हिंदी साहित्य क्षेत्र का सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार कृष्णा साेबती काे

 

हिंदी  साहित्य  क्षेत्र के सर्वोच्च सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार की घोषणा हो गई है. इस साल यह पुरस्कार हिंदी की प्रख्यात लेखिका कृष्णा सोबती को दिया जाएगा. एनडीटीवी के मुताबिक इसकी पुष्टि करते हुए ज्ञानपीठ के निदेशक लीलाधर मंडलोई ने कहा कि हिंदी साहित्य की सशक्त हस्ताक्षर लेखिका कृष्णा सोबती को साहित्य में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए 53वां ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया जाएगा.

ज्ञानपीठ पुरस्कार के तहत कृष्णा सोबती को 11 लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र और प्रतीक चिह्न दिया जाएगा. ज़िंदगीनामा, ऐ लड़की, मित्रो मरजानी और जैनी मेहरबान सिंह जैसी रचनाएं देने वाली कृष्णा सोबती को पहले भी कई पुरस्कार मिल चुके हैं. उपन्यास ज़िंदगीनामा के लिए 1980 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला था. इसके अलावा 1996 में उन्हें साहित्य अकादमी के सर्वोच्च सम्मान साहित्य अकादमी फैलोशिप से नवाजा गया था.

भारतीय ज्ञानपीठ न्यास 1965 से हर साल भारतीय साहित्य में योगदान के लिए ज्ञानपीठ पुरस्कार दे रहा है. वर्ष 1967, 1973, 1999, 2006 और 2009 में यह पुरस्कार दो-दो लेखकों को दिया गया था. वहीं, पहला ज्ञानपीठ पुरस्कार मलयालम लेखक जी शंकर कुरुप को मिला था. पिछले साल 52वां ज्ञानपीठ पुरस्कार बांग्ला कवि शंख घोष को मिला था.

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