हम अन्धराष्ट्रवाद से मुक्त होना चाहते हैं

राजनीतिक वृत्त में नया शक्ति और डा. बाबुराम भट्टराई को लेकर बहस करने वालों की कमी नहीं है । कुछ हप्ता पहले ही डा. भट्टराई के संयोजकत्व में ‘नयाँ शक्ति पार्टी, नेपाल’ नामक पार्टी की घोषणा हुई है । उसके बाद बहस और तीव्र हो रही है । सकारात्मक एवं नकारात्मक कोण से हो रहे इस तरह की बहस अपनी जगह है । लेकिन नया शक्ति ने अपना अभियान जारी रखा है । पिछली बार नया शक्ति ने पार्टी अन्तर्गत के विभिन्न विभागों का गठन करके उसका संयोजक एवं कुछ पदाधिकारी भी चयन किया है । इसी क्रम में नया शक्ति के लिए प्रदेश नं. ३ के संयोजक चयनित हुए हैं, गंगा श्रेष्ठ । मूलतः आर्थिक सम्वृद्धि का नारा आगे ला कर गठित नया शक्ति नेपाल, वास्तव में ही नया शक्ति कैसे बन सकता है ? साथ में नया शक्ति की आवश्यकता, आधार और समसामयिक राजनीति के बारे में हिमालिनी सम्वाददाता लीलानाथ गौतम ने नेता श्रेष्ठ के साथ बातचीत की है, प्रस्तुत है, बातचीत का सम्पादित अंश–

गंगा श्रेष्ठ, नेता, नया शक्ति नेपाल

गंगा श्रेष्ठ, नेता, नया शक्ति नेपाल

० नया शक्ति नेपाल अभी क्या कर रहा है ?
– हम लोगों ने पार्टी स्थापना, राष्ट्रीय समारोह भव्य और ऐतिहासिक रूप में सम्पन्न किया है । कुछ पहले ही केन्द्रीय कार्यकारी समिति की बैठक भी सम्पन्न हो चुकी है । अब हम लोग संगठन निर्माण और विस्तार में केन्द्रित हो रहे हैं ।
० पार्टी गठन हो चुकी है, अब कैसे इस पार्टी को सही रूप में, नया शक्ति बनाते हैं, कुछ आधार ?
–नया शक्ति निर्माण के लिए पहला आधार प्रस्तावित समुन्नत समाजवाद उन्मुख वाम लोकतान्त्रिक विचार ही है । ‘बाजार ही सब चीज हैं’, कहनेवाले नवउदारवाद और ‘राज्य ही अन्तिम सत्य’ कहने वाले साम्यवाद का युग अब समाप्त हो चुका है, यह विचारधारा असफल हो चुकी है । आज का विकल्प बाजार और राज्य की भूमिका को सन्तुलित बनाना है । जंगल को देखते वक्त पौधे को नहीं देखना और पौधे को देखते वक्त जंगल भूल जाना, अब ऐसी गलती करना ठीक नहीं है । विगत में कुछ इस तरह की कमजोरी भी हुआ करती था, अब हम उस को सही करना चाहते हैं ।
दूसरा आधार, समतामूलक समृद्धि है । लगभग ८० साल से हम लोग लोकतान्त्रिक लड़ाईं लड़ते आए हैं । जिसके चलते हम लोगों ने गणतन्त्र, संघीयता, समावेशी समानुपातिकता और धर्म निरपेक्षता प्राप्त कर लिया है । संविधानसभा से संविधान घोषणा होने के वाद जनता को राजनीतिक अधिकार आधारभूत रूप में प्राप्त हो चुका है । अर्थात् एक युग समाप्त हो कर अब मुल्क दूसरे युग में प्रवेश कर रहा है । आज का युग निर्माण और समृद्धि का है । जनता के बलिदानीपूर्ण संघर्ष से प्राप्त उपलब्धि की रक्षा, आर्थिक समृद्धि के बिना संभव नहीं है ।
