हिन्दी से बैर नहीं प्रेम आवश्यक

डा. उमारानी सिंह:हिन्दी से वैर नहीं प्रेम आवश्यक है । हिन्दुस्तान हमारे देश नेपाल का पडÞोसी देश होने के कारण वह हमारे देश की भाषा, संस्कृति और विचारों से अत्यधिक प्रेम करता है और प्रभावित रहता है । इतना ही नहीं वह हर तरह से हमारी रक्षा और सहायता करता है । भारत के आर्थिक सहयोग को हम नकार नहीं सकते । इसलिए हमें भी अपने पडÞोसी देश, उसकी भाषा, संस्कृति और उसके विचारों से अवश्य ही प्रेम करना चाहिए । वह हमारे सुख से सुखी और दुख में दुखी होता है और सहानुभूति प्रकट करता है तो हमें भी उसके सुख में सुखी और दुख में सहानुभूति प्रकट करना चाहिए । प्रेम-भाव दोनों तरफ से आन्तरिक होना चाहिए । तभी आपसी सम्बन्ध स्थायी होता है ।
मैंने सुना है कि किसी नवनिर्वाचित मन्त्री ने हिन्दी भाषा में शपथ ग्रहण किया तो उसे दण्डित किया गया । यह कहाँ का न्याय है – यह तो महाअन्याय है, उस मैत्री के प्रति और भारत देश के प्रति भी । इस मनोवृत्ति में अवश्य सुधार होना चाहिए ।
मैंने बिहार के दरभंगा जिले में नौकरी की है । वहाँ के लोगों में मैंने नेपाल के प्रति अत्यधिक प्रेम और उदारता देखी है । दरभंगा में मिथिला विश्वविद्यालय के निर्माण का आयोजन था । पटना से कमीशन के बडेÞ-बडÞे लोग और शिक्षाविद् का आगमन हुआ था । मैं दरभंगा के एम.आरं महिला महाविद्यालय में लेक्चरर थी । मेरे पति, इन्द्रदेव सिंह -स्वर्गीय) नेपाली कांग्रेस, उस समय दरभंगा में आए हुए थे । दरभंगा में ‘मिथिला विश्वविद्यालय का निर्माण होना चाहिए अथवा नहीं’ -इसी विषय पर लोगों को अपने विचार व्यक्त करने थे । सभी लोगों ने मेरे पति से आग्रह किया कि वे हिन्दी में न बोलकर नेपाली में बोलें और मेरे पति ने बडÞे प्रेम और आदर के नेपाली में, मिथिला विश्वविद्यालय के र्समर्थन में अपना भाषण दिया । उन्होंने कहा कि नेपाल की हजारों लडÞकियां दरभंगा में पढÞने आती हैं, यहाँ से ड्रि्री लेकर जाती हैं और नेपाल में बडÞे-बडÞे पदों पर आसीन होती हैं । इस तरह मिथिला विश्वविद्यालय के निर्माण में नेपाल का भी हित है । आज भी मिथिला विश्वविद्यालय के निर्माण में इन्द्रदेव सिंह, नेपाली कांग्रेस के योगदान की चर्चा है । तो इसे कहते हैं देश प्रेम ।
ऐसे तो अनेक उदाहरण हैं- हमारे नेपाल और नेपाली भाषा को साथ लेकर चलने के । परन्तु एक दूसरा उदाहरण नजर आता है, वह यह है कि ‘एम.आर. महिला महाविद्यालय में मेरी नियुक्ति हो चुकी थी और मेरे रहने के लिए कहीं आवास की व्यवस्था नहीं हो पा रही थी । मेरे पति ने मुझसे कहा कि मैं दरभंगा के प्रशासनिक अधिकारी को एक दरखास्त लिखूं कि मैं नेपाल से आई हूँ, मेरी नियुक्ति ‘महारानी रामेश्वरी महिला महाविद्यालय में हर्ुइ है, और मेरे रहने की कहीं व्यवस्थ्ा नहीं हो रही है, इसलिए मेरे लिए एक आवस की व्यवस्था करने की अनुकम्पा की जाए । मैं ने ऐसा ही किया । मुझे उम्मीद नहीं थी कि कोई व्यवस्था होगी । लेकिन आर्श्चर्य है कि दरभंगा महाराज का आवास, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए ही आवंटित थे, उन में से एक आवास मुझे मिल गया । मुझे इसमेर्ंर् इश्वर का कोई करिश्मा ही नजर आया । तो इसे कहते है, पडÞोसी से प्रेम और सम्बन्ध निभाना । जय नेपाल । व्

Loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz
%d bloggers like this: