हेटौडा डायरी

गोविन्द न्यौपाने

जूते चल पड!
नेपाली ब्राण्ड के चमडÞे के जूते ने अन्य जूतों की तुलना में अपनी पहचान बनाई है। तुलनात्मक रुप में उत्पादन यद्यपि कम है, फिर भी विगत कुछ वर्षों में नेपाल में निर्मित चमडÞे के जूते बाजार में आकर्ष रुप में दिखने लगे हैं। कच्चा पदार्थ भारत से आयात करना पडÞ रहा है, फिर भी नेपाल में ही आवश्यक डिजाइन के जूते उत्पादन हो रहे हैं।
अभी बाजार की मांग है- उचित मूल्य में आकर्ष और टिकाऊ जूते। हेटौडा स्थित एचटीडी शूज कलेक्शन के प्रोपर््राईटरः गोबिन्द मंग्राती ने कहा- चमडे के सभी प्रकार के जूते, जैसेः पार्टर्ीीूज, स्पोर्टस शूज, स्कूल-काँलेज शूज और फाइबर शूज सभी नेपाल में बन रहे हैं। १५ वषोर्ं से मैं इसी पेशा में संलग्न हूँ। यदि इसी रफ्तार में जूतो का उत्पादन जारी रहा तो विदेशी जूते मंगाने की कोई जरुरत नहीं पडेÞगी। nepali shoes
हांलाकि इसके लिए कच्चा पदार्थ समय में मिलना चाहिए और सरकार की तरफ से दक्ष व्यक्तियों द्वारा तालिम की व्यवस्था भी होनी चाहिए। इससे युवाशक्ति को काम की खोज में विदेश नहीं जाना पडेÞगा। विश्व बाजार में भी नेपाली जूते धडÞल्ले से चल रहे हैं। हांल ही में काठमांडू में प्रदर्शित नेपाल चमडÞा जुत्ता उद्योग संघ की दूसरी पर््रदर्शनी में उत्कृष्ट होने में सफल फाइबर जूता का बाजार भी अच्छा है। मेरे पास कोरल शूज, सगुन शूज और रियल शूज आदि ब्राण्ड के जूते हैं, इससे मुझे अच्छी आमदानी हो रही है, -मगराती का कहना है।
अवार्ड में नयां आयाम
आजकल हेटौडा के बाजार में अवार्ड में देनेवाली बस्तुओं की भरमार देखी जा सकती है। इसी सर्न्दर्भ में हेटौडा के श्रीजन स्टेशनरी एण्ड स्पोर्टस जनरल अर्डर सप्लायर्स ने भी खेलकुद के अन्य समानों के अतिरिक्त पुरस्कार में देनेवाली वस्तुओं के नवीनतम उत्पादन को भारत से आयात किया है। सप्लायर्स के प्रोपाइटर सरोज जोशी कहते हैं- पुरस्कार देने के लिए इन वस्तुओं की आवश्यकता हमेशा पडÞती रहती है। इसके लिए हम किसी प्रकार का सम्झौता करना नहीं चाहते हैं। हम लोगों का आइटम टिकाउ और अकर्ष होगा तो इससे पुरस्कृत लोग बहुत ही खुश होंगे। पुरस्कारों के इन नवीनतम आइटमों ने काठमांडू, हेटौडा, वीरगंज, पोखरा और नारणगढ में अच्छा बाजार लिया है।
राजश्व संकलन में वृद्धि
ट्राफिक पुलिस द्वारा मध्यमाञ्चल में संकलन होनेवाले राजस्व में वृद्धि हर्ुइ है। ट्राफिक पुलिस ने सवारी चालकों पर कारवाही बढÞाने के कारण ऐसा सम्भव हुआ है। मध्य क्षेत्रीय ट्राफिक पुलिस कार्यालय पथलैया -बारा) के अनुसार चालू आर्थिक वर्षके ८ महने में गत वर्षकी उसी अवधि के तुलना में  ज्यादा राजस्व संकलन हुआ है। ट्राफिक तथ्यांक अनुसार आव २०६९/०७० के फागुन तक ३ करोड ६७ लाख ९१ हजार रुपया राजस्व संकलन हुआ है। लेकिन मध्यमाञ्चल के १६ जिला इकाई से गत वर्षमें २ करोड ६६ लाख ४८ हजार रुपया राजस्व संकलन हुआ था। चालू आव के ८ महिने में १ लाख ८९ हजार ६ सय ६९ सवारी साधनों पर कारवाहीमा हर्ुइ थी तो गत आव में २ लाख १२ हजार ५ सय २८ सवारी साधनों पर कारवाही हर्ुइ।