तीसरा आधार समानुपातिक÷समावेशी÷सहभगितामूलक लोकतन्त्र का है । हम लोगों ने नयाँ शक्ति पार्टी की स्थापना से ही सहभागितामूलक लोकतन्त्र का अभ्यास किया है । कोई भी राजनीतिक पार्टी गठन होने से पहले उसके साथ एक लाख से ज्यादा सदस्य नहीं होते, लेकिन हम लोगों ने एक लाख से ज्यादा लोगों को सामुहिक शपथग्रहण कराकर पार्टी स्थापना की है । शायद संसार के लिए भी यह पहला प्रयोग हो सकता है । हमारी पार्टी में पूर्णरूप में समानुपातिक÷समावेशी÷सहभगितामूलक लोकतन्त्र लागू हो रहा है । इसी कारण हमने तीन क्लस्टर को अवधारणा के रूप में ही आगे लाया है । सिर्फ अवधारणा ही नहीं, पार्टी के केन्द्रीय कार्यकारी समिति में तीन क्लस्टर से एक–एक सह–संयोजक बनाकर नीति को इमानदारीपूर्वक कार्यान्वयन किया है । नया शक्ति प्रतिनिधिमूलक लोकतन्त्र में नहीं, सहभगितामूलक लोकतन्त्र में विश्वास करता है । इसका पूर्ण प्रयोग हम लोग महाधिवेशन तक कर पाएंगे ।
चौथा आधार, स्वाधीनता है । नेपाल सार्वभौमसत्ता सम्पन्न स्वाधीन राष्ट्र है । हमारे दो पड़ोसी मुल्क भौगोलिक दृष्टिकोण से महादेशीय आकार के हैं । आर्थिक रूप में भी वे विश्व के लिए नेतृत्वदायी प्रतिस्पर्धा में आ रहे हैं । सकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाए तो यह हमारे लिए बहुत बड़ा अवसर है और नकारात्मक दृष्टिकोण से देखा जाए तो चुनौती भी हैं । अवसर और चुनौती एक ही सिक्के के दो पहलू हैं । हम लोग सामन्ती अन्धराष्ट्रवाद से मुक्ति चाहते हैं और प्रगतिशील राष्ट्रवाद का प्रयोग करना चाहते हैं । नेपाल को हम लोग दो पत्थरों का तरुल नहीं, दो शक्तिशाली पड़ोसी मुल्कों के लिए गतिशील पुल बनाना चाहते हैं ।
पाँचवा आधार, सुशासन और सदाचार है । हम लोग राजनीति को पेशा÷व्यवसाय नहीं, मिसन बनाना चाहते हैं । हम पार्टी के सम्पूर्ण अभियन्ता को उत्पादनमुखी और सदाचारी बनाना चाहते हैं । उसके लिए हमने लोकपाल और सदाचार आयोग भी बनाए हैं । राजनीतिक पार्टी के लिए यह नया प्रयोग भी है । भ्रष्टाचार राज्य के हर अंग में कैंन्सर की तरह फैल रहा है । इसको अन्त किए बगैर सुशासन संभव नहीं है । इसीलिए भ्रष्टाचार विरोधी अभियान देशव्यापी रूप में चलाने का कार्यक्रम तय कर चुके हैं ।
जो कहते हैं, वह करते हैं । हम लोग जनता को बेवकूफ बनाना नहीं चाहते है । हम लोगों ने स्पष्ट कहा है– ‘अब की निकास, आर्थिक विकास’ । इस नारा में आम जनता भी आकर्षित हो रहे हैं । जनता का यह आकर्षण और ऊपर उल्लेखित हमारी प्रतिबद्धता ही नया शक्ति बनने का आधार है ।
० सिर्फ नारा से तो कुछ होनेवाला नहीं है । नया शक्ति नेपाल वास्तव में ही आर्थिक क्रान्ति का सम्वाहक है, इस तथ्य को प्रमाणित करने के लिए आप लोग क्या करते हैं ?
– हाँ, सिर्फ नारों से काम बनने वाला नहीं है । हम लोग काम करना चाहते हैं । उसके लिए सबसे पहले तो भिजन चाहिए । हम लोग भिजन निर्माण के चरण में हैं । प्रारम्भिक भिजन “आर्थिक समृद्धि का मार्गचित्र” नाम देकर दस्तावेज के रूप में जनस्तर में आया है, जिस में हम लोग सार्वजनिक बहस कर रहे हैं । महाधिवेशन तक इस में हम लोग खुला बहस करेंगे । उसके वाद ठोस दस्तावेज तैयार होगा । प्रारम्भिक भिजन के रूप में आगामी सात साल के अन्दर नेपाल को अधारभूत में बेरोजगारमुक्त देश बनाना है, पन्द्रह साल के भीतर मध्यम स्तर का अमीर देश बनाना है और पचीस–तीस साल के भीतर समुन्नत और समृद्ध देश बनाने का लक्ष्य हम लोगों ने रखा है ।
० रोजगार के लिए लाखों युवा विदेश पलायन हो रहे हैं । उन लोगों को स्वदेश में ही रोजगारी देने के लिए आर्थिक सम्वृद्धि अनिवार्य है । इसके लिए क्या–क्या करेंगे ? ऐसी कोई योजना नहीं है ?
– हाँ, है । हम लोगों ने हवा में गोली नहीं चलाई है । इसके लिए हमारे पास ठोस आधार भी है । उदाहरण के लिए पहला आधार वैज्ञानिक और वस्तुवादी कार्ययोजना है । हम लोगों ने तत्कालीन, मध्यकालीन और दीर्घकालीन कार्ययोजना का प्रारुप तैयार किया है । महाधिवेशन तक यह कार्ययोजना ठोस और मूर्त रूप में बाहर आएगा ।
दूसार आधार, उत्पादनयोग्य जनशक्ति है । हमारे देश में १६ से ४० साल उमर समूह की जनसंख्या ४०.३५ प्रतिशत हैं । यह हमारे लिए एक बड़ा अवसर भी है । आर्थिक समृद्धि के लिए इस अवसर का भरपूर उपयोग करना होगा । सरकारी तथ्यांक को देखे तो ३८ लाख युवा रोजगार के लिए विदेश पलायन हो गए हैं । हमारे यहा“ राजनीतिक क्रान्ति और परिवर्तन ने निरन्तरता पाया है, लेकिन आर्थिक अवस्था दिन ब दिन खराब होती जा रही है । विगत पचीस साल की औसत आर्थिक वृद्धिदर देखा जाए तो पा“च प्रतिशत से भी कम है । अब देश में ही रोजगारी सृजना कर युवाओं को विदेश पलायन होने से रोकना होगा ।
तीसरा आधार प्राकृतिक श्रोत–साधन है । देश के भीतर ही रहे जल, जमीन, जंगल, जड़ीबुटी आदि को सही परिचालन करेंगे तो हम लोग देश का कायापलट कर सकते हैं । प्राकृतिक श्रोत–साधन की प्रचुरता को देखे तों नेपाल विश्व में ही दसवें देश के भीतर पड़ता है ।
चौथा आधार, भिजन, ईमान्दारी और प्रतिबद्धता सहित का कुशल नेतृत्व है । नेपाल के समकालीन नेताओं में से डा. बाबुराम भट्टराई ही इन सभी विशेषताओं से पूर्ण नेता हैं । उनके नेतृत्व में नेपाल में नेतृत्वदायी भूमिका निर्वाह करनेवाला एक सशक्त टीम भी निर्माण हो रहा है । अर्थमन्त्री और प्रधानमन्त्री के कार्यकाल में उन्होंने जो कुछ किया, उसे भी इस बात को प्रमाणित करता है ।
० माओवाद में विश्वास करनेवाले पूर्वसहकर्मी लोग आप लोगों को पलायनवादी भी कह रहे हैं । इधर आप लोग कहते हैं कि हम लोगों ने आधारभूत रूप में कम्युनिष्ट दर्शन को नहीं छोड़ा है । वास्तविकता क्या है ?
– पहली बात तो हम लोग कोई भी दर्शन के लिए दास नहीं हैं और कोई भी वाद का बन्दी नहीं बन सकते है । विचार–दर्शन मानव जीवन के लिए हैं, विचार–दर्शन के लिए मानव जीवन नहीं हैं । तसर्थ, कोई भी दर्शन और वाद को पकड़ने या छोड़ने का सवाल ही पैदा नहीं होता । मानव समाज में वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित विचार और दर्शन को हम लोग बिना पूर्वाग्रह और बिना संकीर्णता स्वीकार करते हैं और समयानुकूल न रहनेवाले विचार और दर्शन को हम लोग हिम्मत के साथ त्याग सकते हैं ।
० नया शक्ति, कम्युनिष्ट पार्टी रहेगा या नहीं,आप लोगों के बीच इसमें तो विवाद है न ?
– विवाद नहीं, बहस है । विवाद और बहस दो अलग पक्ष हंै । बीते हुए कल में जब हम लोग माओवादी पार्टी में थे, उस समय जो विचार और दर्शन का जग में काम किए हैं, वह भी उस समय के लिए अधारभूत रूप में ठीक ही था । लेकिन आज समाज बदल चुका है, हर मानव की चेतना, चाहना और आवश्यक्ता भी बदल गयी है । तसर्थ, हमारे विचार, दर्शन और कार्यक्रम भी परिवर्तित होना चाहिए, इसका विकल्प नहीं है । जो अपने को परिवर्तन करने के लिए तैयार नहीं है, वह डायनासोर की नियति भोगने के लिए बाध्य हो जाएंगे ।
हम लोग द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद को मानते हैं । इस बात को हम लोगों ने नहीं छुपाया है । द्वन्द्वात्मक भौतिकवाद मानव समाज में पिछली बार विकसित सबसे आधुनिक समाज–विज्ञान है । द्वन्द्ववाद गति का नियम है, परिवर्तन का विज्ञान है । यह हरदम यथास्थितिवाद का विरोध ही करता है । भौतिकवाद कहने का मतलव दृश्य वस्तु को आधारभूत रूप में सत्य मानने का सिद्धान्त है । आज विज्ञान, अपने जगह जितना भी विकसित हुआ है,उसका पूर्वाधार भौतिकवाद ही है । दार्शनिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो भौतिकवाद का विपरित ध्रुव में रहनेवाला दर्शन अध्यात्मवाद है । अध्यात्मवाद, भाग्यवाद में विश्वास करता है । यह पूर्वजन्म और पुनर्जन्म में विश्वास रखता है । हम लोग दूसरे जन्म में नही, इसी जीवन को ही विश्वास करते हैं । अब आप ही बताइए हम लोग कम्युनिष्ट है कि पूँजीवादी ?
० नया शक्ति ने स्वास्थ्य और योग साधना के लिए एक अलग ही विभाग बनाया है । योग साधना के लिए तो कोई अध्यात्मिक÷योग गुरु की ही आवश्यकता पड़ सकती है । भौतिकवादी लोग इसको कैसे सहर्ष स्वीकार कर लेंगे ?
– अध्यात्मवादी और आध्यात्मिक (स्प्रिच्युअल) होना दो अलग बात है । अध्यात्मवादी होने का मतलव भाग्यवादी होना है । इसको हम अस्वीकार करते हैं । लेकिन पूर्वीय दर्शन ने जिस तरह योग–साधना और मनो–साधना का विकास किया है, वह विज्ञान है और यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ विषय भी है । योग–साधना के माध्यम से हम लोग अपने शरीर और मन को स्वस्थ कर सकते हैं, यह बात तो प्रमाणित हो चुकी है । इसीलिए योग–साधना विभाग ही बना कर हम लोग काम कर रहे हैं ।
० योग–साधना के एक अलग ही विभाग बनाने के सवाल में मनोक्रान्ति अभियन्ता एवं योगगुरु विकाशानन्द हावी हुए हैं, ऐसा कहनेवाले भी मिलते हैं । क्या ऐसा ही है ?
