हिसाब, कौन देगा ?

हिसाब, कौन देगा ?
गंगेश मिश्र

Saptari-tanab
भीड़ थी,
फ़िर भीड़ में,
कैसे लगी,
निशाने पे गोली ?
लाठी टूटी बुढ़िया की,
चूड़ी बहुरिया की,
अनाथ हुए बच्चे;
हिसाब कौन देगा ?
हर-बार यही होता है;
आसमाँ रोता है,
धरती गीली होती है;
पर,
किसीको, क्या फ़र्क़ पड़ता है ?
आम हैं,  आम की तरह,
ऐसे ही गिरते हैं, टप-टप।
हिसाब, कौन देगा ?
रहनुमाई करते हैं,
क्या, ख़ाक करते हैं ?
मोहब्बत-ए- कुर्सी में,
खोए रहते हैं, जो;
दूर से गिरती,
लाशों को देखते हैं, जो।
हिदायत देते हैं,
पर,
हिसाब, कौन देगा ?

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