हिजबुल मुजाहिद्दीन का नयां अड्डा बन रहा है नेपाल

शीतांशुपति त्रिपाठी:नईदिल्ली। हिमालय की वादियों और एवरेस्ट की तलहटी में बसा नेपाल देश, पूरे विश्व में अपनी सम्प्रभुता और धर्म की रक्षा के लिए जाना जाता है। इस खूबसूरत देश की संप्रभुता और धर्म की रक्षा की वजह से इसे विश्व के सभी देश अलग नजरिए से देखते हैं, लेकिन बिते कुछ वर्षों में नेपाल की छवी काफी खराब हो चुकी है।
तीन करोडÞ की आवादी वाला यह हिन्दू राष्ट्र आज हिन्दुस्तान की उदासीनता की वजह से पाकिस्तान, चीन जैसे भारत विरोधी देशों का सहयोग बढÞता जा रहा है, जो हिन्दुस्तान के लिए खतरे की बात है। करीब १८०० किलोमिटर की सीमा भारतीय सीमा से सटी होने के कारण नेपाल सदियों से भारत के लिए महत्वपर्ूण्ा रहा है। उत्तर में चीन और भारत के लिए दीवार का काम करनेवाला नेपाल आज भारत के लिए सबसे बडÞा खतरा बनता जा रहा है।
आतंकी संगठनों का सबसे सुरक्षित और भारत विरोध के लिए महत्वपर्ूण्ा देश बना नेपाल आज भारत के लिए वैसे ही खतरा बन चुका है, जैसे पाक अधिकृत कश्मीर के इलाकों में स्थित आतंकी संगठनों के मुख्यालय। नेपाल से आ रही खबरों के मुताबिक, नेपाल अब पाक अधिकृत कश्मीर के आतंकी संगठन ‘हिजबुला मुजाहिद्दीन’ का सुरक्षित और पसंदीदा स्थान बनता जा रहा है। सूत्रों पर यदि भरोसा किया जाए तो ये खबर भारत के लिए खतरनाक हैं।
भारत के लिए कैसे महत्वपर्ूण्ा है –
नेपाल सिर्फहमारा पडÞोसी ही नहीं, बल्कि वह हमारी धार्मिक, सांस्कृतिक अस्मिता को साझा करता है, लेकिन हमारे देश की राजनीति और विदेश नीति की विफलता की वजह से आज विश्व के कई आतंकी संगठन भारत विरोधी जाल सजा रहे हैं। विदेशी आतंकियों के लिए आसान निशाना बना नेपाल और वहाँ की राजनीति अस्थिरता ने आतंकी संगठनों की काफी मदद की है।
आज से दश वर्षपर्ूव विश्व के सबसे शान्त देशों में शुमार नेपाल अपने देश के ही राजनेताओं के जाल में फंसता दिखाई पडÞ रहा है। आध्यात्मिक और धार्मिक भावनाओं से ओत-प्रोत रहा यह देश पूरी दुनिया के लिए कौतूहल का विषय रहा है। न जाने किसकी आँख लग गई इस देशको, जिसने दुनियाँ के सब से शान्त देश को विश्व के सब से अशान्त देश में बदल कर रख दिया है।
नेपाल से सभी उत्तर भारतियों का भावनात्मक लगाव है। वजह भी साफ है- सांस्कृतिक और धार्मिक एकता की वजह से नेपाल-भारत का आपसी प्रेम किसी से छुपा नहीं है। इसीलिए नेपाल में बीते दस वषोर्ं से घट रही घटनाएँ आम भारतियों को चिंतित करती हैं। नेपाल को करीब से जानने वालों का मत है कि नेपाल में भारत के खिलाफ पूरी तैयारी के साथ विदेशी ताकतें भ्रामक प्रचार कर रही हैं, जबकि वहाँ का आम नागरिक और बुद्धिजीवी वर्ग भारत से ही ये उम्मीद लगाकर बैठा है कि सिर्फभारत ही नेपाल और वहाँ के आम आदमियों की मदद कर सकता है। साथ ही हिन्दू पहचान के साथ राजतन्त्र और लोकतन्त्र को एक साथ लाने की कोशिश कर सकता है।
साम्यवादी प्रचारतन्त्र ने आज हर नेपाली को भारत के प्रति शक के घेरे में धकेल दिया है। आज हालात ये हैं कि नेपाल में घट रही हर छोटी और बडÞी घटनाओं को भारत से जोडÞना, माओवादी हिंसा के लिए भारत को जिम्मेदार ठहराना, साथ ही स्थानीय माओवादियों द्वारा खुलेआम भारत विरोधी गतिविधियों को अंजाम देना, नेपाल में रोजमर्रर्ााी घटना हो गई है। आज नेपाल में किसी से भी बात की जाए तो यही कहता है कि नेपाल को इस स्थिति से भारत ही निजात दिला सकता है।
बीते ६ वर्षों में नेपाल तेजी से बदला है। राजनीतिक अस्थिरता, गरीबी, अशिक्षा, पालयान तो अभिशाप थे ही लेकिन वर्तमान अराजकता का सबसे बडÞा घटक चीन समर्थित माओवाद बना। अब नेपाल में हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा भी धूमिल पडÞ रही है, जिसका सबसे बडÞा कारण माओवादियों की मदद से अंतर्रर्ाा्रीय संगठनों द्वारा चर्च के माध्यम से धर्मान्तरण कराना, वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी दूतावास ने जेहादी आतंकवाद के नए अड्डे के तौर पर नेपाल को स्थापित करने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। कुछ समय पर्ूव ही पाकिस्तानी दूतावास के कर्मचारी का भारतीय करेंसी के साथ पकडÞा जाना, इस बात की ओर इशारा करता है कि पाकिस्तान की मदद से आतंकी नेपाल में भारत विरोध की नींव रख चुके हैं।
