हिन्दी के लिए कभी दुभाषिए की जरुरत नहीं रही : विमलेन्द्र निधि

काठमांडू, आश्विन ५ ।
संविधान के विषय में असहमति है कहते हुए उपप्रधान तथा गृहमन्त्री विमलेन्द्र निधि ने उसे दूर करने के लिए कुछ एजेण्डा को समर्थन करने की बात की ।
डा. कृष्णचन्द्र मिश्र पब्लिकेशन प्रा.ली. तथा हिमालिनी हिन्दी मासिक पत्रिका के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित पुस्तक लोकार्पण तथा सम्मान कार्यक्रम में बोलते हुए मन्त्री निधि ने नेपाल में पहले  एक ही प्रकार की निर्वाचन प्रणाली थी पर आज वो आमूल परिवर्तन होते हुए समानुपातिक निर्वाचन प्रणली लाया गया बताते हुए संविधान के प्रति असंतुष्ट मुद्दो को सुनवाइ करने का जिक्र किया ।
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कार्यक्रम में हिन्दी की साहित्यकार डा. श्वेता दीप्ति की तीन विविध साहित्यिक कृतियों का विमोचन करते हुए  प्रमुख अतिथि रहे गृहमन्त्री निधि ने अपना मन्तव्य व्यक्त करते  हुए कहा नेपाल में कभी हिन्दी बोलने पर पाबंदी लगती थी लेकिन सरकार का व्यवहार हिन्दी के प्रति चाहे जैसा भी रहा हो वो रुका नहीं । उन्होंने हिन्दी भाषा नेपाल में आगे बढ़ता रहा है और बढ़ता ही रहेगा  बताया ।
गृहमन्त्री निधि ने हिन्दी समृद्ध एवम् सम्पन्न भाषा है कहते हुए बताया नेपाल में इस की रक्षा व विकास के लिए हम सब को मिलजुल कर कार्य करना चाहिये । उन्होंने संविधान संशोधन में कई मुद्दो में भाषा भी एक है बताते हुए कहा भाषा आयोग जो प्रतिवेदन दें उस के एक अनुसूचि में नेपाली भाषा के अलावा अन्य भाषाओं को भी इस में रखा एवम् स्वीकार किया जाए ।
गृहमन्त्री निधि ने कृष्णचन्द्र मिश्र व अपने पिता महेन्द्रनारायण निधि की मित्रता के कई प्रसंङ्गों का स्मरण करते हुए मिश्र के प्रति सम्मान व्यक्त किया । साथ ही उन्होंने साहित्कार दीप्ति को साहित्यिक कृतियों के लिए बधाइ देते हुए हिमालिनी के उत्तरोत्तर प्रगति की कामना की ।
कार्यक्रम में क्यानडा में हिन्दी साहित्य का प्रवद्र्धन एवम् विस्तार करने वाले हिन्दी के विद्वान शरण घई को दोसाला एवम् सम्मान पत्र प्रदान कर संस्थान द्वारा सम्मान प्रदान किया गया ।
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