हिन्दी प्रेम,मिलन और सौहार्द की भाषा है : श्वेता दीप्ति

  • हिन्दी भाषा प्रेम,मिलन और सौहार्द की भाषा है। यह मुख्यरूप से आर्यों और पारसियों की देन है। हिन्दी के ज्यादातर शब्द संस्कृत,अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। हिन्दी अपने आप में एक समर्थ भाषा है

१० जनवरी , काठमांडू | १९९८ जनवरी से शुरु हिमालिनी आज अपने १९ वर्षों की यात्रा पूरी कर रही है । नेपाल के इतिहास में यह एक उदाहरणीय अध्याय है कि किसी हिन्दी भाषा की पत्रिका ने इतनी लम्बी यात्रा को तय किया है । यह एक सुयोग है कि जनवरी में ही विश्व हिन्दी दिवस मनाया जाता है और हिमालिनी का वार्षिकोत्सव भी । नेपाल के संविधान में इसे एक महत्त्वपूर्ण स्थान दिलाने की कोशिश जारी है और साथ ही समानान्तर में इसका विरोध भी जारी है । परन्तु दुराग्रह से परे अगर देखा जाय तो आज हिन्दी को नकारने की कोई वजह सामने नहीं है क्योंकि, विश्व की दूसरी सबसे बड़ी भाषा है हिन्दी। चीनी भाषा के बाद यह विश्व में सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है। भारत और अन्य देशों में 60 करोड़ से अधिक लोग हिन्दी बोलते,पढ़ते और लिखते हैं।
हिन्दी भाषा प्रेम,मिलन और सौहार्द की भाषा है। यह मुख्यरूप से आर्यों और पारसियों की देन है। हिन्दी के ज्यादातर शब्द संस्कृत,अरबी और फारसी भाषा से लिए गए हैं। हिन्दी अपने आप में एक समर्थ भाषा है
हिन्दी भारत की नहीं पूरे विश्व में एक विशाल क्षेत्र और जनसमूह की भाषा है। 1952 में उपयोग की जाने वाली भाषा के आधार पर यह विश्व में पांचवें स्थान पर थी। 1952 के आसपास वह चीनी और अंग्रेजी के बाद तीसरे स्थान पर आ गई। 1980 में यह पाया गया कि हिन्दी बोलने वालों की संख्या पूरे विश्व में अंग्रेजी भाषियों की संख्या से अधिक है,जो मध्यम वर्ग के एक विशाल क्षेत्र को अपने में समेटे हुए है। इस मध्यम वर्ग की क्रयशक्ति पिछले कुछ वर्षों में काफी बढ़ी है। आज अपने माल के प्रचारप्रसार,पैकिंग,गुणवत्ता आदि के लिए हिन्दी को अपनाना बहुराष्ट्रीय कंपनियों की विवशता है और उनकी यही विवशता आज हिन्दी की शक्ति बन गई है।

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बीसवीं सदी के अंतिम दो दशकों में हिन्दी का अंतर्राष्ट्रीय विकास बहुत तेजी से हुआ है। वेब,विज्ञापन,संगीत,सिनेमा और बाजार के क्षेत्र में हिन्दी की मांग जिस तेजी से बढ़ी है वैसी किसी और भाषा में नहीं है।विश्व के लगभग १५० विश्वविद्यालयों तथा सैंकडों छोटे९बड़े केंद्रों में विश्वविद्यालय स्तर से लेकर शोध के स्तर तक हिन्दी के अध्ययन९अध्यापन की व्यवस्था हुई है।

विदेशों से २५ से अधिक पत्र पत्रिकाएं लगभग नियमित रूप से हिन्दी में प्रकाशित हो रही हैं। यूएई के हम एफ एमसहित अनेक देश हिन्दी कार्यक्रम प्रसारित कर रहे हैं,जिनमें बीबीसी,जर्मनी के डॉयचे वेले,जापान के एनएचके वर्ल्ड और चीन के चाइना रेडियो इंटरनेशनल की हिन्दी सेवा प्रमुख है। ध्यान,योग,आसन और आयुर्वेद विषयों के साथ९साथ इनसे संबंधित हिन्दी शब्दों का भी विश्व की दूसरी भाषाओं में विलय हो रहा है। आज हिन्दी ने अंग्रेजी का वर्चस्व तोड़ डाला है। करोड़ों की हिन्दी भाषी आबादी कंप्यूटर का प्रयोग अपनी भाषा में कर रही हैं।
नववर्ष की स्वर्णिम किरणों के साथ हिमालिनी सुधी पाठकों से मिलती आ रही स्नेह की आकांक्षी है, आपका सहयोग, साथ और स्नेह हमें संवल प्रदान करता है । भविष्य में इसी स्नेह और सहयोग की उम्मीद के साथ मंगलमय शुभकामना । ( सम्पादकीय )

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