पिछले ६ महीनों के दौरान भारत सीमा पर स्थित सुनौली बार्डर पर पकडÞे गए हिजबुल मुजाहिद्दीन के ७२ आतंकियों ने भारत की चिंता बढÞा दी है, साथ ही ये भी साबित कर दिया है कि अब हिजबुल पीओ.के स्थित अपने कैम्प को नेपाल में स्थानान्तरित कर रहा है। सिर्फयही नहीं तर्राई के क्षेत्र के सभी जिलों में खुलेआम संचालित हो रहे ‘चाइना स्टडी सेन्टर’ के माध्यम से तिब्बत की तर्ज पर नेपाल को हडÞपने का उतावलापन आदि तमाम ऐसी घटनाए है, जिसने भारत के साथ-साथ आम नेपाली को भी सोचने पर मजबूर कर दिया हैं।
सत्ता के संरक्षण में काठमांडू स्थित पाकिस्तानी दूतावास, पाकिस्तान से आनेवाले आतंकवादियों को ना केवल प्रश्रय देता है बल्कि उन्हें भारतीय सीमा पर स्थापित मदरसों तक पहुँचाने का इंतजाम भी करता है। भारत-नेपाल बार्डर पर तेजी से फैलते मदरसों को स्थापित करवाने में पाकिस्तानी दूतावास की अहम भूमिका रही है। साथ ही इन मदरसों की रोजमर्रर्ााी जरुरतों को पूरा करने में आईएसआई भरपूर मदद करती है। पैसा, हथियार और आतंकी घटनाओं को कब, किस समय अंजाम देना है, ये आईएसआई तय करती है। आईएसआई जैसा निर्देश देता है, मदरसों में बैठे हिजबुल के आतंकी उसी अनुसार आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं।
चीन की दिलचस्पी अचनाक नेपाल में ऐसे ही नहीं बढÞी। वह अपनी विस्तारवादी महत्वाकांक्षा के तहत काम कर रहा है। बीते ६ वर्षों में चीन ने नेपाल में अपने पूँजी निवेश को अचानक बढÞा दिया है। चीन की लगातार तेजी और घुसपैठ ने भारत के माथे पर चिन्ता की लकीरें खींच दी है। सदियों से नेपाल अपनी सामान्य आवश्यकताओं के लिए भारत पर निर्भर रहा है। भारत और नेपाल १४ महत्वपर्ूण्ा रास्तों से जुडÞते है, इन रास्तो की दर्ुदशा भारत-नेपाल सम्बधों पर र्छाई कालिख हालत बयां करने के लिए काफी है। वहीं, चीन ५ बडÞे अन्तर्रर्ाा्रीय मार्गो का तेजी से निर्माण कर रहा है। ल्हासा से काठमांडू और काठमांडू से लुम्बिनी तक रेल लाइन बिछाकर अपनी इस महत्वपर्ूण्ा योजना को जल्दी से जल्दी पूरा करना चाह रहा है।
दर्ुभाग्य से कहीं चीन अगर अपनी इन योजनाओं में सफल हो गया तो नेपाल की निर्भरता भारत पर खत्म हो जाएगी, उसके बाद भारत और नेपाल के रिश्ते किस ओर जाएंगे, ये चीन तय करेगा। चीन और पाकिस्तान भारत को सभी सीमाओं से घेरने की कोशिश में है। इन कोशिशों को विफल करने का काम भारत सरकार और विदेश मन्त्रालय का होना चाहिए था, पर नेपाल के प्रति भारत का उदासीन रवैया, आज इस देश को भारत से दूर और चीन के करीब ले गया। राजनीतिक अस्थिरता नेपाल में अराजकता का कारण बनता जा रहा है, आम उपभोक्ता वस्तुओं के मूल्यों में भारी वृद्धि और उन का आम जनता की पहुँच से बाहर होना नेपाली समाज को पुनर्विचार के लिए मजबूर कर रहा है।
आज नेपाल में आम जनता की चर्चा का विषय है, नेपाल की हिन्दू राष्ट्र देश की पहचान और उसके खोने की पीडÞा। यही वहज है कि अब नेपाल का आम जनमानस लोकतन्त्र के साथ राजतन्त्र का हिमायती बनता जा रहा है। नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रामबाबु परर्साई का कहना है कि बीते ६ वर्षों में नेपाल में सभी प्रयास विफल हो चुके हैं। उनका ये भी कहना है कि जब संविधानसभा नए संविधान का निर्माण नहीं कर पाई तो १९९० में बना संविधान तत्काल प्रभाव से लागू होना चाहिए।
नेपाल में १९९० में बना संविधान को जो मूल है, वह ४ बातों पर टिका हुआ है और जो नेपाल की आत्मा भी है। पहला हिन्दू राष्ट्र, हिन्दू राजा, धर्मान्तरण को रोकना और गोवंश की रक्षा करना लेकिन आज नेपाल इन सभी बातों और संविधान के मूल से हट चुका है। नेपाल में वह सब कुछ हो रहा है, जो नहीं होना चाहिए था। आज इन सभी के पीछे भारत सरकार की निष्त्रिmयता ही काम कर रही है। नेपाल के मुद्दे पर केन्द्र की सत्ता पर काबिज यूपीए सरकार उदासीन है, नेपाल के लिए भारत की विदेश नीति बदल चुकी है, अब ये सब सोचने का समय नहीं रह गया है। भारत को इन सभी बातों और भविष्य में आनेवाली दिक्कतों को ध्यान में रख कर नेपाल के लिए ठोस नीति बनानी होगी, नहीं तो नेपाल को ‘आतंकी संगठनों का आरामगाह’ बनने में अब ज्यादा समय नहीं लगेगा।

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