हमें पुल बनना चाहिए था, लेकिन पहाड़ बन जाते हैं : मिथिलेश कुमार सिंह

 मिथिलेश कुमार सिंह, काठमांडू , ३१ जनवरी | सन्दर्भः भारत के ६८वें गणतन्त्र दिवस
भारत के साथ हमारा शाश्वत सम्बन्ध है । यह सम्बन्ध सदियों से रहा है और बढ़ता ही जाएग । इसको कोई भी शक्ति कम नहीं कर सकती है । जहाँ तक रही बात इस संबंध को और प्रगाढ़ बनाने की, तो मेरे ख्याल से नेपाल और भारत के बीच में पुल बनना पड़ेगा । जबकि नेपाल के लोग पुल बनने के बजाय पहाड़ बन जाते हैं । वायें देखते हैं तो सिर्फ पहाड़ दिखाई पड़ता है । दायें दिखते हैंं, तो चारों तरफ पहाड़ दिखाई देता है । इसलिए ये लोग पहाड़ बन जाते हैं । जबकि पुल बनाना चाहिए था ।
Mithilesh Kumar sing
भारत की हर जनता रोटी में घी लगाकर नहीं खाती है, घी के साथ स्वतन्त्रता खाती हैं जो अधिक स्वादिष्ट होता है । नेपाल में गणतन्त्र आ गया है, आज इस अवसर पर नेपाल की जनता भी रोटी के साथ घी नहीं खाती है, लेकिन स्वतन्त्रता खाती हैं, जो घी से भी अधिक स्वादिष्ट होता है । दोनों देशों की मित्रता अवश्य आगे बढ़ेगी । इसे कोई भी शक्ति कमजोर नहीं कर सकती है और तोड़ भी नहीं सकती है । हमें पुल बनना चाहिए था, जबकि पहाड़ बन जाते हैं । उम्मीद है कि आनेवाले दिन में पुल बनने वाली शिक्षा का विकास होगा ।
(मिथिलेश कुमार सिंह सर्वोच्च अदालत के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं ।)
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