हाय रे सरकार और उसका अर्थ प्रबंधन

मालिनी मिश्र, काठमाण्डू, ३०जुलाई ।
हाल फिलहाल सरकार ने बजट के मार्फत कर्मचारियों का वेतन भत्ता बढाया है व अब खबर आ रही है कि इससे सरकार के स्वामित्व में ही रहे बैंकों जिसमें राष्ट्रीय वाणिज्य बैंक, कृषि विकास बैंक व नेपाल बैंक को अचछा खासा घाटा हो रहा है । यह किस तरह की व्यवस्था है हमारे देश में जिसमें  भत्ते में २७ प्रतिशत वृद्धी से बैंकों को ५० प्रतिशत तक भार वहन करना पड रहा है ।
nepalrashtr bank
 एक तो सरकार देती नही है जो थोडा बहुत दे देती है तो उसमें अर्थ व्यवस्था ही डगमगा जाती है । अभी सावन १ गते से ही अर्थात लगभग १५ दिन पहले से ही वेतन की बढोत्तरी को कार्यान्वित किया ही गया है कि चालू आर्थिक वर्ष में बैंकों को नकारातमक प्रभाव का सामना करना पड रहा है । बेंकों के अनुसार अवकाश प्राप्त कर्मचारियों के वेतन में भी ग्रेडिंगनुसार बढोत्तरी से बैंक के संचालन में खर्च बढ रहा है । संचालन खर्च के बढने से ही लाभ में कटौती हो जाती है ।
इसी क्रम में अब शेयर धारियों का लाभांश भी गत वर्ष की तुलना में कम होगा । गत वर्ष में जितना रु. वहन करना पडता था, अब बैंकों को उससे दोगुना करना पडेगा ।
राष्ट्रीय वाणिज्य बैंक मेंं जहां २ अर्ब ५० करोड़ रु. का फायदा होता था अब बताया जा रहा है कि कर्मचारियों के लिए ही लगभग ४ अरब रु. खर्च करने पड़ेंगे । इसी प्रकार कृषि विकास बैंक के लिए भी लगभग १ करोड़ रु. अतिरिक्त की व्यवस्था चाहिए । ऐसी ही स्थिति नेपाल बैंक की भी है । ऐसी अवस्था में यदि कर्मचारियों की भर्ती करनी पड़े तो बैंक की अवस्था और ही गिर जाएगी ।
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