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हिजबुल मुजाहिदीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित : अब पाकिस्तान इसे नहीं बता सकता स्वतंत्रता सेनानी

17अगस्त

हिजबुल मुजाहिदीन के अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित होने के साथ ही  पाकिस्तान कश्मीर में सक्रिय किसी भी आतंकी को स्वतंत्रता सेनानी बताने की स्थिति में नहीं होगा। घाटी में सक्रिय लश्करे तैयबा और जैश ए मोहम्मद पहले से अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन की सूची में शामिल है। अब उसमें हिजबुल मुजाहिदीन का नाम भी आ गया है।

अमेरिका ने भी मान लिया है कि कश्मीर में आजादी की लड़ाई के नाम हो रही हिंसक घटनाएं दरअसल आतंकी वारदात हैं। भारत लंबे समय से इसे आतंकवाद बताता रहा था, लेकिन अमेरिका समेत कई देश इसको मानने को तैयार नहीं थे। अमेरिका के गृह विभाग की तरफ से बुधवार को जारी एक विज्ञप्ति के जरिए हिजबुल मुजाहिदीन को अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित कर दिया गया है। हिजबुल मुजाहिदीन के सरगना सैयद सलाउद्दीन को दो महीने ही अमेरिका अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर चुका है।

गौरतलब है कि कश्मीर में भारत के खिलाफ छद्मयुद्ध का मोर्चा खोलने के लिए 1989 में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ ने हिजबुल मुजाहिदीन का गठन कराया था। पाकिस्तान दुनिया के सामने इसे कश्मीर के स्थानीय युवाओं की आजादी के लिए संघर्ष के रूप में पेश करने की कोशिश करता रहा है। यही नहीं, इसके आड़ में सैयद सलाउद्दीन और हिजबुल मुजाहिदीन को पाकिस्तान खुला समर्थन भी देता रहा है। हिजबुल मुजाहिदीन के अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन घोषित होने के साथ ही पाकिस्तानी की साजिश ध्वस्त हो गई है। इसके बाद पाकिस्तान कश्मीर में सक्रिय किसी भी आतंकी को स्वतंत्रता सेनानी बताने की स्थिति में नहीं होगा। घाटी में सक्रिय लश्करे तैयबा और जैश ए मोहम्मद पहले से अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन की सूची में शामिल है। अब उसमें हिजबुल मुजाहिदीन का नाम भी आ गया है।

अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित होने के बाद उनके खिलाफ भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई पर मानवाधिकार संगठन उंगली नहीं उठा पाएंगे। इससे कश्मीर में आतंकियों के सफाए के लिए सुरक्षा बलों की ओर से चलाए जा रहे ‘आपरेशन ऑल आउट’ को बल मिलेगा। यही नहीं, हिजबुल मुजाहिदीन के लिए अब अंतरराष्ट्रीय स्तर कश्मीर के नाम पर फंडिंग हासिल करना भी संभव नहीं होगा। विदेशों में उसके आफिस और खातों को सील किये जा सकते हैं और उन्हें मदद करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई हो सकती है।

पिछले साल संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने कश्मीर में मारे गए हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी को स्वतंत्रता सेनानी बताकर महिमामंडित करने की कोशिश की थी। जबकि बुरहान वानी पर घाटी में कई आतंकी वारदात को अंजाम देने का आरोप था। अब पाकिस्तान के लिए दुनिया के सामने किसी भी हिजबुल आतंकी को स्वतंत्रता सेनानी बताना आसान नहीं होगा।

यही नहीं, पाकिस्तान के लिए आतंकी फंडिंग पर लगाम लगाने के लिए बनी संस्था एफएटीएफ के सामने अपना बचाव करना भी आसान नहीं होगा। पाकिस्तान को एफएटीएफ के सामने आतंकी फंडिंग पर रोक लगाने के लिए ठोस कदम उठाने के सबूत देने को कहा गया है। जबकि हिजबुल मुजाहिदीन के आतंकी पाकिस्तान में खुलेआम चंदा इकट्ठा करते हैं और मुजफ्फराबाद में उनका हेडक्वार्टर है। एफएटीएफ के सामने पाकिस्तान को यह बताना होगा कि उसने हिजबुल मुजाहिदीन की फंडिंग रोकने और उसकी गतिविधियों पर लगाम लगाने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए हैं। ऐसा नहीं करने की स्थिति में पाकिस्तान को अंतराष्ट्रीय आर्थिक प्रतिबंधों का भी सामना करना पड़ सकता है।

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