हाय रे राष्ट्रवाद ! गागर मे भरी हुई जल की तरह जहां, तहां छलक जाती है : बिम्मीशर्मा

बिम्मीशर्मा, काठमांडू , २२,सेप्टेम्बर |

हम नेपालवासियों के अन्दर राष्ट्रवाद कूट, कूट कर भरा है । अपने इसी राष्ट्रवाद के कारण हमलोग हमेशा अपने पड़ोसियों से झगड़ा करते रहते हैं । दिन मे एक बार भी अपने पड़ोसियों को न कोसें तो हमे खाया हुआ खाना हजम नहीं होता है । और देशों मे खाना खाने के बाद पान, सुपारी चबाना और हाजमा खराब होने पर चूरण की गोली खाना आम बात है । पर हमारे देश की तो बात ही अलग है । यहाँ पर सुबह उठ्ने से ले कर रात मे सोने तक अपने पड़ोसियों को एक हजार गालियों से नवाजा जाता है ।

लोग सुबह उठ कर पूजा, पाठ करते हैं । तुलसी को जल देते है, सूर्य नमस्कार करते हैं पर हमारे देशवासी अधिकांश हिंदू होने पर भी दक्षिण की मुँह करके अपने पड़ोसी के लिए एक से एक गाली का स्तोत्र पाठ करते हैं । गाली देना और अपनी गलतियों को ढक कर दूसरे पर आरोप लगाना हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है । भले नए नवेले संविधान मे इस अधिकार के बारे मे इस पर विस्तार से न बताया गया हो । पर यह बेलायत की संविधान की तरह अलिखित है । जो सभी इस्तेमाल करते हैं ।

हमारा राष्ट्रवाद गागर मे भरी हुई जल की तरह जहां, तहां छलक जाती है । एमाओवादी के सुप्रिमो कमरेड प्रचण्ड ने अपने दक्षिण के पड़ोसी की तरफ हाथ उठा कर बताया हम आपकी बात नहीं मानेंगें । जब भूमिगत काल में उसी पड़ोसी के घर मे शरण लिया था तो आगे, पीछे दुम हिलाते थे । आज बड़े शेर बन कर गरज रहे हैं । और प्रचण्ड के इसी भाषण पर ताली ठोकते हुए भेड़ –आम जनमानस और भेड़िया (मीडिया) उन्हे पुष्पकमल बनाकर कन्धे पर उठा रही है । यही भीड़ किसी दिन प्रचण्ड को फिर से कन्धे से उठाकर धूल मे फेंक देगें ।

आप कितने बड़े राष्ट्रवादी हैं यह आपकी देश के प्रति निष्ठा या कर्म तय नहीं करेंगें । आप कितना ज्यादा अपने पड़ोसी से घृणा करते हैं और उसको गाली देते हैं, उसी हिसाब से आप राष्ट्रवादी बनिएगा । यदि आप गाली नहीं देते और तटस्थ रहते हैं तो इसका मतलब आप अपने पडोसी के दलाल या एजेंट है । आप के साथअनागरिक जैसा बर्ताव करेंगे । क्योंकि राष्ट्रवाद का ठेका तो इन्होंने अपने सर पर उठा रखा है । आप तो दुश्मन जो ठहरे ।

p-1करीब चार दिन पहले फेसबुक पर एक आदमी ने अपने पड़ोसी के लिए गाली का स्तोत्र ही लिख डाला था । उस स्तोत्र मे हमारे पड़ोसी के ४० करोड़ जनता नाली या गटर मे रहती हैं । मुझे हंसी आइ इस बात पर की कोई कितना भी गरीब क्यो न हों पर नाली या गटर के अन्दर नहीं रहता है । गटर के किनारे पर या सड़क मे रह लेगा पर गटर के अन्दर तो हरगिज नहीं । पर उन्हें कौन समझाए कि ७० लाख नेपाली विदेश और खाड़ी मुल्क में तपती गर्मी में उंट और भेड़ की गंदगी साफ कर रहे हैं । पर उन्हें अपने देश की गंदगी नहीं दिखती, दिखती है तो बस दूसरे की । आखिर उन्होने राष्ट्रवाद का जो चश्मा पहना है वह ‘एक किडनी वाले बाबा’ की कृपा से है ।