– नहीं । हम लोगों ने ही विकाशानन्द को नया शक्ति में आने के लिए अनुरोध किएं किया था । योग–साधना में उन्होेंने नेपाल में एक महत्वपूर्ण योगदान दिया है । इस दृष्टिकोण से सिर्फ नया शक्ति का समर्थकों के लिए ही नहीं, सभी का जीवन स्वस्थ बनाने के लिए उनकी भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है । इस विभाग सिर्फ अभियन्ता और कार्यकर्ता के बीच ही नहीं, आम जनता के बीच काम करेगा । इसको हम लोग एक सांस्कृतिक अभियान के रूप में विकास करना चाहते हैं । यह कोई भाग्यवाद और अन्धविश्वास से जुड़ी हुई चीज नहीं है ।
० नयाँ शक्ति में पूर्वमाओवादी ही हावी हो रहे हंै, ऐसी बात भी आ रही है, वास्तविकता क्या है ?
– यह सत्य नहीं है । पृष्ठभूमि की दृष्टिकोण से नया शक्ति, तीन–पृष्ठभूमियों का सम्मिलन हंै । जहाँ पूर्वमाओवादी, गैरमाओवादी और स्वतन्त्र पृष्ठभूमि के लोग हैं और नया शक्ति कल की कोई एक पार्टी की निरन्तरता भी नहीं है । बीते हुए दिन में हर कोई के पास अपने–अपने लिगेसी थे, आज वह सब परित्याग कर नितान्त नये जग में यह पार्टी निर्माण हुई है । इसीलिए यहाँ कोई किसी के ऊपर हावी नहीं है । हम सब बराबर हैं ।
० जातीय और क्षेत्रीय मुद्दा के कारण राजनीति विकृति हो गयी है, ऐसी बात भी होती है । आप लोग भी उसी विकृति का एक हिस्सा तो नहीं बन जाएंगे ?
– पहली बात, जातीय और क्षेत्रीय मुद्दा के बीच में रहे अन्तर को जनता को समझाने के लिए हम लोग कुछ हद तक असफल भी हो गए हैं, जिसके चलते जनता में भ्रम सिर्जना हो गयी है । दूसरी बात, जनता को अधिकार सम्पन्न बनाने के लिए जो शक्ति तैयार नहीं है, वह नियतवश ही जनता में भ्रम की खेती कर रहे हैं । हम लोगों ने जो जातियों का मुद्दा लिया है, यह कोई भी कास्ट (थर) की बात नहीं है । हम तो राष्ट्र और राष्ट्रीयता की बात करते हैं । साझा भूगोल, भाषा, मनोविज्ञान और अपने ही आर्थिक इकाई जिसके पास होता है, वह राष्ट्र है । इसीलिए तो संविधान में ही नेपाल को बहुभाषी, बहुराष्ट्रीयता, बहुधार्मिक और बहुसाँस्कृतिक मुल्क के रूप में स्वीकार किया गया है । जो सिद्धान्त में स्वीकार किया गया है, अब व्यवहार में उसको कैसे बहिष्कार किया जाएगा ? जब तक नेपाल को इन्द्रधनुषी राष्ट्रीय राज्य नहीं बना पाएंगे, तब तक नेपाल में शान्ति कायम नहीं हो पाएगी । शान्ति बिना समृद्धि मृगमरिचिका ही है । तसर्थ गम्भीरतापूर्वक जातीय और क्षेत्रीय मुद्दा का सम्बोधन होना चाहिए । इस में हम लोग भी संघर्षरत हैं, जब तक इसका सही सम्बोधन नहीं होगा, तब तक संघर्ष जारी रहेगा ।
० आप लोगों ने कहा था– पार्टी के भीतर सभी पदाधिकारी निर्वाचित हो जाएंगे । इस समय आप ३ नम्बर प्रदेश के लिए संयोजक चयनित हुए हैं । क्या आप को निर्वाचित होना नहीं पड़ेगा ?
– अभी हम लोग संक्रमणकाल में हैं । हमारे विधान में संक्रमणकालीन व्यवस्था भी है । विधान में व्यवस्था होने के कारण ही मैं तीन नम्बर प्रदेश के लिए संयोजक बना हूँ । हमारी योजना है– वडा से ही सिर्फ पदाधिकारी ही नहीं, कमिटी भी निर्वाचित हों । नया शक्ति पार्टी में ‘टिके प्रथा’ का कोई भी गुञ्जाइस नहीं है । सभी को निर्वाचित होना पड़ता है ।
० नया शक्ति में केन्द्रीय पदाधिकारी कितने रहेंगे और कैसे निर्वाचित होंगे ?
– केन्द्रीय पदाधिकारी में एक अध्यक्ष, एक महासचिव, एक कोषाध्यक्ष, पाँच उपाध्यक्ष और पाँच सचिव का प्रस्ताव किए हैं । अध्यक्ष और महासचिव के लिए सभी क्लस्टर के लोग उम्मीदवारी दे सकते हैं और पार्टी के सम्पूर्ण सदस्य मतदाता होते हैं । उपाध्यक्ष और सचिव में पाँच क्लस्टर में से एक–एक व्यक्ति निर्वाचित होने की व्यवस्था हैं । उसके लिए सिर्फ अपने–अपने क्लस्टर के उम्मीदवारों के बीच प्रतिस्पर्धा होती है, लेकिन मतदाता पूरे देश के होते हैं । केन्द्रीय सदस्य, प्रदेश से निर्वाचित होकर आएंगे । सिर्फ नया शक्ति पार्टी में ही नहीं, राज्य में भी प्रत्यक्ष निर्वाचित कार्यकारी प्रमुख के पक्ष में हैं हम ।
० संक्रमणकाल कब तक रहेगा ?
– ज्यादा से ज्यादा एक साल तक ।
० अलग प्रसंग, वर्तमान राजनीति और सत्ता के प्रति मधेशवादी और जनजाति समूह असन्तुष्ट दिखाई देते हैं, कारण क्या है ? नया शक्ति इसको कैसे सम्बोधन करती है ?
– मुख्यतः संविधान की ही बात आती है, जहाँ कई अच्छे प्रावधान होते हुए भी मधेसी, आदिवासी जनजाति, महिला, दलित, अलपसंख्यक समुदायों की माँग सुनिश्चित नही हो पायी । इसलिए हम लोगों ने भी कहा है कि यह संविधान अधूरा है, आधा भरा हुआ गिलास है और आधा खाली हैं । सरकारी तरफ से आन्दोलनरत जनता की जायज मांग को बिना बहाना सम्बोधन करना चाहिए । लेकिन, वर्तमान सरकार जनता के ऊपर छल, षड्यन्त्र और बल प्रयोग में लगी है । दूसरी तरफ, कुछ व्यक्ति मधेश आन्दोलन के नाम में विखण्डन का प्रयत्न भी कर रहे हैं । यह स्वीकार्य नहीं हो सकता ।
० मधेशी मोर्चा ने तो पूर्व से लेकर पश्चिम तक के तराई भू–भाग में सिर्फ दो ही प्रदेश की मांग की है । इस मांग को नाजायज कहकर विरोध करनेवाले भी है । नया शक्ति इसको कैसे लेता है ?
– पहले संविधानसभा द्वारा निर्मित राज्य पुनरसंरचना आयोग ने मधेश में दो ही प्रदेश का प्रस्ताव किया था । उस समय में भी पूर्व और पश्चिम के कुछ जिले को लेकर विवाद हुआ था । इस विवाद को मिला कर आयोग की प्रतिवेदन के आधार में ही सीमांकन किया गया होता तो आज यह नौबत ही नहीं आती ।
० मधेशियों के ऊपर अन्याय होने की बात भी आती रहती है, क्या अवस्था ऐसी ही है ?
– हाँ, इतिहास में उन लोगों के साथ बहुत अन्याय हुआ है, वर्तमान में भी अन्याय हो रहा है । इसीलिए तो मधेस आन्दोलित है । चमड़े के रंग, भाषा, संस्कृति मिलने से मधेशियों को बिहारी कहा जाता है, यह गलत है । मधेश नेपाल है, मधेसी जनता नेपाली हैं । नेपाल का परिचय ही मधेस, पहाड और हिमाल है ।
० मधेश को जोड़ कर अथवा अलग रख कर भी, नेपाल–भारत सम्बन्धों के विषय में बहस किया जाता है । अभी भी यह बहस जारी है, कहा जाता है कि भारत के साथ हमारे सम्बन्ध बिगड़ गए हैं । नया शक्ति, भारत–सम्बन्ध को कैसे सुधार करेगी ?
