हम लाश लिए भटके दर दर दीया तुम्हारे पास जली।

डा.मुकेश झाIMG_20160831_144345
गुलजार चमन जो अत्याचार से गुलजार रहें हैं कितने दिन ?
जब तक  तूफानी सरगर्मी नही बस उतने दिन
बस उतने दिन उखड़ गए हैं शासक
शासन थे बड़े बड़े जो तानाशाह गिरा दिया गढ़
बड़े बड़े जब निकली मासूमों की आह
सत्ता शासक होश में आओ शक्ति पर ना इतराओ
मद में अन्धे मत बनो सुनो तुम जनमानस की आवाज
सुनो मारी गोली जिस छाती पर वो इक माँ का राजा बेटा था
इक बहन का प्यारा भैया था वह पत्नी के प्राण से प्यारा था।
ओ निर्दयी किस निर्दयिता से सर सीने छलनी कर डाले
राजनीति के दावँ पेच में कुछ चन्द रुपैये दे डाले।
उस दिन को कैसे भूले हम जब चिता हमारे पास जली
हम लाश लिए भटके दर दर दीया तुम्हारे पास जली।
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