हिन्दी का विरोध इसलिए कि वह नेपाली राष्ट्रवादी कहलाना चाहते हैं: राउत

डा सी केराुउत

डा सी केराुउत

सी के राउत , मैथिली अधिकारकर्मीू तो हिटलर को भी मात देनेवाले हैं जो लोगों पर डिक्टेट करते रहते हैं कि वे अपने घर में, अपनी डायरी में, अपने मोबाइल में, अपने इमेल में, अपने फेसबुक एकाउन्ट पर कौन भाषा लिखें १

निरंकुश नेपाली शासन ने भी केवल राज्य की सरकारी कामकाज की भाषा निर्धारित की थी, लोगों की कापी या कम्युटर पर डिक्टेट नहीं किए १ पर ुमिथिलावालेु तो१ और उतना ही नहीं ुमिथिलावालेु नीची(से(नीची गालियाँ देते हैं, मजाक उडाते हैं आदि आदि। और आजकल तो वे लोग ुयादवु , ुसाहु आदि नाम पर नक्कली फेसबुक आइडी बनाकर ये सब करते हैं १ ९जिसकी जरूरत नहीं होनी चाहिए थी, करें तो खुलकर करें, छूपकर क्यों १०

हमारे हिसाब से, हिन्दी का विरोध करनेवाले मधेशियों और मिथिलाकर्मियों को दो समूहों में बाँट सकते हैंस्

९क० प्रायोजितस् ऐसे ूमैथिली अधिकारकर्मीू की पहचान है कि इनके आगे नेपाली में लिखिए, बोलिए तब इनको कोई समस्या नहीं होती, पर जब ये हिन्दी देखते हैं, तो इनकी पूँछ खडी हो जाती है। ऐसे लोग जानबुझकर दूसरों पर जबरजस्ती ूमैथिलीू लादने के लिए अग्रसर रहते हैं, ताकि प्रज्ञा प्रतिष्ठान से लेकर मैथिली विभाग तक इनका वर्चस्व बना रहे, इनका ूमिथिला बजारू चलता रहे, और इनकी झोली भरती रहे। उसके साथ(साथ इनका सांस्कृतिक अधिनायकत्व भी बना रहे, ताकि सभी लोग इनको पूजेरपूछे, आम लोग दो(चार लाइन मैथिली लिखने(पढने के लिए भी इनका पाँव पकड़ते रहे ।

९ख० निर्दोष : कुछ लोग हिन्दी का विरोध केवल इसलिए करते हैं क्योंकि वह नेपाली राष्ट्रवादी कहलाना चाहते हैं या अपने आसपास के नेपालीरपहाडी साथियों से वे वहीं सुनते आए हैं और इसलिए उन्होंने ने भी वही विरोध करना सीख लिया है। ये लोग खुद अपना दिमाग प्रयोग करने और एकबार सोचने की जरूरत नहीं समझते कि भई जो पूरे मधेश की सम्पर्क भाषा हैं, जो गाँव(देहात से लेकर शहर तक सभी समझ सकते हैं, जो ८० वर्ष के अनपढ दादीमाँ से लेकर ५ वर्ष के बच्चा भी बोल लेता है, जो ५० वर्ष पहले तक पूरी पढाई और कामकाज के लिए प्रयोग होती थी, उसे वह विरोध क्यों कर रहा है १ उनके लिए हिन्दी क्यों पराई और नेपाली क्यों अपनी हो गई, सोच नहीं पाते १ इस समूह के लोग नेपालीरपहाडी लोग जो बोलते हैं वही बात बिना सोचे दोहराते रहते हैं । ऐसे लोग खुद न तो मैथिली अच्छी तरीके से पढ सकते हैं, न तो एक पेज मैथिली में लिख सकते हैं, पर बडा ूमिथिलाप्रेमीू बनकर दूसरों को हुकूम करते रहते हैं मैथिली में लिखने के लिए१ ऐसे लोगों को मैं निर्दोष ही मानता हूँ क्योंकि यह केवल ूदासता की मानसिकताू में रहने के कारण से ऐसा होता है। इस दासता की मानसिकता से निकलने के लिए समय लगता है, जमीनी अनुभव की जरूरत होती है। ऐसे लोग काठमाण्डू से उतरकर या राजविराजरजनकपुर से निकलकर पूरे मेची(महाकाली यात्रा करें, और लोगों से बातचीत करें तो कुछ परिवर्तन हो सकता है।