– सिर्फ भारत के साथ ही नहीं, हर मुल्क के साथ सुमधुर सम्बन्ध रहना चाहिए । नया शक्ति भी पञ्चशील के सिद्धान्त को आधार मानकर भारत सहित अन्य देशों के साथ सम्बन्ध रखना चाहता है । हमारे लिए कोई नजदीक और कोई दूर नहीं है । हमारी राष्ट्रीय हित को सर्वोपरी मानते हुए पड़ोसियों के साथ समदूरी का व्यवहार करना चाहते हैं ।
० अभी कहा जा रहा है कि नेपाल–भारत सम्बन्ध में कुछ दरार पैदा हो गयी, इसके बारे में क्या खयाल है ?
– सत्ताधारी दलों के कुछ नेताओं की अभिव्यक्ति में काफी बचकानापन दिखाई देता है । एक पड़ोसी के विरुद्ध दूसरे पड़ोसी का ‘कार्ड’ प्रयोग करने का प्रयास हुआ है । कोई भी पड़ोसी के साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया जाता । सत्ताधारी दलो के नेताओं में ‘मण्डले राष्ट्रवाद’ का भूत अभी भी सवार हो रहा है । जनता की भावना को भटका कर वे लोग ‘वोट बैंक’ बढ़ाना चाहते हैं ।
० नयाँ शक्ति तो कहता है कि राष्ट्रीयता सम्बन्धी पुरानी मान्यताओं को पुनः परिभाषित करना चाहिए, इसका मतलब क्या है ?
– हाँ, हम लोग प्रगतिशील राष्ट्रवाद का पक्षपोषण करते हैं । आज भी १९वीं शताब्दी की राष्ट्रवादी परिभाषा काम कर रही है, यह समय–सान्दर्भिक नहीं हो सकता । हम, हमारे सार्वभौम सत्ता को अक्षुण्ण रखते हुए और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरी मानते हुए आर्थिक रूप में आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं । हम, हमारे दोनों पड़ोसियों से सुमधुर सम्बन्ध रखना चाहते हैं । हमारे दोनों पड़ोसी मुल्क अभी तीव्र आर्थिक विकास की ओर जा रहे हैं । इन दोनों से हम कैसे लाभ ले सकते हैं ? हमारे लिए यह सोचनीय विषय है । पृथ्वीनारायण शाह ने नेपाल को परिभाषित करते हुए कहा है– ‘नेपाल दो पत्थरों के बीच में रहे तरुल है ।’ यह परिभाषा आज के लिए उपर्युक्त नहीं है । यह परिभाषा हमारे मन में त्रास का मनोविज्ञान निर्माण करता है । लगता है– हम लोग नहीं फैल सकते हैं । हमारी आर्थिक समृद्धि में भी यह परिभाषा नकारात्मक प्रभाव डालता है । अब हम नेपाल को दोनों पड़ोसियों के बीच गतिशील पुल बनना चाहते हैं ।
० ऐसा है तो नेपाल–भारत सम्बन्ध को लेकर क्यों विवाद होता रहता है ?
– इसके कई कारण है । पहली बात तो हमारी गरीबी ही है । भारत के प्रति हमारी जो परनिर्भरता हैं, जब तक हमें उससे मुक्ति नहीं मिलेगी, तब तक इस समस्या का बार–बार सामना करना पड़ सकता है । इसलिए तो हम लोग आर्थिक समृद्धि की बात कर रहे हैं । दूसरी बात, हमारी सीमा खुली है । सामाजिक, सांस्कृतिक सम्बन्ध के कारण इस सीमा में वाल भी नहीं लगा सकते हैं । हमारी भौगोलिक बनावट के कारण भी चीन के बदले हम भारत के साथ ही बन्द–व्यापार करने के लिए बाध्य हैं । हमारी वाध्यता को समझकर सहयोगी बनने से ज्यादा उससे कैसे फायदा लिया जाए, यह प्रवृत्ति भी हावी हो रही है । हमारे लिए यह दुःख की बात है ।
० भारत, नेपाल को हरदम हेय की दृष्टि से देखता है, ऐसा कहनेवाले भी हैं, नहीं ?
– भौगोलिक रूप में नेपाल छोटा ही है, लेकिन यह सार्वभौमसत्ता सम्पन्न स्वतन्त्र मुल्क है । सार्बभौमसत्ता को मापन भूगोल की आधार में नही किया जाता । भूगोल जितना भी हो, सार्बभौमसत्ता सब की बराबर होती है । इस में एक–दूसरे को सम्मान करना चाहिए ।
० वर्तमान सरकार कह रही है कि आगामी मंसिर में निर्वाचन करना है, क्या यह सम्भव है?
–निर्वाचन के लिए सर्वप्रथम प्रदेश और स्थानीय निकायों की पुनरसंरचना होनी चाहिए । सरकार विभिन्न बहाना करके पुनरसंरचना सम्बन्धी काम को विलम्ब कर रहा है । आवश्यक कानून निर्माण में भी वह उदासीन है । इसी रबैया से मंसिर में चुनाव सम्भव नहीं है ।
० आगामी निर्वाचन के बाद नया शक्ति का पोजिसन क्या हो सकता है ?
– जनता विकल्प ढूढ रही है । जनता की मनोभावना के अनुसार ही हम लोगों ने नई वैचारिक धारा का निर्माण किया है । उक्त विचार के अनुसार अब संगठन निर्माण में लग गए हैं । पार्टी में संगठित होनेवालों की संख्या दिन दो गुणा और रात चौगुणा हो रही है । अभी हमारे साथ जनता का जो साथ और समर्थन प्राप्त हो रहा है, उसे देख कर दावा कर सकते हैं– आगामी निर्वाचन में नया शक्ति ही देश का प्रथम राजनीतिक शक्ति बन सकती है ।
० राजनीति में अभी हाल सरकार परिवर्तन की बहस भी हो रही है, नया शक्ति इसको कैसे लेती है ?
– इस में हमारी कोई दिलचस्पी नहीं है । ६–६ महीने या हर साल सरकार परिवर्तन करने का जो संस्कार बना है, हम उसके विपक्ष में हैं । ओलीसरकार को हटाकर कल और किसी के नेतृत्व में नयी सरकार बन सकती है । लेकिन उस सरकार से भी जनता में खास फर्क पड़नेवाला नहीं है । नेपाली में एककथन है, ‘कौवे के लिए बेल,न हर्ष न बिस्मात ।’ आज की आवश्यकता– कालाबजारी और भ्रष्टाचार नियन्त्रण करना है, देश में विद्यमान आर्थिक अवस्था को सुधार करना है, भूकम्प पीड़ितों की समस्या को सम्बोधन करना है । मधेशी–आदिवासी जनजाति द्वारा जारी आन्दोलन और उनकी मांगों को सम्बोधन करना है ।
० अन्त में कुछ कहेंगे ?
– नया शक्ति ने दो नाराओं को आगे लाया है । वह है–“परिवर्तन हमारी ही उमर में” और “अब का निकास, आर्थिक विकास ।” इसी नारा में आधारित रह कर नया शक्ति पार्टी निर्माण किया गया है । जब तक आम जनता का साथ–सहयोग हमारे इस अभियान को प्राप्त नहीं होता, तब तक हमारे सपने, विपनों में परिवर्तन होनेवाला नहीं है । इसीलिए नया शक्ति को नेतृत्वदायी भूमिका में पहुँचाने के लिए जनता का साथ और समर्थन आवश्यक है । हम चाहते हैं–परीक्षण करने के लिए ही सही, एक बार नया शक्ति को नेतृत्व में पहुँचाना होगा । मैं जनता से अनुरोध करता हूँ– इसके लिए हमें आप की जरुरत है ।

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