र में निपुण करें ।  इसलिए  हमलोग भी वैसी ही शिक्षा दे रहे हैं जिससे छात्र हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना सके । हम अभी आडियो विजुअल के द्वारा भी छात्रों को जोड़ रहे हैं । इसके द्वारा अध्ययन करने से विद्यार्थी अच्छी तरह से समझ जाते हैं और उन्हें इसमें पूरी तरह से संतोष हो रहा है ।
० शिक्षा को गुणस्तरीय बनाने के लिए आपकी क्या नीति है ?
– शिक्षा को गुणस्तरीय बनाने के लिए हमलोगो ने अच्छा भौतिक पूर्वाधार बनाया है । योग्य शिक्षक, अच्छी शिक्षण प्रौद्योयोगिकी (टीचिंग टेक्नोलाँजी) का पूरी तरह से उपयोग किया है । इनसब चीजों पर हमलोगो ने पूरा ध्यान दिया है । यह हमारी कोशिश है की हम गुणात्मक शिक्षा दे । हमारा नारा ही था “क्वालिटी एजुकेशन इन क्वालिटी शेट्टिंग” ।
० आप के कॉलेज में कुल मिला कर कितने विद्यार्थी और शिक्षक हैं ?  शिक्षक का चुनाव आप कैसे करते हैं ?
– हमारे कॉलेज में करब २२०० विद्यार्थी हंै और शिक्षक २५० हैं । शिक्षक का चुनाब हमलोग तीन स्टेप में करते हैं । पहले सम्पूर्ण अन्तरबार्ता होती है । फिर क्लास प्रदर्शन करना पड़ता है जो की हमारे कॉलेज के विशेषज्ञ शिक्षक द्वारा लिया जाता है फिर विद्यार्थी के आगे डेमो देना पड़ता है । जो इसे पूरा करता है वह पेंटागन के परिवार में शामिल हो जाता है ।
० क्या पेन्टागन भवन पर भी इस महाभूकम्प का असर पड़ा है ? क्या यहां  विद्यार्थी सुरक्षित हैं ?
– स्ट्रक्चर में उतनी क्षति तो नहीं पहुँची है पर जो इक्वीपमेन्ट है जैसे स्टेशनरी सामान में क्षति पहुँची है । पर भवन में भूकम्प का उतना असर नहीं है इसलिए विद्यार्थी सुरक्षित हैं ।
० महाभूकम्प से विद्यार्थी में जो त्रास घर कर गई है । उस डर को निकालने के लिए आप कैसी नीति अपना रहे हैं ?
– भूकम्प से वाकई में सभी त्रसित हैं ।  विशेष कर विद्यार्थियों में अत्यन्त डर व्याप्त हो गया है । इसलिए हम मनोवैज्ञानिक तरीके से छात्रमें के अन्दर से डर निकालने की कोशिश कर रहे हैं ।  हम लोग मनोविज्ञान के लेक्चरर और विशेषज्ञ को बुलाकर विद्यार्थी को काउन्सलिङ देंगें । जिससे विद्यार्थी को ये भय ना हो कि वो  असुरक्षित हैं ।
० ११ और १२वीं की परीक्षा चल रही है । ऐसे में विद्यार्थी के डर का कुछ असर पड़ेगा ?
– देखिये इस भूकम्प ने बहुत डर दे दिया है इसका कोई विकल्प नहीं है । इस परीक्षा को अगर आगे बढ़ाया गया तो विद्यार्थिंयो का एक साल बर्बाद हो जाता । इसलिए परीक्षा होनी जरुरी थी । बच्चे हमेशा तैयार रहते हैं । और वह अच्छा करेंगे । ऐसा हमारा विश्वास है ।
० अंत में, महाभूकम्प के बाद सरकार से शिक्षा–प्रणाली में क्या अपेक्षा रखते हैं ?
– कुछ खास नीति नहीं आयी है सरकार की तरफ से । सरकार अभी खुद पूरी तरह से सम्भल नहीं पाई है । इतनी क्षति हुई है की अधिकांश मन्त्रालय, विभाग, सरकारी निकाय सभी क्षतिग्रस्त हैं । सरकार भी पलक झपकते ही सबकुछ ठीक तो नहीं कर सकती है । कोइ जादू की छड़ी तो नहीं है न उनके पास । इस वास्तविकता को समझना होगा । सरकार को अभी अर्थनीति और शिक्षानीति पर ध्यान देना होगा । नेपाल में स्रोत प्रशस्त नहीं है बाहर से भी सहयोग लेना होगा । और उसे ठीक तरीके से चलाने के लिए अच्छे म्यानेजमेन्ट की जरुरत है । अगर हम शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान नहीं देते हैं तो एकाएक पीछे चले जाएँगें । इसे निरन्तरता तो देनी ही पड़ेगी । अंत मे मै यह कहना चाहता हूँ कि ये प्राकृतिक विपदा है । हम सबको सब्र करना पड़ेगा । जीवन कभी रुकती नहीं आगे बढ़ती जाती है । इन सभी अवस्था को देख कर भविष्य में ऐसी विपदा आए तो हमलोग पूरी तरह से तैयार रहें और ज्यादा से ज्यादा क्षति न हो इसकी व्यवस्था अभी से करें ।

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