हिन्दू स्वयंसेवक संघ का विशाल पर्रदर्शन

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन राव भागवत ने विश्व के वर्तमान परिपेक्ष्य में कट्टरवादिता व एकाधिकार को दुनियाँ का सबसे बडÞा दुश्मन बताया है । इस समय समूचे विश्व में व्याप्त समस्याओं का मूल कारण शासकों की कट्टरपंथ और उनके एकाधिकारवाद सोच होने की बात कहते हुए संघ प्रमुख ने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को विश्व में सृजित समस्याओं के लिए प्रमुख जिम्मेदार ठहराया ।
नेपाल में कार्यरत हिन्दू स्वयंसेवक संघ की २०वीं वर्षाँठ पर आयोजित राष्ट्रिय स्वयंसेवक सम्मेलन में प्रमुख अतिथि के तौर पर उपस्थित सरसंघचालक भागवत ने काठमांडू के वनकाली क्षेत्र में स्वयंसेवकों के विशाल जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक हिन्दू को अपने हिन्दू होने पर गर्व महसूस करना चाहिए । भागवत ने नेपाल समेत विश्व के ९० से अधिक देशों में हिन्दू संगठन के काम चलने पर इसे उत्साहबर्द्धक बताया ।
यूँ तो संघ प्रमुख ने राजनीति से संबंधित कोई भी सीधी टिप्पणी नहीं की लेकिन नेपाल के माओवादी की भी कट्टरवादिता और उनके एकाधिकार जमाने के उद्देश्य पर विश्व राजनीति में इसी समय इसी कारण भारी उथल-पुथल मचने का उदाहरण दिया । म्रि्र, ट्यूनिशिया, लीबिया, बहरीन आदि देशों में चल रहे जनआंदोलनों को भागवत ने इसी एकाधिपत्य के खिलाफ लडर्Þाई बताई । अपने संबोधन के क्रम में उन्होंने कहा कि विश्व में यदि हिन्दू सोच व हिन्दू पद्धति का लोग अनुसरण करेंगे तो कई समस्याओं का समाधान स्वतः ही हो जाएगा । अमेरिका का उदाहरण देते हुए भागवत ने वहाँ एक-चौथाई लोगों द्वारा हिन्दू पद्धति अपनाने की जानकारी दी । भागवत का कहना है कि हिन्दू धर्म से ही दुनियाँ में शांति व समृद्धि आ सकती है । संघ की आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए सरसंघचालक ने स्पष्ट किया कि संघ का काम ना तो किसी के विरोध में और ना ही किसी प्रतिक्रिया में चलती है । इसका सीधा और मुख्य उद्देश्य हिन्दू समाज को जगाना, हिन्दू समाज को संगठित करना और उनके गौरव का अहसास दिलाना है ताकि वर्तमान समय में अपने ऊपर होने वाले हमले का सामना करने में हिन्दू समाज सबल, सुदृढÞ व सक्षम बन सके ।
हिन्दू स्वयंसेवक संघ की २०वी वर्षांठ पर नेपाल भर के स्वयंसेवकों व कार्यकर्ताओं का विशाल सम्मेलन १९ फरवरी को काठमांडू में आयोजित किया गया । वनकाली में १० हजार गणवेशधारी स्वयंसेवकों का शारीरिक पर््रदर्शन देख कर उपस्थित लोग दंग रह गए । पर्ूव में मेची से पश्चिम में महाकाली तक के अधिकांश जिलों के स्वयंसेवकों ने इस सम्मेलन में उत्साहपर्ूवक ढंग से हिस्सा लिया । वनकाली में आयोजित सभा के बाद इन गणवेशधारी स्वयंसेवकों ने राजधानी के प्रमुख रास्तों से होकर घोष सहित भव्य पथ संचालन भी निकाला । इस दौरान जिन रास्तों से पथ संचालन निकलता आम लोग तालियाँ बजाकर व फूल बरसाकर इसका स्वागत करती नजर आई । वाकई यह दृष्य देखकर ही लोग कहते अद्भुत, आर्श्चर्य, अद्वितीय ।
हिन्दु स्वयंसेवक संघ के इस राष्ट्रीय सम्मेलन को सफल बनाने के लिए संघ के प्रचारकों व स्वयंसेवकों ने काफी मेहनत की थी । देशभर से आए स्वयंसेवक अपने तरफ से २०० रुपये शुल्क देकर व अपने पैसे से ही पर्ूण्ा गणवेश की तैयारी कर आए थे । काठमांडू के कई लोगों ने भी संघ के इस कार्यक्रम को सफल बनाने में काफी महत्वपर्ूण्ा योगदान दिया ।

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