हूँ वृक्ष मैं, आधार तू(संदर्भ नारी दिवस)

woहूँ वृक्ष मैं, आधार तू
गंगेश मिश्रा
है सृजन तू , संहार तू।
है लोक तू, व्यवहार तू।
जीवन दिया, तूने हमें
है माँ मेरी, संसार तू।
नर है अधूरा, बिन तेरे
तू ही इकार, अकार तू।
सहती रही, दुत्कार तू।
हरती धरा की, भार तू।
बेटी कभी, पत्नी कभी
रिश्तों की है, बाज़ार तू।
नारी है तू, अपराजिता
है सृष्टि का, संचार तू।
करता तुझे,सत् नमन
हूँ वृक्ष मैं, आधार तू।

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