नोटस् फ्रेडरिक गेज ९सन् १९७५० ने तो अपने सर्वेक्षण के बदौलत इतना तक लिखा है कि सन् १९६१ में कि मधेश में कम(से(कम ६३५ लोग हिंदी बोलते थे। हिन्दी को कम दिखाने के लिए पश्चिम मधेश में जनगणना के समय हिन्दी लिखने की जगह उसे अवधी लिखा गया ९जैसे राना थारू की भाषा को०। नई पिढी के इन लोगों को तो यह भी मालूम नहीं कि विशुद्ध मधेश के लिए आधुनिक समय में सबसे पहले जो आन्दोलन हुआ, वह ुहिन्दी बचावु आन्दोलन ही था, जो वर्षों तक जोडतोड से चलता रहा। लेकिन इसमें उनका क्या दोष रु यह तो नेपाली शिक्षा नीति की सफलता है, जो मधेशियों को मानसिक रूप में भी दास बनाने की योजना स्वरूप लाई गई थी।

अब मेरी मजबूरी
जो मेसेज मैं मधेशियों के लिए लिखता हूँ वह हिंदी में लिखता हूँ ताकि सभी को समझ में आए। विदेशियों के लिए लिखने पर अंग्रेजी में लिखता हूँ, और कभी(कभी खास करके पहाडियों के लिए लिखने पर नेपाली मेंस मुझे किसी भाषा से घृणा नहीं । ९अगर मुझे नेवारी आती तो मैं नेवारों के लिए नेवारी में ही लिखतास तामाङ आती तो तामाङों के लिए तामाङ भाषा में ही लिखता० जो लोग यह कहते हैं कि मैथिली से ही काम चल जाएगा, वह लोग खुद काम चलाएँ, आप स्वतन्त्र है, पर हमारा अनुभव रहा है कि सर्लाही और सुन्सरी पार करते ही ूमैथिलीू में संवाद करना कठिन हो जाता है, इस बीच के जिलों के भी उत्तरी हिस्सों में और कई बस्तियों में ूमैथिलीू में संवाद करना कठिन रहा है। और इसका बेहतरीन विकल्प कम(से(कम अभी के लिए ूहिन्दीू ही है।

।।।और प्रेम
देखो भाई, मैं भी ूमैथिलीू से प्रेम करता हूँ और समय(समय पर अपनी तरफ से जो हो सके करता रहता हूँ। छोटा कार्य ही सही, बता दूँ, ूतिरहूता लिपीू फोन्ट जो अक्सर मैथिली भाषाकर्मी प्रयोग करते हैं, वह मैथिली से मेरे लगाव का ही नतिजा है, १२(२३ वर्ष पहले बनाया था, डेवेलपर का नाम बाहर लिखा तो नहीं है, पर आपके कम्प्युटर में तिरहुता फोन्ट के प्रोपर्टिज में देखिए ूऋप् च्बगत, भऋगदभस् च्भकभबचअज ७ क्यगितष्यलकू मिलेगा। यह फोन्ट मैथिली के लिए यूनिकोड कन्सोर्टियम को भेजे गए प्रोपोजल में सन्दर्भ बनाया गया था, और उस डकूमेन्ट में इसे मैथिली भाषा का सम्भवतस् पहला र प्रारम्भिक इलेक्ट्रोनिक फोन्ट कहकर दाबा किया गया था।

जरूर देखेंस्
http://www.tirhutalipi.4t.com/
www.unicode.org/L2/L2006/06226-maithili-roadmap.pdf (Search eCube)
std.dkuug.dk/JTC1/SC2/WG2/docs/n4035.pdf

मैथिली से मेरे लगाव के विषय में जानने मेरी आत्मकथा में भी मौजूद तत्कालीन् राजा ज्ञानेन्द्र के नाम लिखा गया खुलापत्र भी देखिए। उसी तरह मेरे परिवार का भी मैथिली विकास से विशेष लगाव रहा है, जैसे के मेरे बड़े भाई ने ूमिथिला हमर गामू नामक मैथिली चलचित्र और गीति एलबम भी प्रोड्यूस किया था। ९तस्वीर में देखेंस् सूर्यकान्त प्रोडक्सन्स, https://ckraut.files.wordpress.com/2014/06/mithila-film-sk-raut.jpg )

पर जिस तरह से कुछ मैथिली ठेकेदारों ने लाठी के बल पर, और तो और, फेसबुक तक भी डिक्टेट करने चले आए हैं, इससे मुझे दुस्ख होता है क्योंकि ऐसी गतिविधियों से मैथिली की उन्नति नहीं, अन्ततस् अवनति ही होगी। क्या मैथिली इतनी कमजोर है, जो मैथिली को इस तरह की गतिविधियों का सहारा लेना पडेगा रु

नोटस् यह लिखने का अभी सही समय तो नहीं है, इस लिए कुछ महिनों से इसे टाल रहा था, पर ूमैथिली अधिकारकर्मियोंू को हाल के राजनैतिक परिवर्तन से मिले ूऊर्जाू के कारण वे ज्यादा ही आक्रामक होने की वजह से यह लिखने पर मजबूर होना पड़ा है।maithil cartoon (यह आलेक Dr. C.K.Raut केे फेसबुक पर प्रकाशित है )

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