मध्य क्षेत्रीय ट्राफिक पुलिस कार्यालय पथलैया के उपरीक्षक विकास श्रेष्ठ के अनुसार चालू आव की अगहन महिने में सबसे ज्यादा ५८ हजार रुपैँया राजस्व संकलन हुआ है। इसी तरह फागुन तक सब से ज्यादा पथलैया ट्राफिक ने ८३ लाख २८ हजार ७ सय ५० रुपया राजस्व संकलन किया था और, सब से कम रामेछाप जिला से १ लाख १३ हजार ९ सय रुपैँया राजस्व संकलन हुआ है।
दो सौ से ज्यादा क्षयरोगी का उपचार
मकवानपुर जिले में गत श्रावण से कार्तिक तक २ सौ १४ क्षयरोगी का उपचार जिला जनस्वास्थ्य कार्यालय मकवानपुर ने सञ्चालन किया। उक्त अवधि में उन लोगों का निःशुल्क उपचार हुआ था। उपचाररत रोगी में से १४३ पुरुष और ७१ महिलाएं थी, ऐसा कार्यालय के क्षयकुष्ठ निरीक्षक कपिलदेव झा ने बताया। उनके अनुसार जिले में गत वर्ष६९८ क्षयरोगी थे। जिनमें ४४७ पुरुष और २५१ महिला थी। गत वर्षउपचाररत रोगियों में ९५ प्रतिशत स्वस्थ हुए।
बाँकी ५ प्रतिशत में से कुछ रोगियों की मृत्यु हर्ुइ है तो कुछ को उपचार के लिए बाहर भेजा गया है। डट्स पद्धति से जिनका उपचार हुआ था, उन्हें उपचार अवधिभर -२० महिने तक) मासिक १५ सौ रुपये पोषण भत्ता के रुप में प्रदान किया गया था। इस वर्षडट्स प्लस पद्धति से किसी का उपचार नहीं हुआ है, ऐसा निरीक्षक झा ने बताया।
मकवानपुर में मनहरि, हाँडिखोला, बसामाडि, फापरवारी, पदमपोखरी, चुरियामाई, हर्नामाडि, छतिवन और हेटौंडा नगरपालिका क्षेत्रों को क्षयरोग से प्रभावित बताया गया है। रोग पहचान के लिए जिला स्वास्थ्य कार्यालय के साथ साथ मनहरि, भीमफेदी, पालुङ, छतिवन और फापरवारी मिलाकर ६ केन्द्र स्थापित हंै। मकवानपुर के ४३ गाविस और नगर के सभी वडा में क्षयरोग का निःशुल्क उपचार उपलब्ध हैं। इसके लिए स्वास्थ्यकर्मी और स्वास्थ्य स्वयंसेविका सहजीकरण में लगे हुए हैं। इसके अतिरिक्त हेटांैडा सिमेन्ट उद्योग में भी क्षयरोग की दवा निःशुल्क उपल्बध कर्राई गई है, ऐसी जानकारी क्षयकुष्ठ निरीक्षक झा ने दी। धूल और धूएं के सर्म्पर्क में ज्यादा समय बितानेवाले लोगों को क्षयरोग का खतरा ज्यादा रहता है।
सिगरेट फ्याक्ट्री, सिमेन्ट फ्याक्ट्री, क्रसर उद्योग, गलैँचा उद्योग, पत्थर-गिट्टी फोडÞनेवाले, और इन कारखानों में काम करनेवालों में ज्यादातर क्षयरोगी मिलते हैं। स्वास्थ्य कार्यालय के अनुसार मातृ समूह, स्वयंसेविका, झाडÞफूक करनेवाले, पुरोहित, शिक्षक, विद्यार्थी, समाजसेवी, राजनीतिक दल के प्रतिनिधि, सञ्चारकर्मी सहित इन वगोर्ंं को क्षयरोग के विषय में सचेतना प्रदान की गई थी, और उसके चलते गाँवगाँव में जो क्षयरोगी हैं, उनकी पहचान करने में सुविधा मिली है, -ऐसा झा ने बताया।

loading...

Leave a Reply

Be the First to Comment!

Notify of
avatar
wpDiscuz