देश मे रुइ से ले कर सूई तक पड़ोसी या दूसरे देश से आयात हो कर आता है । पर इनके मिजाज को देखने से लगेगा कि यह चन्द्रमा पर भी हो आए हैं । बस इनका काम है पड़ोसी को चिढ़ाना और उसकी छोटी से छोटी बात पर भी मीनमेख निकालना । क्योंकि मक्खी कभी साफ जगह पर नही बैठती । यह हमेसा घाव, मवाद और खून में ही भिनभिनाती रहती है । यह भी ऐसे ही है । क्योंकि कोई भी आदमी या कुत्ता लगातार एक ही इन्सान और देश की तरफ देख कर गुर्राता, है गाली देता है या भौंकता है तो समझ जाना चाहिए कि उस आदमी या कुत्ते को कोई और देश या आदमी भरपूर मास (पैसा) और हड्डी खिला रहा है । जिस दिन आदमी को मास और कुत्ते को हड्डी खिलाना बन्द होगा यह उस दिन पलट कर उसी देश या आदमी को गाली देगा या भौंकेगा ।

इन्हें सारी दुनिया अच्छी और सुन्दर दिखती है पर अपना पड़ोसी नहीं । इनका वश चले तो अपने देश को ही घसीट कर प्रशान्त महासागर के पास ले जाए । लोगों को अपनी बीबी और पडोसी कभी भी अच्छे नही लगते । सीमा जुड़े हुए पड़ोसी से यह इतना नफरत करते हैं । मुझे जानने का मन है की इनके घर मे पड़ोसी देश मे बना हुआ सामान इस्तेमाल किया जाता है कि नहीं ? पड़ोसी देश में निर्माण हुआ सिनेमा देखते या वहां का संगीत इनके घर में बजता है कि नहीं ? जब यह बुरी तरह बीमार पड़ जाते हैं और यहां के अस्पताल और डाक्टर उन्हें ठीक न कर पाने के कारण पड़ोस के बढ़िया अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए सिफारिश करते हैं तो वहां जाते हैं कि नहीं ? या पड़ोसी से नफरत के चलते यंही घुट, घुट कर मर जाते है ?

जितना समय और शक्ति यह पड़ोसी को कोसने और गाली देने में बिताते हैं उतने समय में कोई अच्छा काम करे न । उस से इनका तन, मन भी प्रसन्न रहेगा और इनका राष्ट्रवाद भी इनको नहीं चिढ़ाएगा । आप दूसरे को गाली देते हैं या नफरत करते हैं इसका मतलब आप फुर्सदी आदमी है और आप के पास रोजगार नहीं है । जो बेरोजगार है वो सूर्ती या खैनी मलते हुए अपने पड़ोसियों की शिकायत करेगा और उन्हें कोसेगा । पड़ोसी अच्छा है या बुरा है या जैसा भी है उस को हमलोग बदल नहीं सकते न ? जो जैसा कर्म करेगा उसको अपनी करनी का फल तो मिलेगा ही । फिर क्यों सुबह से रात तक हम एक ही काम यानी अपने पड़ोसी को कोसना और नफरत करते है ? जब एक ही सब्जी खा, खा कर हमबोर हो जाते है तो पड़ोसी को गाली देने जैसा एक ही काम कर कर के या बोल बोल के हमलोग थक नहीं जाते या बोर नहीं होते ?

मधेश एक महीना से बन्द है वहां की जनता अपने अधिकारों के लिए लड़ रहीं है । सरकार कान में तेल डाल कर बैठी हुई है । और मधेश की जनता को भी यह लोग पड़ोसी का बच्चा समझ कर नजर अन्दाज कर रहे । मधेश मे कर्फ्यू लगा कर कफन जैसा संविधानजारी कर लिया । दिपावली की गई, आतिशबाजी हुई । आपस मे मिठाई भी बांट कर खा लिया पर मधेश और मधेशियों को सौतेला मान लिया गया । इनको लगता है की मधेश तो अपना है पर यह मधेशी पड़ोसी के है जो यहां पर जबरदस्ती घुस कर आतंक फैला रहे है । आपकी आंख सचमुच अन्धे और कान बहरे हो गए हैं जो अपने देशवासी और भाई, बन्धूओं को गैर देखते है । सब से पहले इनकी आंख का इलाज जरुरी है ।

यह लेख पढ कर मुझे भी अपने पड़ोसी का दलाल या एजेंट कह कर जरुर ताना दिया जाएगा । पर कोई बात नहीं क्योंकि मुझे इन छोटे और ओछे कामों के लिए फुर्सत नहीं हैं । क्योकि मुझे बड़े बड़े और महान काम करने हैं ।

जय राम जी की !

जिनकी रही भावना जैसी १

तिन देखी प्रभु मूरत वैसी १

(व्यग्ंय)

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