हलेसी महादेव

halesi mahadevकाठमान्डू से २० से २५ घंटे की कष्टपर्ूण्ा यात्रा या फिर ३० मिनट की हवाई यात्रा कर के हलेसी महादेव स्थान पहुँचा जा सकता है । पर्यटन की अत्यधिक संभावना से भरपूर है नेपाल किन्तु सरकार की उदासीनता या सरंक्षण की कमी के कारण कई ऐसे क्षेत्र हैं जो संकटग्रस्त हैं तथापि दर्शनार्थियों और धर्मावलम्बियों की भीडÞ कठिनाइयों से जूझते हुए भी वहाँ तक पहुँचती हैं । ऐसी ही एक नैर्सर्गिक र्र्सौर्ंदर्य से भरपूर जगह है हलेसी महादेव स्थान, जो खोटांग जिला के रापुरी में अवस्थित है । प्राकृतिक सौर्ंदर्य का जीता जागता उदाहरण है खोटांग जिला, जिसके कण-कण में सौंर्न्दर्य का वास है । खोटांग समुद्री तल से १५२ से ३६२० की ऊँचाई पर अवस्थित है । मनोरम पर्वत श्रृंखला और जलश्रोत बरवस आपको अपनी ओर खींचते हैं । पर्वतों की चोटियों से अठखेलियाँ करते बादल के टुकडÞे और  उनकी ओट से झाँकता र्सर्ूय मन मस्तिष्क को सम्मोहित करने के लिए काफी हैं ।
हलेसी महादेव स्वनिर्मित गुफा में स्थित हैं । अपने विचित्र आकार-प्रकार की वजह से यह गुफा अनायास ही सबको आकषिर्त करती है । इस गुफा की बनावट को देखकर्रर् इश्वर की संरचना पर व्यक्ति विस्मित हो जाता है । कुछ क्षण तक इस की अजीबोगरीब बनावट को देखने में मन रम जाता है । गुफा में प्रवेश करने से पहले भगवान गणेश का मंदिर है, भक्तगण पहले यहाँ पूजा करते हैं, तत्पश्चात् गुफा के अन्दर प्रवेश करते हैं । भीतर जाने पर माँ पार्वती की प्रतिमा है उसके बाद गर्भगृह में भगवान शिव का २ फीट ऊँची शिवलिंग है, जो शिलानिर्मित है । गर्भगृह में प्रवेश करना कठिन नहीं है, नीचे उतरने के लिए सीढियाँ बनी हर्ुइ हैं । किन्तु दिन के भरपूर उजाले के बाद भी गुफा में पर्याप्त रोशनी की कमी होती है । बिजली की व्यवस्था होने के बाद भी आपर्ूर्ति नहीं होतLm इसकी वजह से भक्तजन और दर्शकों को गुफा अवलोकन में कठिनाई होती है । गुफा के अन्दर चमगादडÞो की ध्वनि और कबूतरों की गुटरगूँ एक संगीतमय वातावरण तैयार करता है, जो भक्तगणों का प्रवेश करते के साथ ही स्वागत करते हैं ।
गुफा के अन्दर शिवलिंग के अतिरिक्त पंचमुखी पशुपतिनाथ, गणेश, पार्वती और भगवती आदि कई देवी देवताओं की मर्ूर्तियाँ हैं । साथ ही प्रकृति द्वारा निर्मित कई अजीबोगरीब आकृतियाँ देखने को मिलती हैं जो किसी न किसी रूप का आभास कराती है । माना जाता है कि शिवलिंग के नीचे जलाशय है और शिवलिंग के ऊपर गौमुख आकार बना हुआ है, जिसके लिए किंवदंती है कि वह कामधेनु की आकृति है और प्राचीन काल में वहाँ से अविरल दुग्ध धार बहा करती थी । यहाँ की पूजा महंत मनोहर गिरी के पंचधर अविवाहित लडÞके पंचोपचार विधि से सुबह शाम किया करते हैं । विश्वास है कि यह मंदिर परापर्ूव काल से है किन्तु, इसकी विधिवत पूजा का प्रारम्भ राजा रणबहादुर द्वारा १८४० में गठित गुठी के द्वारा शुरु हर्ुइ है । यह क्षेत्र किराँत जनजाति बाहुल्य क्षेत्र है । इसलिए किरातों के द्वारा उनके पारम्परिक तौर तरीकों से भी यहाँ पूजा अर्चना की जाती है । उनके पारम्परिक वेशभूषा और नृत्यगान सभी का मन मोहते हैं ।
हलेसी गुफा के भीतर पत्थरों से निर्मित पाँच द्वार हैं, जिसे पाप और पुण्य के भाव से जोडÞकर देखा जाता है । माना जाता है कि जो इन सभी द्वारों से होकर निकल आते हैं वो पुण्यात्मा होते हैं । पहले दो द्वार तो भक्त आसानी से पार कर जाते हैं लेकिन उसके बाद यह आसान नहीं होता है । अंतिम द्वार र्स्वर्ग द्वार है जिसे पार करना सम्भव नहीं है । इस गुफा के बाद बसहा गुफा है, जिसका प्रवेश मार्ग संकरा है लेकिन आगे जाकर इसकी चौडर्Þाई बढÞ जाती है । इस गुफा में सिद्धि प्राप्त करने हेतु संत तपस्या करते हैं । गुफा के करीब ही बौद्ध धर्मावलम्बियों का गुम्बा है । हिन्दु धर्म और बौर्द्धधर्म के आपसी सहिष्णुता और ऐतिहासिक सम्बन्ध का परिचायक है यह स्थान । जितनी श्रद्धा से भक्त शिवलिंग की पूजा आराधना करते हैं, उतनी ही श्रद्धा से भगवान बुद्ध के चरणों में भी सर झुकाते हैं ।  यहाँ बौद्ध धर्म से जुडÞे शिक्षार्थी शिक्षा ग्रहण करने हेतु आते हैं । वातावरण उनके द्वारा उच्चारित मंत्रों से गुंजित होता रहता है । बौद्ध गुरु पद्मसम्भव ने यहीं तपस्या की थी और सिद्धि प्राप्त की थी । इसलिए इस जगह को मानवदिका कहा जाता है । यह एक तिब्बती शब्द है जिसका अर्थ होता है कुमार्ग से सुमार्ग की ओर, असत्य से सत्य की ओर, कठिन से सरल की ओर और अधर्म से धर्म की ओर ।
इतनी महत्ता को समेटे यह क्षेत्र संरक्षण की कमी के कारण असुरक्षित होता जा रहा है । गुफा के ऊपर वृक्षों की जडÞें फैलती जा रही हैं, जिसकी वजह से गुफा क्षत्रि्रस्त हो रहा है और प्रकाश की उचित व्यवस्था नहीं होने से कभी भी कोई दर्ुघटना होने की सम्भावना से इंकार नहीं किया जा सकता है । सम्बन्धित निकाय, मंदिर व्यवस्थापन और सरकार का ध्यान इस ओर जाना अत्यावश्यक है । -हि.सं.

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz